दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ की घोषणा के बाद राष्ट्रपति ने इसे तुरंत हटाया, विपक्ष पर साधा निशाना

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Martial law South Korea: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक योल ने बुधवार एक अहम घोषणा करते हुए देश में लागू आपातकालीन मार्शल लॉ को हटा दिया। इससे पहले मंगलवार रात को उन्होंने अचानक मार्शल लॉ की घोषणा कर दी, जिससे पूरा देश चौंक गया।

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राष्ट्रपति यूं (South Korea’s President Yoon Suk-yeol) ने कहा कि विपक्ष अब उत्तर कोरिया के साथ खड़ा हो गया है, ऐसे में देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मंगलवार को देशवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला और आरोप लगाया कि वह उत्तर कोरिया के प्रति सहानुभूति दिखा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरे की बात है।

मार्शल लॉ क्या है? (Martial law South Korea)

मार्शल लॉ एक आपातकालीन कानूनी व्यवस्था (Martial law) है, जिसे किसी भी देश में सरकार द्वारा घोषित किया जाता है। इसके तहत नागरिक शासन के स्थान पर सैन्य बलों को शासन करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार दिया जाता है। यह जरूरी नहीं है कि मार्शल लॉ पूरे देश में लागू हो; इसे किसी विशेष क्षेत्र या क्षेत्र में भी लागू किया जा सकता है और इसे भी मार्शल लॉ के नाम से जाना जाता है।

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मार्शल लॉ क्यों हटाना पड़ा?

योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने मार्शल लॉ को समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद राष्ट्रपति यून की कैबिनेट ने इसे समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। करीब छह घंटे बाद राष्ट्रपति ने मार्शल लॉ आदेश वापस ले लिया।

अचानक घोषित किए गए इस आपातकाल ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी थीं। लोग सड़कों पर उतर आए थे और सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इस विरोध के बीच राष्ट्रपति यून ने इसे समाप्त करने का फैसला किया।

राष्ट्रपति यून का विपक्ष पर हमला

राष्ट्रपति यून सुक येओल ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर कोरिया के प्रति विपक्ष की सहानुभूति देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक विपक्ष उत्तर कोरिया के साथ खड़ा है, देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। विपक्ष के खिलाफ दिए गए उनके इस बयान को राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच गहरी खींचतान चल रही है।

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पहले भी किया जा चुका है लागू

सरकार आमतौर पर आक्रमण, प्राकृतिक आपदाओं या व्यापक सामाजिक अशांति के खतरों के जवाब में मार्शल लॉ घोषित करती है। पिछली बार दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ 1980 में ग्वांगजू विद्रोह के दौरान लागू किया गया था, जब सरकार का विरोध किया जा रहा था। हालांकि मार्शल लॉ को आमतौर पर अंतिम उपाय के रूप में देखा जाता है, लेकिन देश में एक मजबूत कानूनी प्रणाली है और सैन्य रूप से तैयार है।

दक्षिण कोरिया में फिर से क्यों लगा था मार्शल लॉ? 

मिली जानकारी के अनुसार, विपक्ष ने इस साल की शुरुआत में दक्षिण कोरिया के नेशनल असेंबली चुनावों में महत्वपूर्ण जनादेश हासिल किया था। इस परिस्थिति में राष्ट्रपति यून के पास बहुत कम अधिकार थे, और वे कोई भी कानून बनाने में असमर्थ थे। राष्ट्रपति यून ने कानून को वीटो कर दिया। इसके अलावा, राष्ट्रपति यून और उनकी पत्नी के इर्द-गिर्द विवादों की मात्रा ने रेटिंग को लगातार गिरा दिया है। विपक्ष ने तब जांच की मांग शुरू की जब यून की पत्नी पर भी स्टॉक हेरफेर का आरोप लगाया गया।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, मार्शल लॉ की घोषणा कोरिया की डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा समर्थित विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति यून पर सत्ता के दुरुपयोग के संदेह में महाभियोग चलाने की मांग के एक महीने बाद जारी की गई। विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति मार्शल लॉ लागू करके महाभियोग से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

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