नेपाल में तबाही को लेकर 72 घंटे का हाई-अलर्ट, यूपी-बिहार पर मंडराया जल प्रलय का खतरा | Nepal Flood Update

Rajni | Nedrick News Nepal Published: 27 अगस्त 2026, 11:40 PM Updated: 27 अगस्त 2026, 11:40 PM
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Nepal Flood Update: नेपाल से इस वक्त की सबसे बड़ी और डरावनी खबर आ रही है, जहां तबाही का खतरा अभी टला नहीं है। चीन ने अगले 72 घंटों के लिए एक हाई-अलर्ट जारी किया है, जिसके मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा पर बनी एक अस्थायी झील कभी भी टूट सकती है।

अगर ऐसा हुआ, तो 30 लाख घन मीटर पानी नेपाल के निचले इलाकों के साथ-साथ भारत के बिहार और यूपी में जल प्रलय ला सकता है। साथ ही विनाशकारी बाढ़ से अब तक 270 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन असली खतरा अभी आना बाकी है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगले 3 दिन नेपाल पर बेहद भारी पड़ने वाले हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जिससे भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश भी हाई-अलर्ट पर आ गए हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है कि तबाही का पूरा मंजर और क्या जमीनी हकीकत

और पढ़ें: नेपाल में मची भारी तबाही! भोटेकोशी नदी का तांडव, दर्जनों जवान लापता | Nepal Flood Update

Nepal Flood में 1500 लोग लापता!

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई बाढ़ (Nepal Flood) ने चारों ओर हाहाकार मचा दिया है। बाढ़ और भूस्खलन के बाद स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इस विनाशकारी तबाही को देखते हुए चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि अगले 3 दिन नेपाल के लिए और भी भारी हो सकते हैं, क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। इस बीच, मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब तक 270 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लापता लोगों के आंकड़े तो हैरान कर देने वाले हैं, करीब 1500 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

अगले 3 दिन का खतरा

चीन के जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया 72 घंटे का हाई-अलर्ट बेहद डराने वाला है। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में मंडरा रहा यह खतरा आने वाले तीन दिनों में महातबाही का रूप ले सकता है। दरअसल, नेपाल-तिब्बत सीमा पर भारी भूस्खलन (Landslide) के कारण मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया है, जिससे वहां एक विशाल अस्थायी कृत्रिम झील बन गई है।

चीन की सैटेलाइट और हाइड्रोलॉजिकल रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से अगले 3 दिनों में इस झील में 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी जमा हो सकता है। यह अस्थायी बांध मिट्टी और पत्थरों का है, जो इतने भारी पानी का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 72 घंटों में यह बैरियर कभी भी टूट सकता है। यदि यह झील टूटती है, तो लाखों गैलन पानी एक झटके में नीचे की ओर बहेगा। यह पानी अपने रास्ते में आने वाले गांवों, पुलों और बस्तियों का नामोनिशान मिटा सकता है। इस पानी के बहाव से भोटेकोशी, त्रिशूली और गंडकी नदियों का जलस्तर अचानक कई मीटर ऊपर उठ जाएगा, जिससे निचले इलाकों में लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा।

अब तक हुई तबाही का मंजर

इस अचानक आई आपदा (Flash Flood) के कारण अब तक 270 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1,500 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 300 से अधिक भारतीय और अन्य देशों के पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल-चीन व्यापार की लाइफलाइन माने जाने वाले रसुवा और नुवाकोट जिलों में भारी नुकसान हुआ है। यहाँ करीब 42 किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग, कई महत्वपूर्ण पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बॉर्डर क्रॉसिंग पूरी तरह बह गए हैं।

भारत के बिहार और यूपी में हाई अलर्ट

नेपाल का यह सैलाब (Nepal Flood) भारत की चिंता भी बढ़ा रहा है, क्योंकि त्रिशूली और भोटेकोशी का पानी आगे चलकर भारत की गंडक और नारायणी नदियों में मिलता है। बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है, क्योंकि यहाँ निचले इलाकों में 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव (बाढ़ की लहर) आने की आशंका है।

वहीं, यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में भी प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। दूसरी ओर, नेपाल के मौसम विज्ञान विभाग (DHM) ने भी देश के कई प्रांतों में अगले तीन दिनों तक मानसून के सक्रिय रहने और भारी बारिश होने की चेतावनी दी है, जिससे भूस्खलन और मलबे के बहाव का जोखिम और बढ़ गया है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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