शंभू बॉर्डर पर ड्यूटी कर रहे सब इंस्पेक्टर की दम घुटने से मौत, वजह आंसू गोला या कुछ और…

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 17 फ़रवरी 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 17 फ़रवरी 2024, 12:00 AM
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अंबाला के शंभू बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए तैनात जीआरपी के एसआई हीरालाल की आंसू गैस के गोले से दम घुटने से जान चली गई. पानीपत के चुलकाना गांव के रहने वाले हीरालाल की ड्यूटी जीआरपी चौकी में थी. लेकिन कुछ दिन पहले किसानों के आंदोलन पर रोक लगाने के लिए उनकी तैनाती अंबाला के शंभू बॉर्डर पर कर दी गई थी. ड्यूटी के दौरान आंसू गैस के गोले से दम घुटने से उनकी मौत हो गई.

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. यह हादसा तब हुआ जब शंभू बॉर्डर पर किसानों और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. बेकाबू किसानों को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस बल ने आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया, जिसमें एसआई हीरालाल की गैस के गोले से दम घुटने से उनकी मौत हो गई.

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हार्ट अटैक से हो गई थी इस किसान की मौत

आपको बता दें की अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलनरत किसानों को दिल्ली सीमा में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस ने जगह जगह बैरिकेडिंग और सड़कों पर नुकीली कीलों का प्रयोग कर रखा है. इससे पूर्व में भी गुरदासपुर के रहने वाले किसान ज्ञान सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. ज्ञान सिंह पर बैंक का तीन लाख रुपए का कर्जा था. जिसको माफ कराने के लिए वह इस आंदोलन में शामिल हुए थे. शंभू बॉर्डर पर 14 फरवरी शाम लगभग 4 बजे ज्ञान सिंह को दिल का दौरा पड़ा था. आनन फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. और पटियाला के सरकारी अस्पताल में किसान का पोस्टमार्टम किया गया.

सरकार से मुआवजे की मांग

आंदोलन के दौरान बुजुर्ग किसान की मौत के बाद किसान नेता हरविंदर सिंह ने कहा कि वर्ष 2020 में दिल्ली में हुए किसान आंदोलन में ज्ञान सिंह ने बढ़चढकर हिस्सा लिया था. और सरकार से अपनी मांगों को मनवाने के बाद ही वह वापस अपने घर लौटे थे.

ज्ञान सिंह पिछले 22 सालों से किसान के हितों के लिए कार्य करने वाली समिति किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्य थे. 11 फरवरी को वह पटियाला से शंभू बॉर्डर पर ड्यूटी करने के लिए निकले थे. उनका परिवार बेहद गरीब है, उनके पास एक किला भूमि है, जिस पर खेती कर बड़ी मुश्किल से अपने घर का भरण पोषण करते हैं. उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार को पीड़ित परिवार के जीवनयापन के लिए उचित मुआवजा देने की मांग की है. वहीं किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने सरकार से ज्ञान सिंह के परिवार को 20 लाख रुपयों की सहायता राशि और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है.

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