जानिए नेपाल से आई शिलाओं से क्यों नहीं बनाई जा रही रामलला की मूर्ति

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर (Ram mandir) का निर्माण हो रहा है और अब 22 जनवरी को ये भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होगा. वहीं इस मंदिर में राम भगवान की बालावस्था मूर्ति को नेपाल (Nepal) और मिथिला (Mithila) में पाए जाने वाले शालिग्राम पत्थर (Shaligram stone) से बनाई जानी थी.  और नेपाल के म्याग्दी जिले के बेनी गाँव से इस पत्थर को पूरे विधि-विधान और लाखों लोगों की श्रद्धा के साथ अयोध्या लाया गया लेकिन अब इस पत्थर से मूर्ति का निर्माण नहीं किया जा रहा है.

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नेपाल से आई शिलाओं से नहीं बनाई जा रही मूर्ति 

जानकारी के अनुसार, राम भगवान की बालावस्था मूर्ति बनाने के लिए नेपाल से अयोध्या लायी गयी उन दो शिलाओं का वजन 14 और 27 टन था लेकिन अब इन शिलाओं से राम मूर्ति नहीं बनाई जा रही है क्योंकि इन शिलाओं को राम मूर्ति बनाने के लिए उचित नहीं पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, इन पत्थरों से मूर्ति नहीं बनाए जाने की एक वजह राम मंदिर से जुड़े संतों की ओर से जताई गई आपत्ति थी. कुछ संतों का मानना था कि इन पत्थरों को मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि कालीनदी की चट्टानों को तोड़ा नहीं जाना चाहिए क्योंकि वे शालिग्राम के बराबर हैं.

वहीं नेपाली प्रतिनिधियों के मुताबिक़, इन शिलाओं की तकनीकी जांच के बाद मूर्तिकारों ने कहा कि ‘ऐसी शिला से मूर्ति तराशना संभव नहीं है. इसके बाद दूसरे पत्थरों से मूर्तियां बनाई गयीं वहीं अब शिला से जहाँ मूर्ति नहीं बनाई जा आ रही है तो वहीं अब इन शिलाओं को उस स्थान पर सुरक्षित रखा गया है जहां राम मंदिर बनाया जा रहा है. पवित्र शिला को गरिमापूर्ण तरीके से मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा ताकि लोग इसकी पूजा कर सकें.”

गण्डकी नदी के किनारे में मौजूद है शालीग्राम के पत्थर

आपको बता दें, नेपाल गृहमंत्री विमलेंद्र ने भारत सरकार से यह गुजारिश की है कि राम जी के मंदिर में हमारी भी कुछ निशानी रहे इसके लिए जनकपुर से कोई न कोई अंश तो होना चाहिए. वहीं मोदी सरकार (modi goverment) और राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से इस प्रस्ताव को हरी झण्डी मिलते ही स्वयंसेवक संघ(RSS), विश्व हिन्दू परिषद(VHP) ने नेपाल के साथ आपसी बातचीत करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि अयोध्या मंदिर अगले करीब 2 हज़ार साल तक के लिए बनाया जा रहा है तो इस बात को ध्यान में रखते हुए इसमें लगने वाले पत्थर की भी कुछ धार्मिक, पौराणिक, आध्यात्मिक महत्ता हो, उसको अयोध्या भेजा जाए. नेपाल सरकार ने तुरंत ही कैबिनेट बैठक से काली गण्डकी नदी के किनारे मौजूद शालीग्राम के पत्थर को भेजने के लिए मंजूरी दे दी.

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