Mahagun Mywoods Society: हाईराइज सोसाइटियों की बालकनी में होने वाली जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है, इसका एक बेहद खौफनाक और दर्दनाक उदाहरण ग्रेटर नोएडा वेस्ट में देखने को मिला है। कुछ ही घंटों बाद एक बड़ा सपना सच होने वाला था, नए प्लॉट की रजिस्ट्री होनी थी और खाटू श्याम के दर्शन करने थे।
लेकिन एक गीली रेलिंग ने पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। एक हंसता-खेलता परिवार एक झटके में तबाह हो गया। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुन मायवुड्स सोसाइटी में 23वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर केंद्रीय सचिवालय के अफसर रणदीप पात्रा और उनके 11 साल के इकलौते बेटे आरव की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने हाईराइज सोसाइटियों में सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
पुलिस जांच और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, रणदीप पात्रा का परिवार शुक्रवार सुबह राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर के दर्शन के लिए निकलने वाला था। यात्रा पर जाने से पहले घर के मंदिर में पूजा करने के लिए पिता और बेटा बालकनी में गए थे। बालकनी की ग्रिल पर अपराजिता के फूलों की बेल चढ़ी हुई थी। ऊंचाई पर लगे फूल तोड़ने के लिए 11 साल का आरव बालकनी में रखी सीढ़ी पर चढ़ा और रेलिंग पर पैर रखा। दरअसल, बारिश की वजह से फर्श और रेलिंग गीली थी, जिससे वहां भारी फिसलन बनी हुई थी। अचानक आरव का पैर फिसल गया और वह रेलिंग के पार हवा में लटक गया।
बेटे को नीचे गिरता देख पिता रणदीप पात्रा उसे बचाने के लिए तेजी से दौड़े। उन्होंने लटके हुए बेटे का हाथ पकड़कर उसे ऊपर खींचने की पूरी कोशिश की, लेकिन पैर फिसलने के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाए और अपना संतुलन खो बैठे। नतीजा यह हुआ कि दोनों एक साथ 23वीं मंजिल से सीधे नीचे टावर के पास बनी क्लब हाउस की छत पर आ गिरे और दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
कुछ ही घंटों बाद पूरा होना था एक बड़ा सपना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणदीप की पत्नी अमृता श्रीमानी भी केंद्रीय सचिवालय में ही सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। घटना के वक्त वह कमरे के अंदर यात्रा की आखिरी तैयारियां कर रही थीं। अचानक बालकनी से चीखें सुनकर जब वह बाहर भागीं, तो वहां का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पल भर में उनका पूरा संसार उजड़ चुका था।
इस हादसे का एक और बेहद दर्दनाक पहलू यह है कि उसी शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे इस परिवार का एक बहुत बड़ा सपना सच होने जा रहा था। रणदीप पात्रा खाटू श्याम के पास ही अपने एक प्लॉट की रजिस्ट्री कराने वाले थे। पूरा परिवार इस नई संपत्ति और मंदिर दर्शन को लेकर बेहद उत्साहित था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। खुशियों का यह ऐतिहासिक दिन हमेशा-हमेशा के लिए मातम में बदल गया। सूचना मिलने पर पहुंची बिसरख थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी से आशियाना तो ले लेते हैं, लेकिन जब तक हाईराइज सोसाइटियों में बालकनी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाएगी, तब तक ऐसे हादसे परिवारों को उजाड़ते रहेंगे। रणदीप और आरव की मौत महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक चेतावनी है। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले हर परिवार को अब जागना होगा, क्योंकि सुरक्षा की एक छोटी सी चूक जिंदगी भर का कभी न भरने वाला दर्द दे सकती है।












































