अब क्या होगा अशोक तंवर का? हरियाणा चुनाव से 2 दिन पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में हुए थे शामिल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 अक्टूबर 2024, 05:30 AM Updated: 09 अक्टूबर 2024, 05:30 AM
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हरियाणा विधानसभा (Haryana Assembly Elections) की कुल 90 सीटों में से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 48 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा राज्य में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की है, जबकि दो सीटें इनेलो के खाते में गई हैं। मंगलवार को घोषित हरियाणा के चुनाव नतीजों ने सबको सही साबित कर दिया है, क्योंकि हरियाणा एग्जिट पोल (Haryana Exit Poll) ने कांग्रेस की जीत पक्की बताई थी। वहीं, मतदान से एक दिन पहले कांग्रेस ने दलबदलुओं का जोरदार स्वागत किया। इनमें भाजपा की चुनावी रैली से सीधे कांग्रेस में शामिल होने वाले अशोक तंवर (Ashok Tanwar) का नाम सुर्खियों में है। हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि अब अशोक तंवर का क्या होगा?

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कांग्रेस द्वारा अशोक तंवर का गर्मजोशी से स्वागत – Ashok Tanwar warmly welcomed by Congress

हरियाणा चुनाव में जीत की संभावनाओं से उत्साहित कांग्रेस ने जब चुनाव प्रचार खत्म होने से कुछ घंटे पहले अशोक तंवर को वापस लाया तो इसे भी पार्टी का अति आत्मविश्वास और अहंकार ही माना गया। राहुल गांधी ने भी अशोक तंवर का स्वागत किया। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लेकिन मंगलवार को आए नतीजों ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

 haryana politics vs Ashok Tanwa
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दरअसल कांग्रेस में शामिल होने से कुछ घंटे पहले सिरसा के पूर्व सांसद तंवर ने सफीदों विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रचार किया था और मतदाताओं से भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लाने का आह्वान किया था, जो मंगलवार आए नतीजों के साथ आखिरकार हकीकत में बदल गया।

तंवर को कभी राहुल का करीबी माना जाता था

दरअसल, तंवर दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के संपर्क में थे और एक दिन पहले ही उनकी पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हो गया था। राहुल गांधी जैसे ही अपना भाषण खत्म कर रहे थे, मंच से घोषणा की गई कि कुछ मिनट प्रतीक्षा करें। इसके तुरंत बाद तंवर (48) मंच पर आए और घोषणा की गई कि आज उनकी घर वापसी हो गई है। तंवर को कभी राहुल गांधी का करीबी माना जाता था। दलित समुदाय के नेता तंवर की कांग्रेस में वापसी से पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद थी।

अशोक तंवर का बीजेपी संग इतिहास Ashok Tanwar’s history with BJP

इसी साल तंवर भाजपा के सदस्य बने। वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मतभेद के चलते उन्होंने 2019 में पार्टी छोड़ दी थी। 5 अक्टूबर को शाम 6 बजे होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ घंटे पहले ही वे पार्टी के सदस्य बने। 5 अक्टूबर को तंवर ने ‘X’ पर पोस्ट किया था कि उन्होंने सफीदों (जींद) से भाजपा प्रत्याशी राजकुमार गौतम के समर्थन में आयोजित जन आशीर्वाद रैली में उपस्थित लोगों को संबोधित किया था और उनसे भाजपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए कमल के फूल का बटन दबाने का आग्रह किया था। बाद में तंवर ने यह पोस्ट हटा दी।

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पुराने दल-बदलु हैं तंवर

अप्रैल 2022 में अशोक तंवर आम आदमी पार्टी (AAP) के सदस्य बन गए। आप में शामिल होने से पहले उन्होंने कुछ समय तृणमूल कांग्रेस में बिताया। मई में भाजपा में शामिल होने के बाद तंवर ने सिरसा लोकसभा सीट पर कांग्रेस की कुमारी शैलजा के खिलाफ चुनाव लड़ा। भाजपा ने सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटकर तंवर को मैदान में उतारा।

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