कौन थे “दारा शिकोह” जिनकी कब्र को तलाश रही है केंद्र सरकार की बनाई एएसआई टीम, जानिए…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 फ़रवरी 2020, 05:30 AM Updated: 19 फ़रवरी 2020, 05:30 AM
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हाल ही में केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक टीम का गठन किया गया. जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के 7 लोगों को मिलाकर बनाया गया है. मंत्रालय द्वारा इस टीम को जो काम सौंपा गया है वो अपने आपमें काफी दिलचस्प है क्योंकि इस टीम को दारा शिकोह की कब्र (dara Shikoh Grave) को ढूंढना है.

टीए अलोन (निदेशक, स्मारक, एएसआई) द्वारा इस टीम की अध्यक्षता की जा रही है. इस टीम में वरिष्ठ पुरातत्व विशेषज्ञ आरएस बिष्ट, केएन दीक्षित, बीआर मणि, सतीश चंद्र, सईद जमाल हसन, बीएम पांडे और केके मोहम्मद सदस्य हैं. दारा शिकोह की कब्र की तलाश करने के लिए टीम के पास तीन महीने तक का समय है.

वहीं, अब सवाल ये खड़ा होता है कि जिनकी कब्र की तलाश के लिए भारत सरकार द्वारा एक टीम तक गठन कर दिया गया वो आखिर हैं कौन? दारा शिकोह का इतना ज्यादा महत्व क्यों है और कैसे एएसआई की टीम दारा शिकोह की कब्र की तलाश कर पाएगी? आइए आपको इन सभी सवालों के जवाब देते हैं…

कौन थे दारा शिकोह?

आपको बता दें कि दारा शिकोह मुगल बादशाह शाह जहां के सबसे बड़े बेटे थे. इनका जन्म आज से तकरीबन 405 वर्ष पूर्व 1615 ई. में हुआ था. वहीं, 1659 ई. में अपने ही छोटे भाई औरंगजेब के साथ युद्ध के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी.

“आजाद ख्याल के थे मुसलमान” 

इतिहासकारों की माने तो उनके मुताबिक दारा शिकोह अपने वक्त के बहुत आजाद ख्याल के मुसलमान थे. यहां तक उन्होंने इस्लाम और हिन्दू की परंपराओं में समानताएं तलाशने का भी प्रयास किया था. दारा शिकोह ने भागवत गीता और अन्य 52 उपनिषदों का पारसी भाषा में अनुवाद किया था.

विशेषज्ञ का कहना है कि 17वीं सदी के दारा शिकोह काफी आजाद सोच रखने वाले एक महान विचारक थे. कुछ इतिहासकारों का तो ये भी कहना है कि औरंगजेब के स्थान पर दारा शिकोह मुगल शासक बनते, तो धार्मिक लड़ाइयों के दौरान जाने वाली कई हजार जानें बच सकती थीं. बता दें कि एक किताब “द मैन हू वुड बी किंग” मे लिखा हुआ है कि दारा शिकोह बहुत दयालु, उदार और हर किसी को साथ लेकर चलने वाले शख्स थे. हालांकि वो युद्ध के मैदान में अधिक प्रभावी नहीं थे.

दारा शिकोह को बताया “सच्चा हिंदुस्तानी”

देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए एक कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य के अलावा अन्य वक्ताओं ने दारा शिकोह को “सच्चा हिंदुस्तानी” कहा था. बता दें कि पिछले वर्ष यानी 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विवि में दारा शिकोह के नाम से रिसर्च चेयर की स्थापना भी की गई थी.

यहां भेजा गया था दारा शिकोह का सिर

‘शाहजहांनामा’ के मुताबिक “औरंगजेब समेत युद्ध में हार होने के बाद दारा शिकोह को जंजीर से बांधकर दिल्ली लाया गया था और फिर दारा शिकोह का सिर काटकर आगरा किले में भेजा था, जबकि बाकी के शरीर को दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित हुमांयू के मकबरे के परिसर में ही दफना दिया था.”

ASI की टीम कैसे खोजेगी दारा शिकोह की कब्र

संस्कृति मंत्रालय ने जिस टीम का गठन किया है उनका कहना है कि “हुमायूं के मकबरे के परिसर में उस परिवार के बहुत से लोगों की कब्र है. सबसे बड़ी परेशानी ये है कि ज्यादातर कब्रों पर तो किसी तरह का कोई नाम ही अंकित नहीं है. अभी तक टीम ने इसके लिए किसी तरह की कोई कार्य प्रणाली निर्धारित नहीं की है. ये पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि कब्र वहीं है, हालांकि ये एक संभावना जरूर है, जैसा कि शाहजहांनामा में कहा गया है. वो बात अलग है कि किसी ने भी कब्र की सही स्थान का जिक्र नहीं किया है.”

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