Haldwani Railway Land Case| बनभूलपुरा केस में बड़ा ट्विस्ट: राहत भी, सख्ती भी…  सुप्रीम कोर्ट का दो टूक आदेश

Nandani | Nedrick News Uttarakhand Published: 26 फ़रवरी 2026, 02:32 PM Updated: 26 फ़रवरी 2026, 02:32 PM
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Haldwani Railway Land Case: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन पर हुए अवैध कब्जों को लेकर दायर याचिकाओं पर बड़ा और साफ संदेश देने वाला आदेश सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि संबंधित भूमि रेलवे की है और उसके उपयोग का अधिकार भी रेलवे के पास ही रहेगा। याचिकाकर्ता यह मांग नहीं कर सकते कि उन्हें उसी जगह स्थायी रूप से बसाए रखा जाए।

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पहले होगी प्रभावित परिवारों की पहचान (Haldwani Railway Land Case)

अदालत ने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले यह तय किया जाए कि कितने परिवार संभावित रूप से विस्थापन की जद में आएंगे। उनकी पहचान की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जाए। अगर परिवारों को हटाया जाता है, तो रेलवे और राज्य सरकार मिलकर पात्र परिवारों को छह महीने तक हर महीने दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता देंगी।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि झुग्गियों में रहने वाले लोगों के प्रति संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। सभी को सम्मानजनक जीवन और बेहतर आवास का अधिकार है।

PMAY के तहत विशेष कैंप का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया है कि नैनीताल जिले का राजस्व विभाग, जिला प्रशासन और रेलवे मिलकर कैंप आयोजित करें, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के पात्र लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन कर सकें।

ईद (19 मार्च) के बाद एक सप्ताह का विशेष कैंप लगाया जाएगा। इसके अलावा बनभूलपुरा में एक पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का आदेश दिया गया है, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगा।

जिलाधिकारी नैनीताल और एसडीएम हल्द्वानी को सभी जरूरी लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित करने को कहा गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी घर-घर जाकर योजना की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र परिवार आवेदन से वंचित न रह जाए।

अप्रैल तक नहीं होगी हटाने की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगली सुनवाई अप्रैल में होगी और तब तक रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत उत्तराखंड के अन्य अवैध कब्जों पर लागू नहीं होगी।

रेलवे का पक्ष: विस्तार के लिए जरूरी है जमीन

केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि हल्द्वानी, उत्तराखंड में रेलवे विस्तार की अंतिम सीमा है। इसके आगे पहाड़ी इलाका शुरू हो जाता है और एक नदी की भौगोलिक स्थिति ट्रैक विस्तार में बाधा बनती है। ऐसे में यह जमीन रेलवे के विस्तार के लिए बेहद अहम है।

सरकार ने यह भी बताया कि 13 भूखंड फ्रीहोल्ड श्रेणी में आते हैं, जिन पर मुआवजा दिया जाएगा। केंद्र की ओर से पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पात्र विस्थापितों को छह महीने तक भत्ता देने की व्यवस्था की जाएगी।

प्रशांत भूषण ने उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि करीब 50 हजार लोग दशकों से वहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे ने अब तक विस्तार की कोई ठोस योजना पेश नहीं की है और इतने बड़े स्तर पर पुनर्वास व्यावहारिक रूप से मुश्किल है।

भूषण ने यह भी कहा कि यह पट्टे की जमीन है और रेलवे ने पहले कभी इसकी मांग नहीं की। उनके मुताबिक, रेलवे के पास बनभूलपुरा के पास खाली जमीन भी उपलब्ध है, जिसका उपयोग किया जा सकता है।

इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को किस जमीन का उपयोग करना चाहिए। अदालत ने दोहराया कि यह सरकारी जमीन है और अवैध कब्जा हटना ही चाहिए।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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