FIR filed against Ranveer Singh: कांतारा विवाद में फंसे रणवीर, दैव परंपरा के अपमान पर FIR; जानिए कौन हैं चावुंडी दैव और क्यों भड़का मामला?

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FIR filed against Ranveer Singh: कांतारा फिल्म से जुड़ी दैव परंपरा को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। इस मामले में अभिनेता रणवीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि एक सार्वजनिक मंच पर मजाक के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे अजीब और भद्दे चेहरे के हाव-भाव बनाए, जिनकी तुलना उन्होंने फिल्म कांतारा में दिखाई गई दैव परंपरा से कर दी। खास तौर पर, उन्होंने इन एक्सप्रेशंस को चावुंडी दैव से जोड़ दिया, जिसे लेकर स्थानीय समुदाय और आस्था से जुड़े लोगों में नाराज़गी फैल गई।

शिकायत में कहा गया है कि रणवीर सिंह ने दैव परंपरा जैसे गंभीर और पवित्र विषय को हल्के-फुल्के मजाक में पेश किया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। यही वजह है कि मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है और कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

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कांतारा और दैव परंपरा का गहरा जुड़ाव (FIR filed against Ranveer Singh)

कांतारा सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, बल्कि उसने 21वीं सदी के दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। फिल्म में दिखाई गई दैव परंपराएं भारत की उन लोक आस्थाओं का हिस्सा हैं, जो किसी धार्मिक ग्रंथ से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन, खेतों, जंगलों और नदियों से निकली हैं। ये परंपराएं सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही हैं, जिन्हें गांवों के बुजुर्गों की कहानियों और अनुभवों ने जिंदा रखा है।

दक्षिण भारत के तुलुनाडु क्षेत्र की इन परंपराओं को जब बड़े पर्दे पर दिखाया गया, तो देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग इससे जुड़ाव महसूस करने लगे। उत्तर भारत के दर्शकों ने गुलिगा दैव और पंजुरली दैव को अपने यहां के रक्षक देवताओं जैसे डीह बाबा, तेजाजी, गोगाजी और पाबूजी से जोड़कर देखा। नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन भावना और आस्था का भाव एक जैसा लगा।

विवाद के केंद्र में चावुंडी दैव

रणवीर सिंह के बयान के बाद जिस नाम पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है चावुंडी दैव। कांतारा में चावुंडी को एक स्त्री दैव के रूप में दिखाया गया है, जो भैरव की बहन मानी जाती हैं। पहली नजर में नाम और शक्ति के आधार पर लोग चावुंडी दैव की तुलना उत्तर भारत की चामुंडी देवी से करने लगते हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि दोनों की मान्यताएं और परंपराएं अलग हैं।

कौन हैं चावुंडी दैव?

कर्नाटक के तटीय इलाके तुलुनाडु में चावुंडी दैव को बेहद सम्मान और श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। यह सम्मान थोड़ा भय भी अपने साथ लिए होता है, लेकिन यह डर नकारात्मक नहीं, बल्कि उनके उग्र स्वभाव की वजह से है, जो बुराई और अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। स्थानीय मान्यताओं में चावुंडी दैव सिर्फ एक कहानी या नृत्य पात्र नहीं हैं, बल्कि उन्हें जीवित न्याय करने वाली शक्ति माना जाता है।

यही कारण है कि जब कोई दैव परंपरा को सिर्फ “परफॉर्मेंस” या “रोल” की तरह दिखाता है, तो स्थानीय समाज को यह असहज कर देता है। लोगों को लगता है कि उनकी आस्था को हल्के में लिया जा रहा है।

भूत कोला परंपरा में चावुंडी का स्थान

चावुंडी दैव तुलुनाडु की प्राचीन ‘भूत कोला’ परंपरा का अहम हिस्सा हैं। यह परंपरा खासतौर पर उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों में देखने को मिलती है। चावुंडी चार प्रमुख रक्षक दैवों में से एक हैं। बाकी तीन हैं गुलिगा, पंजुरली और हुली दैव। इन चारों को मिलकर ‘धर्म चतुर्मुख’ कहा जाता है।

लोककथाओं में चावुंडी को गुलिगा दैव की बहन बताया गया है। उनकी कहानियां जमीन, जंगल और पर्यावरण की रक्षा से जुड़ी हैं। माना जाता है कि जब समुदाय अपने पूर्वजों से किए गए वादों को तोड़ता है जैसे जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नदियों का रास्ता रोकना, तालाब सुखाना या बेवजह शिकार करना तब चावुंडी दैव हस्तक्षेप करती हैं। जब बाकी दैवों का दंड भी संतुलन नहीं बना पाता, तब चावुंडी का उग्र और निर्णायक न्याय सामने आता है।

चावुंडी दैव और चामुंडी देवी में फर्क

हालांकि चावुंडी दैव और चामुंडी देवी में कुछ प्रतीकात्मक समानताएं दिखती हैं जैसे उग्र स्त्री शक्ति, खोपड़ियों की माला और विनाश का स्वरूप लेकिन दोनों एक नहीं हैं। चावुंडी दैव स्थानीय लोक आस्था की रक्षक आत्मा हैं, जबकि चामुंडी देवी वैदिक और पौराणिक परंपरा की देवी हैं, जिन्हें देवी दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है।

चावुंडी दैव की पूजा पारंपरिक मंदिरों में नहीं होती। उनकी आराधना ‘भूत कोला’ अनुष्ठान के जरिए की जाती है, जो पूरी रात चलता है। इसमें ढोल-नगाड़े, अग्नि, विशेष वेशभूषा और तांत्रिक नृत्य शामिल होते हैं। माना जाता है कि इस दौरान दैव कलाकार के शरीर में अवतरित होते हैं और समुदाय को मार्गदर्शन देते हैं।

क्यों भड़का विवाद?

रणवीर सिंह के बयान को लेकर लोगों का कहना है कि जब ऐसी गहरी और संवेदनशील परंपराओं को मजाक या अजीब एक्सप्रेशंस से जोड़ा जाता है, तो यह आस्था का अपमान लगता है। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कानूनी मोड़ ले चुका है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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