Operation Mahadev: पहलगाम और सोनमर्ग हमलों के मास्टरमाइंड को सेना ने किया ढेर, ऑपरेशन महादेव की बड़ी सफलता

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 28 जुलाई 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 28 जुलाई 2025, 12:00 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Operation Mahadev: जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना ने एक और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 28 जुलाई को श्रीनगर के लिडवास इलाके में सेना ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के खतरनाक कमांडर हाशिम मूसा को मार गिराया, जो न सिर्फ पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था, बल्कि सोनमर्ग टनल हमले में भी शामिल था। यह एनकाउंटर भारतीय सेना की ताकत और रणनीति का एक बेहतरीन उदाहरण साबित हुआ है, जिससे आतंकवादियों के बीच डर का माहौल फैल गया है। आईए आपको इस खबर के बारे में विस्तार से बताते हैं।

और पढ़ें: Why people leaving India: भारत से बाहर जाने का बढ़ता ट्रेंड: 2024 में 2 लाख से ज्यादा भारतीयों ने छोड़ी अपनी नागरिकता! जानें क्या है वजह

पहलगाम और सोनमर्ग हमले- Operation Mahadev

पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के बाइसरन घाटी में हुआ था। इसमें पांच आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों पर हमला किया, जिनमें ज्यादातर हिंदू थे। इस हमले में M4 कार्बाइन और AK-47 जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, लेकिन बाद में उसने इससे मुँह मोड़ लिया। हाशिम मूसा का नाम इस हमले में भी सामने आया था।

सोनमर्ग टनल हमला 2024 में हुआ था, जिसमें सात लोगों की जान गई थी, जिनमें छह मजदूर और एक डॉक्टर शामिल थे। इस हमले का भी लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्शन था और हाशिम मूसा का नाम इसमें भी शामिल था। इन दोनों हमलों की साजिश और संचालन में हाशिम मूसा की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

हाशिम मूसा: आतंकवादी कमांडर की पहचान

आपको बता दें, हाशिम मूसा, जिसे सुलैमान शाह मूसा फौजी भी कहा जाता था, लश्कर-ए-तैयबा का एक खतरनाक कमांडर था। वह पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पैरा-कमांडो था और एक ट्रेन सैनिक था। 2022 में, हाशिम मूसा भारत में घुसपैठ कर लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुआ। इसके बाद उसने कई आतंकवादी हमलों की साजिश रची और उन्हें अंजाम दिया। हाशिम मूसा ने पहलगाम हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। वह बाइसरन घाटी में 15 अप्रैल से मौजूद था और सात दिन तक रेकी (जासूसी) करता रहा।

ऑपरेशन महादेव और लिडवास एनकाउंटर

भारतीय सेना ने हाशिम मूसा को खत्म करने के लिए ऑपरेशन महादेव शुरू किया था, जो 96 दिन तक चला। सेना ने ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और मानव खुफिया का इस्तेमाल किया और लिडवास के जंगलों में उसकी लोकेशन ट्रैक की। 28 जुलाई को सेना ने लिडवास इलाके को घेर लिया और हाशिम मूसा और उसके दो साथियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। छह घंटे की मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकवादी मारे गए।

मुठभेड़ में AK-47, ग्रेनेड और IED जैसे हथियार बरामद हुए। हाशिम के पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट और सैटेलाइट फोन भी मिला, जो पाकिस्तान की ISI से उसका संपर्क दिखाता है।

स्वदेशी तकनीक और सटीक रणनीति

इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि सेना ने स्वदेशी ड्रोन और रडार का इस्तेमाल किया, जिससे जंगलों में छिपे आतंकवादियों को ढूंढने में मदद मिली। थर्मल इमेजिंग से आतंकवादियों की गतिविधियों का पता चला, और IED को निष्क्रिय करने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस ऑपरेशन में सेना ने नागरिकों की सुरक्षा का खास ध्यान रखा, ताकि किसी भी तरह का नुकसान न हो।

भारत की सुरक्षा पर असर

हाशिम मूसा का अंत भारतीय सेना की बड़ी कामयाबी है। इससे न केवल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के मनोबल को तोड़ा गया है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी संगठन से सख्ती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

और पढ़ें: India vs Vietnam MBBS Fees: वियतनाम में MBBS 4 लाख में, भारत में 1 करोड़ में क्यों? श्रीधर वेम्बु ने GDP का गणित खोला, कहा- ये शर्मनाक है!

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds