न्यूज़ एंकर और सरकार को पड़ी सुप्रीम कोर्ट की लताड़, आंखें मूंदकर बैठने से नहीं चलने वाला काम

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 सितम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 23 सितम्बर 2022, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

सुप्रीम कोर्ट की हेट स्पीच मामले पर केंद्र सरकार को लताड़

आज-कल टीवी चैनलों पर न्यूज़ के नाम पर नफरत परोसा जा रहा है और जनता भी पूरे मज़े से इस नफरत की तड़के वाली न्यूज़ का मज़ा ले रही है। देश के उच्च न्यायालय (Supreme Court) ने विभिन्न टीवी चैनलों (TV Channels) पर नफ़रत फैलाने वाले भाषणों को लेकर नाराज़गी जताते हुए केंद्र सरकार (Central Government) से कहा कि उसे ‘मूक दर्शक’ बने रहने की बजाय इस समस्या से निपटने के बारे में सोचना चाहिए। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछते हुए कहा कि वह ‘मूक दर्शक’ बनकर क्यों बैठी है? न्यायालय ने सरकार से यह भी पूछा कि वह विधि आयोग के सिफारिशों के अनुसार कानून बनाएगी या नहीं?

Also read- RSS का क्यों बढ़ रहा है मस्जिद प्रेम, Rahul Gandhi से डर या कुछ और….

हेट स्पीच पर नियंत्रण लगाए सरकार

हेट स्पीच को रोकने और इस पर नियंत्रण लगाने के निर्देश देने को लेकर ग्यारह याचिकाओं की सुनवाई कर रहे जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषणों से निपटने के लिए संस्थागत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कटघरे में तो खड़ा किया ही साथ में एंकर को भी अपनी जिम्मेदारी सही से निभाने की सलाह दी है। अदालत ने इस मामले में केंद्र की ओर से उठाए गए कदमों पर असंतोष जताते हुए टिप्पणी की है कि , ‘सरकार मूक दर्शक क्यों बनी बैठी है? केंद्र को ‘मूक गवाह’ नहीं होना चाहिए और इसके बजाय समस्या से निपटने की सोचना चाहिए’। अदालत ने यह भी कहा है कि ये हेट स्पीच का मामला कोई मामलू मामला नहीं है तथा इसके लिए कोई कानून बनना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि विजुअल मीडिया का ‘विनाशकारी’ उपयोग हुआ है और किसी को भी इस बात की परवाह नहीं है। अखबार तो कोई अब पढता नहीं। आज-कल अखबारों में क्या छपता है, किसी के पास पढ़ने का समय नहीं है और युवा तो पढ़ने के नाम से ही अखबार की ओर नहीं देखते।

एंकर की है अहम भूमिका

उच्च न्यायालय ने टीवी बहस के दौरान एंकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एंकर की जिम्मेदारी है कि वह किसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान नफरती भाषण या शब्द पर रोक लगाए। न्यायमूर्ति केएम. जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषणों से निपटने के लिए संस्थागत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है जो तुरंत ही नफरत फ़ैलाने वाली भाषणों या शब्दों पर आपत्ति जताए और रोक लगाए। हालांकि पार्टी प्रवक्ताओं को भी इसका ध्यान रखना चाहिए लेकिन वे तो एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में ही लगे रहते हैं।

PCI और NBA, अफवाह फ़ैलाने वाली की पक्षकर नहीं हो सकती : शीर्ष अदालत

उच्च न्यायालय की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की मांग को जिसमे उन्होंने इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद (PCI) और नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्रॉडकास्टर्स (NBA) को पक्षकार बनाने की मांग की थी उसे ख़ारिज कर दी। पीठ ने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद और नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्रॉडकास्टर्स को अभद्र भाषा और अफवाह फैलाने वाली याचिकाओं के समर्थन में नहीं शामिल हो सकती।

Also read – 65.46 किलोग्राम सोना किया गया जब्त, DRI का बड़ा ACTION, जानिए पूरा मामला.

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds