हाथ जोड़कर बोले—सर हमें बाहर निकालिए: सोनम वांगचुक ने खोली जंतर-मंतर प्रदर्शन की पोल| Sonam Wangchuk News

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Sonam Wangchuk News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक चले जिस छात्र आंदोलन ने देश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी, उसके पर्दे के पीछे की एक बेहद चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दावा किया है कि बाहर से यह प्रदर्शन जितना आक्रामक और अडिग दिख रहा था, अंदर से उसका नेतृत्व उतना ही घबराया और असमंजस में था। वांगचुक के अनुसार, भीड़ कम होते ही आंदोलन की अगुवाई कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं का हौसला टूटने लगा था और वे आंदोलन से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता (Exit Route) तलाश रहे थे।

सोनम वांगचुक ने यह चौंकाने वाले खुलासे यूट्यूबर प्रखर गुप्ता के साथ करीब दो घंटे के पॉडकास्ट में किए।

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‘सर, हम जाना चाहते हैं… कोई रास्ता निकालिए’| Sonam Wangchuk News

पॉडकास्ट में आंदोलन के अंदरूनी हालात बयां करते हुए वांगचुक ने बताया कि मंच से भले ही यह ऐलान किया जा रहा था कि मांगें पूरी होने तक कोई पीछे नहीं हटेगा, लेकिन हकीकत कुछ और थी। उन्होंने कहा, “मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन नेतृत्व में शामिल एक-दो लोग बार-बार यह सवाल उठाते थे कि इस आंदोलन को कैसे खत्म किया जाए? एक वक्त तो ऐसा आया जब कुछ नेताओं ने हाथ जोड़कर मुझसे कहा सर, हम यहां से निकलना चाहते हैं, कोई रास्ता निकालिए।”

वांगचुक ने बताया कि नेताओं का यह दोहरा रवैया उनके ‘राजनीतिक माइंडसेट’ की वजह से था। जैसे ही 8-9 दिनों बाद जंतर-मंतर पर भीड़ कम होने लगी, नेतृत्व का मनोबल सीधे तौर पर गिर गया।

अनशन खत्म कराने के लिए राहुल गांधी के नाम पर भी हुआ था विचार

वांगचुक ने दावा किया कि 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले हालात बहुत कमजोर हो चुके थे। आयोजकों को लग रहा था कि आंदोलन से कुछ ठोस नहीं निकलेगा। ऐसे में प्रदर्शन को एक सम्मानजनक अंत देने और वांगचुक का अनशन तुड़वाने के लिए कई विकल्पों पर विचार चल रहा था। इसी दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम भी सामने आया था कि उनके जरिए अनशन खत्म कराया जाए, ताकि इसे एक बड़ा राजनीतिक मोड़ दिया जा सके।

20 जुलाई के लाठीचार्ज ने अचानक बदल दिया पूरा माहौल

वांगचुक के मुताबिक, आंदोलन की डूबती नैया को 20 जुलाई के ‘संसद मार्च’ ने अचानक नई ऊर्जा दे दी। दरअसल, 18 जुलाई को वांगचुक को जबरन धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 20 जुलाई को निकाले गए मार्च में पुलिस के साथ झड़प और लाठीचार्ज हुआ। इस टकराव और सख्ती के बाद युवाओं में दोबारा गुस्सा फूटा और जंतर-मंतर पर भीड़ फिर से उमड़ पड़ी, जिससे आंदोलन को संजीवनी मिल गई।

अनशन से पहले वांगचुक ने ली थी सीजेपी नेताओं की परीक्षा

वांगचुक ने यह भी खुलासा किया कि वह पहले दिन से इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थे। जब CJP ने 20 जून से प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया और उनसे अनशन पर बैठने की अपील की, तब वांगचुक स्विट्जरलैंड में एक पूर्व-निर्धारित विज्ञान सम्मेलन में जाने वाले थे।

वांगचुक ने नेतृत्व के इरादों और दृढ़ता को परखने के लिए एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि वह 28 जून को लौटकर जुड़ेंगे और देखना चाहते हैं कि क्या युवा नेता अपने दम पर 8 दिनों तक इस मंच को संभाल सकते हैं। जब नेताओं ने 8 दिन तक मोर्चा संभाले रखा, तब जाकर वांगचुक 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए और भूख हड़ताल शुरू की।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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