Iran Trump conflict: फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतों के लिए यह जलमार्ग बेहद अहम है, क्योंकि यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही होती है। ऐसे में अगर होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ग्लोबल इकोनॉमी इसकी चपेट में आ सकती है।
मौजूदा हालात को लेकर ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तत्काल समझौता करने के बजाय उनके कार्यकाल के खत्म होने तक इंतजार करने की रणनीति पर विचार कर रहा है। ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल 2029 में खत्म होना है। अगर तनाव इसी तरह जारी रहा तो होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाएगा और दुनिया के सामने बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।
ट्रंप के दावे और जमीनी स्थिति में अंतर? Iran Trump conflict
डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि होर्मुज खुला है और ईरान की ओर से बिछाई गई माइन्स को हटा दिया गया है। हालांकि, समुद्री यातायात के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। रिपोर्ट में मैरीटाइम ट्रैफिक फर्म Kpler के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि हाल के पांच दिनों में होर्मुज से सिर्फ 42 जहाज गुजरे हैं।
युद्ध से पहले यहां रोजाना करीब 130 से 140 जहाजों की आवाजाही होती थी। इनमें तेल टैंकरों के साथ-साथ कमर्शियल और दूसरे छोटे-बड़े जहाज शामिल थे। ऐसे में मौजूदा ट्रैफिक सामान्य स्थिति से काफी नीचे बताया जा रहा है।
ट्रंप के सामने तीन विकल्प
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन के सामने मोटे तौर पर तीन रास्ते हैं। पहला विकल्प बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई का है। लेकिन लंबे समय तक ऐसा ऑपरेशन चलाना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बना सकता है और उनकी सुरक्षा के लिए अमेरिका को बड़ी संख्या में मिसाइल इंटरसेप्टर की जरूरत पड़ेगी।
दूसरा विकल्प ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने का है। हालांकि, ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इसलिए सिर्फ आर्थिक दबाव से तेहरान को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर करना आसान नहीं माना जा रहा।
तीसरा रास्ता मौजूदा स्थिति को बनाए रखने का है। लेकिन ऐसा होने पर होर्मुज में सामान्य जहाजरानी बहाल करना मुश्किल हो सकता है। यही स्थिति अमेरिका पर ईरान के साथ किसी समझौते का दबाव बढ़ा सकती है।
होर्मुज पर कब्जे का ऑपरेशन आसान नहीं
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कथित तौर पर ट्रंप को चेतावनी दी है कि होर्मुज पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने का कोई भी सैन्य अभियान लंबा, महंगा और बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इसका असर अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी के सहयोगी देशों पर भी पड़ सकता है। सबसे बड़ा खतरा वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर है। इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी होर्मुज के विकल्प तैयार करने पर जोर दे रहे हैं। UAE और सऊदी अरब में वैकल्पिक तेल मार्गों को मजबूत करने की कोशिश पहले से चल रही है।
इराक बना रहा तेल सप्लाई के नए रास्ते
होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए इराक भी वैकल्पिक तेल मार्ग विकसित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित एक रूट इराक के बसरा से शुरू होकर हदीथा और फिर उत्तरी इराक के रास्ते तुर्किए के फिशखाबूर तक पहुंच सकता है। वहां से इसे इराक-तुर्किए पाइपलाइन के जरिए सीहान पोर्ट से जोड़ा जा सकता है।
यह पूरा रूट करीब 1200 से 1300 किलोमीटर लंबा हो सकता है और इसकी अनुमानित क्षमता लगभग 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है। इराक बैजी से फिशखाबूर तक पुरानी पाइपलाइन को भी दोबारा चालू करने की दिशा में काम कर रहा है।
इसके अलावा हदीथा से सीरिया के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित बनियास बंदरगाह तक एक और पाइपलाइन का विकल्प सामने है। इसकी लंबाई करीब 850 से 900 किलोमीटर और क्षमता लगभग 15 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। अगर ये परियोजनाएं पूरी होती हैं तो इराक तुर्किए और सीरिया के रास्ते अपना तेल भूमध्य सागर तक पहुंचा सकेगा।
ईरान की रणनीति से बढ़ सकती है मुश्किल
हालांकि वैकल्पिक पाइपलाइनें होर्मुज पर निर्भरता कम कर सकती हैं, लेकिन युद्ध की स्थिति में इन रास्तों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी। आशंका जताई जा रही है कि ईरान सऊदी अरब की तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाने के लिए हूती सहयोगियों का इस्तेमाल कर सकता है। वहीं, इराक के तेल ढांचे पर स्थानीय मिलिशिया के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती है।
यही वजह है कि होर्मुज का संकट सिर्फ एक समुद्री रास्ते का विवाद नहीं रह गया है। इसके पीछे तेल, सुरक्षा, सैन्य रणनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा सवाल जुड़ा हुआ है। अगर तनाव 2029 तक जारी रहता है और होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल नहीं होती, तो दुनिया को लंबे समय तक महंगे तेल और गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।








































