Randeep Hooda Career Story: आज बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा का जन्मदिन है और इस मौके पर हर तरफ उनके शानदार किरदारों की चर्चा हो रही है। वैसे तो बॉलीवुड में संघर्ष की कहानियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन रणदीप हुड्डा और राम गोपाल वर्मा का यह किस्सा सबसे अलग है।
क्या आपने कभी सुना है कि किसी एक्टर को काम ‘न करने’ के लिए हर महीने पैसे मिलते हों? जहां एक्टर्स काम ढूंढने के लिए दर-दर भटकते हैं, वहीं रणदीप हुड्डा को फिल्म डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने 3 साल तक घर बैठने के लिए हर महीने 35 हजार रुपये दिए। पूरे 3 साल तक सिर्फ घर बैठने की सैलरी! पर क्यों? इसके पीछे की असली कहानी आपके होश उड़ा देगी।
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Randeep Hooda को Ram Gopal Varma ने क्यों दिए पैसे
दरअसल, यह बात तब की है जब रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए स्ट्रगल (Struggle) कर रहे थे। उस वक्त उनकी पहली फिल्म ‘एक’ बीच में ही ठप हो गई थी। घर चलाने और मुंबई में टिके रहने के लिए रणदीप को पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए वे छोटे-मोटे रोल ढूंढने लगे। तभी उनकी मुलाकात मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा से हुई।
राम गोपाल ने रणदीप के अंदर का स्टार देख लिया था। वे रणदीप को एक बड़े प्रोजेक्ट से मुख्य अभिनेता (Lead Actor) के तौर पर लॉन्च करना चाहते थे। लेकिन रामू की सिर्फ एक ही शर्त थी—कि रणदीप उनके प्रोजेक्ट से पहले स्क्रीन पर कहीं और दिखाई न दें, कोई छोटा-मोटे काम न करें। जब राम गोपाल ने उनसे उनके महीने का खर्च पूछा, तो रणदीप ने हिसाब लगाकर बताया—35 हजार रुपये।
तीन साल तक 35 हजार
बस फिर क्या था! राम गोपाल वर्मा ने रणदीप को तीन साल तक हर महीने 35 हजार रुपये दिए ताकि वे सिर्फ घर पर बैठें, अपनी बॉडी और एक्टिंग पर काम करें और उनके प्रोजेक्ट का इंतजार करें।
वैसे इस मजेदार किस्से पर खुद रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) ने हंसते हुए बताया था कि जब राम गोपाल ने उनसे खर्च पूछा, तो उन्होंने उसमें अपने फ्लैट के किराए से लेकर दोस्तों के साथ पार्टी करने तक का सारा खर्च जोड़कर 35 हजार बताया था। स्थिति यह हो गई थी कि रणदीप के घरवाले (हरियाणा में) समझने लगे थे कि उनका बेटा मुंबई में कोई गलत काम या ठगी करने लगा है, क्योंकि बिना काम किए हर महीने पैसे जो आ रहे थे! ऊपर से राम गोपाल की मर्जी के बिना रणदीप को अपने बाल या दाढ़ी तक कटवाने की इजाजत नहीं थी।
2005 की सुपरहिट फिल्म
और आखिरकार, तीन साल के लंबे इंतजार के बाद राम गोपाल ने रणदीप हुड्डा को साल 2005 में अपनी सुपरहिट गैंगस्टर फिल्म ‘डी’ (D) से एक दमदार हीरो के रूप में बॉलीवुड में लॉन्च किया। और जैसा कि सब जानते हैं, राम गोपाल की वो पारखी नजर बिल्कुल सही साबित हुई और फिल्म ‘डी’ से रणदीप हुड्डा ने साबित कर दिया कि वे बॉलीवुड में एक लंबी पारी खेलने आए हैं।
तो यह थी रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) के शुरुआती दिनों की वो अनोखी कहानी, जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। वैसे, आपको रणदीप हुड्डा की कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है—’डी’ (D), ‘सरबजीत’ या फिर ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।













































