दलित उत्पीड़न के आंकड़ों में सबसे आगे यादव-मुस्लिम! यूपी पुलिस रिपोर्ट के बाद घिरे PDA के दावे| UP Police Crime Report

Nandani | Nedrick News Uttar Pradesh Published: 17 Jun 2026, 01:00 PM | Updated: 17 Jun 2026, 01:00 PM

UP Police Crime Report: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर बहस तेज हो गई है। आगामी चुनावों की आहट के बीच विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की एक रिपोर्ट ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिन पर अब सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

और पढ़ें: नेपाल के होटल में क्या हुआ था उस रात? खान सर विवाद से जुड़े प्रिंस यादव की मौत ने बढ़ाए सवाल| Raushan Anand Brother Death

चार महीनों में दर्ज हुए हजारों मामले| UP Police Crime Report

पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के तहत कुल 4,741 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 14,672 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट में आरोपियों की सामाजिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 2,160 आरोपी यादव समुदाय से जुड़े बताए गए हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर मुस्लिम समुदाय के 1,983 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के समर्थक अपने-अपने तरीके से इन आंकड़ों की व्याख्या कर रहे हैं।

वाराणसी और लखनऊ जोन में सबसे ज्यादा मामले

पुलिस द्वारा जारी जोनवार विवरण में वाराणसी और लखनऊ क्षेत्र को सबसे अधिक संवेदनशील बताया गया है। वाराणसी जोन में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 650 आरोपी यादव समुदाय से और 428 आरोपी मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताए गए हैं। यह प्रदेश में सबसे अधिक संख्या मानी जा रही है। लखनऊ जोन में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। यहां 410 आरोपी यादव समुदाय से और 428 आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए गए हैं। गोरखपुर जोन में 297 यादव और 344 मुस्लिम आरोपी दर्ज किए गए हैं। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जोन में मुस्लिम समुदाय के 319 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

कमिश्नरेट स्तर पर भी सामने आए आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ कमिश्नरेट में 77 यादव और 82 मुस्लिम आरोपी दर्ज किए गए हैं। वहीं प्रयागराज कमिश्नरेट में दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में 91 आरोपी यादव समुदाय से बताए गए हैं। पुलिस के आंकड़ों में यह भी उल्लेख किया गया है कि ब्राह्मण समुदाय से 1,601 लोगों और क्षत्रिय समुदाय से 1,698 लोगों को विभिन्न मामलों में आरोपी बनाया गया है।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों और नामजद आरोपियों से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति को आरोपी बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह दोषी सिद्ध हो चुका है। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के फैसलों के आधार पर ही तय होता है।

राजनीति में शुरू हुई नई बहस

रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेता और समर्थक इन आंकड़ों को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक हकीकत का आईना बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि केवल आरोपी बनाए जाने के आधार पर किसी समुदाय के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

और पढ़ें: राजघराने में रिश्तों का महाभारत! विवाद इतना बढ़ा कि निकल आई बंदूक| Madhya Pradesh crime news

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds