वाचथी रेप केस : 30 साल पुराने बलात्कार के मामले में 215 सरकारी अधिकारियों को मिली सजा, यहां समझिए पूरा मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 30 सितम्बर 2023, 05:30 AM Updated: 30 सितम्बर 2023, 05:30 AM
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1992 में तमिलनाडु के आदिवासी गांव वाचाटी में रेप केस मामले का फैसला आया हैं और 30 साल के बाद कोर्ट ने इस मामले में 215 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल की सजा दी है. इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में दोषी ठहराए गए सभी 215 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सजा को बरकरार रखा है साथ ही हाई कोर्ट ने दोषी पक्षों की अपील खारिज कर दी है.

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जानिए क्या है पूरा मामला?

ये मामला 1992 में तमिलनाडु के आदिवासी गांव वाचाटी में हुआ था जो पश्चिमी तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में सिथेरी पर्वत की तलहटी के नीचे स्थित है. वहीं इस गाँव में मुख्य रूप से आदिवासी और दलित समुदाय रहते हैं और यहां पर अठारह महिलाओं का सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने रेप और हमला किया गया था. दरअसल, वाचाटी गांव में तमिलनाडु प्रशासन के सरकारी अधिकारियों ने छापा मारा था और ये छापा चंदन तस्करी अभियान के तहत मारा गया. चंदन तस्करी अभियान में ग्रामीणों की संलिप्तता को लेकर संदेह जताया गया और इन लोगों को सबक सिखाने के प्रयास में, पुलिस, वन और राजस्व विभाग के अधिकारी, कई अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ, गाँव में पहुंचे.

वहीं 20 जून 1992 को हुए इस करवाई के दौरान जहाँ आदिवासी और दलित समुदायों के कम से कम एक सौ ग्रामीण निवासियों घर में घुसकर मारा गया साथ ही घरों में तोड़फोड़ और उनके मवेशियों को जब्त किया गया. इसी एक साथ अठारह महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और इसका असर दो दिनों तक रहा.

269 सरकारी अधिकारियों में से 215 पाए गये दोषी 

वहीं इसके बाद 1995 में इस मामले की FIR हुई और इस मामले की जाँच के लिए विशेष ट्रायल कोर्ट बनाया गया. ये मामला कोर्ट पहुंचा और 2011 में एक विशेष ट्रायल कोर्ट ने इस मामले पर फैसला देते हुए 269 सरकारी अधिकारियों में से 215 को दोषी पाया. पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को ‘दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार’ का दोषी ठहराया गया. दोषी ठहराए गए लोगों में से चौवन की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी.

मद्रास हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला 

2011 में, मामले में दोषी ठहराए गए लोगों ने अपनी जेल की सजा के खिलाफ अपील दायर की. जिसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय इन अपीलों की सुनवाई हुई और उसके बाद 1992 में हुई इस घटना पर मद्रास हाई कोर्ट ने 30 साल के बाद फैसला दिया. मद्रास हाई कोर्ट जस्टिस पी. वेलुमुरुगन ने अपने फैसले में कहा, “इस अदालत ने सभी पीड़ितों और गवाहों की गवाही को ठोस और विश्वसनीय पाया है. अभियोजन पक्ष ने उनकी गवाही के माध्यम से अपने मामले को साबित किया है.” वहीं मद्रास हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में दोषी ठहराए गए सभी 215 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सजा को बरकरार रखा है. साथ ही हाई कोर्ट ने दोषी पक्षों की अपील खारिज कर दी.

वीरप्पन को पकड़ने के दौरान हुई ये घटना  

ये घटना चंदन तस्कर वीरप्पन को पकड़ने के दौरान हुई. दरअसल, वीरप्पन बड़े पैमाने पर चंदन की तस्करी करता था और वीरप्पन को पकड़ने के लिए सिथेरी पर्वत की सीमा से लगे गांवों और सत्यमंगलम के जंगलों में कई अभियान चलाए. वहीं 20 जून को वाचाटी गांव पर छापा ऐसे ही अभियान का हिस्सा था. वहीं पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने गांव में प्रवेश किया और निवासियों से चंदन तस्करी अभियान के बारे में पूछताछ की और इस दौरान यहां पर ये एक बड़ी रेप की घटना हुई.

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