INDIA Bloc Internal Rift: विपक्षी गठबंधन INDIA की एकजुटता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 8 जून को प्रस्तावित गठबंधन की अहम बैठक से ठीक पहले कई सहयोगी दलों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। द्रमुक (DMK) के बैठक से दूरी बनाने के फैसले के बाद अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने भी कांग्रेस के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नाराजगी की खबरों ने भी विपक्षी खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाने के उद्देश्य से गठित INDIA गठबंधन इस समय आंतरिक मतभेदों के दौर से गुजर रहा है। हालांकि कई दल अब भी गठबंधन के साथ बने रहने की बात कह रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने विपक्षी एकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस के खिलाफ CPI(M) का कड़ा रुख | INDIA Bloc Internal Rift
CPI(M) महासचिव एम. ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। जानकारी के मुताबिक, इस पत्र की प्रतियां गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी भेजी गई हैं। पत्र में एम. ए. बेबी ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के उन बयानों पर आपत्ति जताई है, जिनमें केरल की राजनीति को लेकर CPI(M) और भाजपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते की बात कही गई थी।
माकपा नेता का कहना है कि केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस ने बार-बार यह प्रचारित किया कि CPI(M) और भाजपा के बीच अंदरूनी समझ है तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच किसी तरह की डील मौजूद है।
‘मनगढ़ंत कहानी’ बताया आरोप
एम. ए. बेबी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि CPI(M) ऐसे आरोपों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकती। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि केरल में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष के दौरान CPI(M) के कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जान गंवाई है। ऐसे में पार्टी पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाना बेहद अनुचित है।
INDIA गठबंधन की भावना पर उठे सवाल
अपने पत्र में CPI(M) नेता ने कहा कि INDIA गठबंधन भाजपा के खिलाफ साझा राजनीतिक लड़ाई के लिए बनाया गया था। ऐसे में सहयोगी दलों पर ही संदेह जताना गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो गठबंधन की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी संसद और राजनीतिक मंचों पर भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करती रहेगी।
DMK और AAP ने भी बनाई दूरी
दिल्ली में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। लेकिन कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते DMK के बैठक में शामिल होने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस बैठक से दूरी बना ली है। लगातार सहयोगी दलों के अलग रुख अपनाने से विपक्षी गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
झारखंड में भी बढ़ी कांग्रेस की मुश्किल
उधर झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस और JMM के बीच असहमति की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस द्वारा एक सीट पर अपने उम्मीदवार प्रणव झा को उतारने के फैसले से JMM नेतृत्व खुश नहीं है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी, क्योंकि गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। हालांकि बाद में JMM ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया।
संजय राउत ने किया बचाव
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने गठबंधन में किसी भी तरह की टूट या बिखराव की बात को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि DMK की अनुपस्थिति का मतलब यह नहीं है कि गठबंधन कमजोर हो रहा है। राउत ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में विपक्ष को TVK के रूप में एक नया और मजबूत सहयोगी मिल सकता है।
हालांकि INDIA गठबंधन की बैठक से पहले जिस तरह विभिन्न सहयोगी दलों की नाराजगी सामने आई है, उसने विपक्षी राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।




























