जानिए राजा मेदिनी ने क्यों मांगी थी गुरु गोविंद सिंह जी से उनकी तलवार

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 04 सितम्बर 2023, 05:30 AM Updated: 04 सितम्बर 2023, 05:30 AM
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गुरुद्वारा श्री दशमेश स्थान – सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने देशभर में बहुत सारे गुरुद्वारों का निर्माण करवाया हैं. और उनकी याद में भी काफी गुरुद्वारों का निर्माण भी किया गया है. सिख अपने गुरुओं और उनकी वाणी का बहुत आदर करते है. गुरु गोविंद सिंह जी, गुरुओं में आखरी गुरु थे, उन्होंने कहा था कि मेरे बाद अब कोई और इंसान सिखों का गुरु नहीं बनेगा. क्यों कि गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखों के सारे गुरुओं के बचनो और वनियों को मिलकर एक गुरु ग्रन्थ साहिब लिखी, जो सभी सिखों को यह आदेश दिया गया की अब से सारे सिखों का गुरु, गुरु ग्रन्थ साहिब होगा.

उसी समय से सभी सिखों का सबसे पवित्र ग्रन्थ, गुरु ग्रन्थ साहिब है. जो हर गुरूद्वारे में रखा जाता है. अब सिखों का गुरु, गुरु ग्रन्थ साहिब जी है जो गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा लिखा गया है. आज हम आपको एक ऐसे गुरूद्वारे के बारे में बताएंगे, जो गुरु के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी की याद में नाहर शहर में बनवाया गया था, यह एक ऐसा गुरुद्वारा है जो पहाड़ों में स्थित है. जहाँ ज्यादा सिख आबादी भी नहीं है, फिर रोज उस गुरूद्वारे में अरदास और सेवा की जाती है.

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किस जगह बना है गुरुद्वारा श्री दशमेश स्थान 

यह बात 1685 की है, जब सिरमौर राज्य के राजा मेदिनी प्रकाश ने 10वें गुरु, श्री गुरु गोबिंद राय साहिब जी को निमंत्रण भेज कर अपने राज्य में बुलाया था, 17 वैसाख को गुरु जी सिरमौर राज्य की तत्कालीन राजधानी नाहन पहुंचे. गुरु जी अपने परिवार के सभी सदस्यों और बहुत सारे सिख अनुयायियों के साथ वहां पहुचें थे.

हिमाचल प्रदेश में स्थित नाहर शहर जो शिवालिक पहाड़ियों में एक अलग पहाड़ी पर स्थित है जो 9,32 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. वर्तमान में यह जिला का मुख्यालय है.

गुरुद्वारा श्री दशमेश स्थान (पातशाही 10) का निर्माण उसी जगह किया गया है. जहाँ गुरु जी, नाहर शहर में अपने प्रवास के दौरान रहे थे, यह जगह राजा के किले से ज्यादा दूर नहीं थी. इस गुरुद्वारे में गुरु ग्रन्थ साहिब ठीक उसी जगह स्थापित है जहाँ गुरुओं के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी जा सिहासन था.

गुरु जी का पूरा परिवार और उनके अनुयायी राजा के किले में रहते थे. राजा मेदिनी प्रकाश ने गुरु जी के शिविर की पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक ‘बोरहा’ (छोटा कुआँ) बनवाया था. यह ऐतिहासिक ‘बोरहा’ आज भी मौजूद है. जहां से लोग आज भी पानी इस्तेमाल करते है.

राजा मेदिनी ने क्यों मांगी थी गुरुजी की तलवार

क्या आप जानते है कि गढ़वाल और सिरमौर राज्य पडोसी है, गढ़वाल के राजा फ़तेह शाह और सिरमौर राजा के बीच में कुछ विवाद थे, जिसकी मध्यस्थता गुरु जी ने की और राजा मेदिनी प्रकाश और राजा फतेह शाह के बीच विवाद सुलझ गया.

राजा मेदिनी प्रकाश और राजा फतेह शाह गुरु जी के साथ शिकार पर जाने लगे. एक दिन गुरु जी भी इनके साथ गयें  और गुरु जी ने अपनी तलवार के एक ही वार से एक बड़े शेर को मार डाला. राजा मेदिनी प्रकाश ने यह अपनी आँखों से देखा. वह गुरु जी की शिकार कला से बहुत प्रभावित हुए. (गुरुद्वारा शेरगाह साहिब वहीं बना है, जहां गुरु जी ने शेर को मारा था), यह पौंटा साहिब से करीब 4 किलोमीटर दूर है.

राजा मेदिनी प्रकाश ने गुरु जी से ‘स्मृति चिन्ह’ के रूप में शेर को मारने वाली तलवार देने का अनुरोध किया. गुरु जी ने ख़ुशी से अपनी तलवार राजा को दे दी. गुरु गोबिंद राय साहिब जी की यह पवित्र तलवार अब सिरमौर राज्य की वर्तमान वंशज सुश्री पद्मिनी द्वारा जयपुर (राजस्थान) शहर में संरक्षित है.

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