होली पर इस दरगाह में बरसते हैं प्यार के सूफियाने रंग, हिन्दू मुस्लिम सौहार्द की है बेजोड़ मिसाल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 04 मार्च 2020, 05:30 AM Updated: 04 मार्च 2020, 05:30 AM
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होली के रंगों को प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इसकी कोई मजहब या जात नहीं होती. इसी कथन का एक नमूना आपको उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में स्थित देवा शरीफ दरगाह में देखने को मिल जाएगा. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मात्र 42 किलोमीटर दूर बाराबंकी की इस दरगाह में होली के रंगों में सूफियाना प्यार की झलक देखने को मिलती है. दरअसल हिन्दुओं का पर्व कही जाने वाली होली को इस दरगाह में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. ये हिंदुस्तान की एकमात्र ऐसी दरगाह है जो देश में सौहार्द का संदेश देती है.

होली पर अलग होती है छठा

देवा शरीफ की रौनक तो वैसे पूरे साल रहती है लेकिन होली पर इसकी अलग की छठा देखने को मिलती है. यहां होली समारोह में शामिल होने दूर दूर से लोग आते हैं. यहां मुसलमान होली भी खेलते हैं और दिवाली के दीये भी जलाते हैं. यहां होली में केवल गुलाब के फूल और गुलाल से ही होली खेलने की परंपरा है. कौमी एकता गेट पर पुष्प के साथ चाचर का जुलूस निकाला जाता है. इसमें आपसी कटुता को भूलकर दोनों समुदाय के लोग भागीदारी करके संत के ‘जो रब है, वही राम है’ के संदेश को पुख्ता करते हैं.

हाजी साहब ने शुरू की थी परंपरा

देवा शरीफ हाजी वारिस अली शाह की जन्मस्थली है, जिन्होंने मानवता के लिए प्रेम के अपने संदेश से कई पीढ़ियों के जीवन को प्रभावित किया है. सूफी संत हाजी वारिस अली शाह को सभी धर्म के लोग चाहते थे. इसलिए हाजी साहब हर वर्ग के त्योहारों में बराबर भागीदारी करते हैं. वह अपने हिंदू शिष्यों के साथ होली खेल कर सूफी पंरपरा का इजहार करते थे. इसीलिए उनके निधन के बाद आज भी यह परंपरा आज जारी है. बता दें देवा शरीफ एक ऐतिहासिक हिन्दू-मुस्लिम धार्मिक स्थल है. यहां कौमी एकता की पहचान हाजी वारिस अली शाह की दरगाह है. यहां साल भर लोग दर्शन के लिए आते हैं. यहां की होली उत्सव की कमान पिछले चार दशक से शहजादे आलम वारसी संभाल रहे हैं.

ऐसे पहुंचे

हवाई मार्ग यात्रियों के लिए देवा शरीफ से सबसे नजदीकी अड्डा लखनऊ एयरपोर्ट है. अगर आप ट्रेन से यात्रा कर रहे है तो आपको बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर उतरना पड़ेगा. यहां से देवा शरीफ 12 किलोमीटर की दूरी पर है. लखनऊ से इसकी दूरी 42 किलोमीटर है. अगर आप रोड के जरिये सफ़र तय करना चाहते हैं तो यहां आने के लिए आपको आसानी से परिवहन की सुविधाएं मिल जायेंगी. बाराबंकी से हर आधे घंटे पर आपको बस सेवाएं मिल जायेंगी. वहीँ लखनऊ के कैसरबाग़ से भी सीधी बस सेवाएं मिलती हैं.

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