हेग कोर्ट के फैसले को भारत ने कूड़ेदान में डाला: चिनाब किरथई प्रोजेक्ट पर काम तेज, पाकिस्तान की धमकी बेअसर| Indus Waters Treaty news

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 01 सितम्बर 2026, 09:03 PM Updated: 01 सितम्बर 2026, 09:03 PM
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Indus Waters Treaty news: सिंधु जल समझौते (IWT) को लेकर भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना सख्त और स्पष्ट रुख दोहरा दिया है। हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) के अंतरिम आदेश और टिप्पणियों को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत ने इस तथाकथित मध्यस्थता अदालत के अधिकार क्षेत्र और वजूद को कभी स्वीकार ही नहीं किया है। वहीं, भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर दशकों से लटके ‘किरथई स्टेज-II’ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर काम की रफ्तार तेज कर दी है।

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विदेश मंत्रालय ने दिखाया आईना| Indus Waters Treaty news

सोमवार को विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) रखने का भारत का फैसला पूरी तरह लागू है। भारत हेग कोर्ट के किसी भी आदेश या अंतरिम उपाय को वैध नहीं मानता। इस बीच, रणनीतिक मामलों के जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्म चेलानी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि हेग स्थित कोर्ट के इस फैसले का जमीनी स्तर पर कोई कानूनी असर नहीं होगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत ने इस ट्रिब्यूनल को ‘गैर-कानूनी’ मानकर इसकी कार्यवाही का बहिष्कार किया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निकायों के पास अपने फैसले जबरन लागू कराने की कोई स्वतंत्र पुलिस या सुरक्षा एजेंसी नहीं होती। जब कोई संप्रभु देश किसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को ही खारिज कर देता है, तो उसके फैसलों की कानूनी हैसियत शून्य (Non-Est) हो जाती है।

हेग कोर्ट की टिप्पणी और पाकिस्तान की खुशी

रॉयटर्स के मुताबिक, हेग कोर्ट ने कहा था कि सिंधु जल समझौता अभी भी पूरी तरह लागू है और भारत को कश्मीर में अपने हाइड्रो प्रोजेक्ट्स का दायरा सीमित करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त न्यूट्रल एक्सपर्ट जुलाई 2027 तक यह तय करेगा कि भारत के प्रोजेक्ट्स संधि के अनुकूल हैं या नहीं। इस अंतरिम टिप्पणी पर पाकिस्तान जश्न मना रहा है।

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान फिर से धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर भारत ने 65 साल पुरानी संधि की शर्तों का उल्लंघन किया, तो इसे ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) माना जाएगा। हालांकि, भारत ने उनकी इन गीदड़भभकियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।

1984 से अटके किरथई-II प्रोजेक्ट को मिली नई रफ्तार

भारत ने संधि को स्थगित करने के बाद सिंधु बेसिन में अपने पावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने का फैसला लिया है:

  • 930 मेगावाट की क्षमता: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बनने वाला किरथई स्टेज-II प्रोजेक्ट साल 1984 से अटका पड़ा था।
  • जमीन और जिम्मेदारी: प्रोजेक्ट के निर्माण में तेजी लाने के लिए सरकार ने इसकी कमान ‘चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’ को सौंपी है, जिसने हाल ही में 197 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया शुरू की है।

‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को और पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का नियंत्रण भारत को मिला था। लेकिन बीते साल कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा 26 बेकसूर पर्यटकों की नृशंस हत्या के बाद भारत ने सख्त नीति अपनाते हुए साफ कर दिया कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” भारत ने IWT को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया और सीमा पार आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत जोरदार सैन्य कार्रवाई भी की थी। भारत का स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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