Nepal flood News: नेपाल में भोटेकोशी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 177 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों समेत लगभग 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, लापता लोगों में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ विदेशी नागरिक और राहत कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। सुबह के वक्त आए इस तेज सैलाब ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में बुनियादी ढांचे, घरों, गाड़ियों और प्रमुख पुलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इसके चलते एक दर्जन से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गई हैं।
भारत ने इस भीषण त्रासदी के बीच तुरंत हाथ बढ़ाते हुए मानवीय सहायता के तौर पर 37.5 टन आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी है।
अचानक कहां से आया इतना पानी? जांच में 3 बड़ी थ्योरी| Nepal flood News
बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा के पास ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा में दाखिल हुआ और देखते ही देखते निचले इलाकों में फैल गया। चूंकि रसुवा में पिछले 24 घंटों में 7 मिलीमीटर से भी कम बारिश दर्ज हुई थी, इसलिए नेपाल के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल का मानना है कि यह बाढ़ बारिश जनित नहीं है। विशेषज्ञ इसके पीछे तीन प्रमुख वजहें तलाश रहे हैं:
- मलबा जमा होने से बनी अस्थायी झील का टूटना: रसुवागढ़ी से करीब 20 किमी दूर पहाड़ से भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें खिसककर नदी में गिरने के निशान मिले हैं। आशंका है कि मलबे से नदी का प्रवाह रुका, पीछे पानी का विशाल दबाव बना और बांध टूटने पर सैलाब नीचे आ गया।
- लैंडस्लाइड की घटना: पहले तिब्बत सीमा पर भूकंप के झटकों की बात सामने आई थी, लेकिन अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) के अपडेटेड डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से स्पष्ट हुआ कि यह कंपन बड़े भूस्खलन की वजह से था।
- ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF): ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में किसी बर्फीली झील के अचानक फटने की आशंका की भी वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
भारत में क्यों बढ़ी चिंता? बिहार और यूपी में अलर्ट
नेपाल की यह बाढ़ भारत के लिए सीधी चुनौती बन रही है। नेपाल में त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी बनती है, जो भारत की सीमा में वाल्मीकिनगर से प्रवेश कर ‘गंडक’ कहलाती है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने गंडक बेसिन से सटे इलाकों को अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
- बिहार के 6 जिलों में निगरानी: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। पश्चिम चंपारण रास्ते का पहला जिला होने के कारण सबसे संवेदनशील है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF और SDRF की टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं।
- उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले: गंडक के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए यूपी के महराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
राहत की बात यह है कि कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा नदियां इस प्रवाह तंत्र से अलग हैं, इसलिए जलस्तर बढ़ने का मुख्य असर केवल गंडक के बहाव क्षेत्र तक ही सीमित रहने का अनुमान है।









































