Sheikh Hasina Death Penalty: हसीना को फांसी की सज़ा… बांग्लादेश बारूद के ढेर पर, क्या भारत वापस भेजेगा पूर्व PM को?

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Sheikh Hasina Death Penalty: बांग्लादेश की राजनीति सोमवार को उस मोड़ पर पहुंच गई, जहां पूरा देश सांस थामकर बैठ गया था। पिछले साल जुलाई में हुए बड़े पैमाने की हिंसा को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना को स्पेशल कोर्ट (ICT) ने मौत की सज़ा सुनाई है। महीनों तक चले हाई-प्रोफाइल मुकदमे के बाद यह फैसला आया, जिसने न केवल बांग्लादेश की राजनीतिक जमीन को हिला दिया, बल्कि आने वाले चुनावों पर भी गहरा असर डाल दिया है।

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ढाका की कड़ी सुरक्षा के बीच आया बड़ा फैसला- Sheikh Hasina Death Penalty

78 वर्षीय हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला ढाका के एक कड़े सुरक्षा इंतज़ाम वाले कोर्टरूम में सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के पीछे हसीना ही थीं। कोर्ट के मुताबिक यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि “संगठित और योजनाबद्ध हिंसा” थी, जिसमें सैकड़ों निर्दोष प्रदर्शनकारियों को मारा गया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार उस एक महीने के ‘जुलाई विद्रोह’ में करीब 1,400 लोग मारे गए थे।

भारत में रह रहीं हसीना पहले ही भगोड़ा घोषित

पांच अगस्त 2024 को भारी विरोध और हिंसा के बाद सत्ता से बेदखल हुईं हसीना, बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच वे आज तक भारत में ही ठहरी हुई हैं। अदालत ने पहले उन्हें फरार घोषित किया था और फिर अनुपस्थिति में मुकदमा चलाकर यह फैसला सुनाया। यह पूरी कार्यवाही ऐसे समय में हुई जब देश में फरवरी 2025 में संसदीय चुनाव होने हैं। हसीना की अवामी लीग को पहले ही चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया है। इस फैसले ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

ICT कैसे बना हसीना के खिलाफ कार्रवाई का मंच?

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) मूल रूप से 1971 के युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए बनाया गया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने इसमें संशोधन कर इसके दायरे को बढ़ाया और हसीना तथा उनके शासनकाल के वरिष्ठ नेताओं को भी इसके अधिकार क्षेत्र में शामिल कर दिया। हसीना सरकार के पतन के बाद से ज्यादातर अवामी लीग नेता गिरफ्तार हुए, कई देश छोड़कर भाग गए और बांग्लादेश का राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल गया। ICT ने अपने आदेश में कहा कि हसीना ने निहत्थे छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हमलों को रोकने के बजाय बढ़ावा दिया, और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई न करना भी मानवता के खिलाफ अपराध के दायरे में आता है।

हसीना पर लगाए गए 5 बड़े आरोप

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में पाँच संगीन आरोप गिनाए, जिनमें से हर एक उन्हें सबसे कठोर सज़ा देने के लिए काफी था।

1. प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि हसीना ने खुद घातक बल के उपयोग की अनुमति दी, जिससे भारी संख्या में मौतें हुईं। इसे “संगठित नरसंहार” माना गया।

2. हेलीकॉप्टरों से गोलीबारी

गवाहों ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान ऊपर से गोलियों की बारिश हुई। अभियोजन के अनुसार यह कार्रवाई हसीना के आदेश पर की गई थी।

3. छात्र अबू सईद की हत्या

22 वर्षीय अबू सईद की मौत को अदालत ने “टारगेटेड किलिंग” माना। आरोप है कि यह भी हसीना के निर्देश पर हुआ।

4. शवों को जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास

अशुलिया इलाके में प्रदर्शनकारियों के शव जलाए जाने का दावा किया गया, ताकि असली मौत का आंकड़ा छिपाया जा सके। हालांकि हसीना खेमे ने यह आरोप सिरे से खारिज किया।

5. चंखरपुल हमला

अदालत ने माना कि हसीना और उनके सहयोगियों ने चंखरपुल क्षेत्र में किए गए घातक हमले की मंजूरी दी थी, जिसमें छह निहत्थे प्रदर्शनकारी मारे गए।

क्या भारत हसीना को वापस भेजेगा?

यह फैसला आते ही दो बड़े सवाल उठे कि क्या भारत उन्हें वापस भेजने के लिए बाध्य होगा? और उनका भविष्य क्या होगा? कई रणनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो भारत फिलहाल ऐसा कदम नहीं उठाएगा।
कारण स्पष्ट हैं कि हाल के महीनों में पाकिस्तानी सेना और बांग्लादेश के सैनिक अधिकारियों के बीच बढ़ती नज़दीक़ी, ढाका का ISI के प्रभाव में आना, और भारत-बांग्लादेश संबंधों का कमजोर होना। भारत बांग्लादेश को उस दिशा में धकेलने से बचना चाहेगा, जहां उसके लिए सुरक्षा चुनौतियाँ और बढ़ जाएँ।

बांग्लादेश का अगला कदम क्या?

फैसले के तुरंत बाद देशभर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। ढाका में पहले से तनाव है, और विपक्ष यह फैसला राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है। वहीं, यूनुस सरकार इसे “न्याय की जीत” बता रही है।

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