कौन हैं मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल, यहां जानिए उनसे जुड़ी हर एक बात

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 02 नवम्बर 2023, 12:00 AM 🔄 Updated: 02 नवम्बर 2023, 12:00 AM
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Manoj Jarange Patil Details in Hindi – महाराष्ट्र में आरक्षण की मांग हो रही है और इस समय ये मराठा आरक्षण आंदोलन (Maratha Reservation)  हिंसक रूप ले चुका है. आरक्षण की मांग को लेकर जहाँ लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं तो वहीं इस मराठा आरक्षण आंदोलन की वजह से मनोज जरांगे पाटिल इस समय चर्चा में में बने हुए हैं क्योंकि इस आंदोलन का नेतृत्व मनोज जरांगे पाटिल ही कर रहे हैं.

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जानिए कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल?

मनोज जरांगे पाटिल महाराष्ट्र के बीड जिले के रहने वाले हैं और 20 साल पहले वो सूखे की वजह से जालना के अंकुश नगर की मोहिते बस्ती में आकर रहने लगे. जरांगे ने 12वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और इसके बाद से वो आंदोलन से जुड़ गए साथ ही पैसो के लिए एक होटल में भी काम किया. वहीं इस दौरान उन्होंने बीते 12 साल में 30 से ज्यादा बार आरक्षण आंदोलन किए है और साल 2016 से 2018 तक भी उन्होंने जालना में आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व किया.

इस वजह से छोड़ दी कांग्रेस पार्टी 

पहले मनोज जरांगे कांग्रेस के एक कार्यकर्ता थे और बाद में जालना जिले के युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. लेकिन विचारधारा के मतभेद कि वजह से उन्होंने पार्टी के इस पद से  इस्तीफा दे दिया. बाद में मराठा समुदाय के सशक्तीकरण के लिए पार्टी से अलग होकर ‘शिवबा संगठन’ नाम की खुद की संस्था बना ली. वहीँ संगठन चलाने के लिए जब उनके पास पैसे नहीं थे, तब उन्होंने अपनी 2 एकड़ जमीन बेच दी थी. मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे 40 वर्षीय मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) ने 2014 के बाद से कई आंदोलन किए हैं लेकिन इस मराठा आंदोलन के दौरान वो चर्चा में बने हुए हैं.

2011 में शुरू हुई मराठा आंदोलन की मुहिम

मनोज जरांगे ने मराठा आंदोलन की मुहिम 2011 से शुरू की थी और 2023 में अब तक उन्होंने 30 से ज्यादा बार आरक्षण के लिए आंदोलन किया और इस समय वो जरांगे मराठा आरक्षण आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा हैं.  मनोज जरांगे का मराठवाड़ा क्षेत्र में उनका बहुत सम्मान है. वहीं 2016 से 2018 तक जालना में मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व भी मनोज जरांगे ने ही किया था.

जानिए क्या है मराठा आरक्षण

आपको बता दें, मराठा आरक्षण को लेकर जो आंदोलन चल रहा है, उसकी शुरुआत 1 सितंबर से हुई है. ये लोग मराठाओं के लिए ओबीसी का दर्जा मांग रहे हैं. इनका दावा है कि सितंबर 1948 तक निजाम का शासन खत्म होने तक मराठाओं को कुनबी माना जाता था और ये ओबीसी थे. इसलिए अब फिर इन्हें कुनबी जाति का दर्जा दिया जाए और ओबीसी में शामिल किया जाए. कुनबी जाति के लोगों को सरकारी नौकरियों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिलता है. अनशन पर बैठे मनोज जरांगे का कहना है कि जब तक मराठियों को कुनबी जाति का सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

वहीं मनोज जरांगे के नेतृत्व में 24 अक्तूबर से आंदोलन चल रहा है. उधर कई स्थानों पर आंदोलन हिंसक भी हो चुका है. प्रदर्शनकारियों द्वारा कई विधायकों के आवास और सरकारी भवनों पर तोड़फोड़ और आगजनी किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं. राज्य के कई जिलों में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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