Delhi News: राजधानी की बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों को देखते हुए दिल्ली सरकार नई सहकारी नीति तैयार करने में तेजी से जुट गई है। सरकार का लक्ष्य सहकारी संस्थाओं को पहले से अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बनाना है। नई नीति के तहत बैंकिंग, परिवहन, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के गठन की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी भी चल रही है, ताकि लोगों को तेज, आसान और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
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डिजिटल होगी पूरी सहकारी व्यवस्था| Delhi News
नई सहकारी नीति का सबसे अहम पहलू रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (RCS) कार्यालय का व्यापक डिजिटलीकरण है। सरकार का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। इससे न केवल संस्थाओं का कामकाज आसान होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी विभिन्न सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदन, पंजीकरण, दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेंगी। इससे सहकारी क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ने के साथ कामकाज की गति भी तेज होने की उम्मीद है।
‘सहकारिता सप्ताह-2026’ में सामने आया रोडमैप
नई नीति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी सोमवार को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘सहकारिता सप्ताह-2026’ के समापन समारोह के दौरान साझा की गई। यह कार्यक्रम केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर रजिस्ट्रार सहकारी समितियों (RCS) की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ आने वाले वर्षों की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि नई नीति का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को समय की जरूरतों के मुताबिक मजबूत बनाना और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
बैंकिंग, परिवहन और नागरिक सेवाओं को मिलेगा नया स्वरूप
प्रस्तावित नीति के तहत बैंकिंग, परिवहन, सार्वजनिक सेवाओं, कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य नागरिक सुविधाओं को सहकारी मॉडल के माध्यम से एकीकृत करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के गठन पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि एक ही मंच के जरिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध होने से लोगों को सुविधा मिलेगी और सहकारी संस्थाओं की उपयोगिता भी बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और सेवा वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिल सकती है।
‘सहकारिता मॉडल देश के विकास का मजबूत आधार’
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की विभिन्न पहलों ने देशभर में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और मजबूती दी है। उनके अनुसार सहकारी संस्थाएं केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों, छोटे व्यापारियों और समाज के अन्य वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारिता का मॉडल समावेशी विकास को बढ़ावा देता है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी अहम भूमिका रहेगी। उनका मानना है कि यदि इस क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीक का बेहतर उपयोग किया जाए, तो इसका लाभ समाज के बड़े वर्ग तक पहुंच सकता है।
उत्कृष्ट योगदान देने वालों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के समापन पर सहकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं, पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान सहकारी संस्थाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने तथा नई नीति को सफलतापूर्वक लागू करने पर भी जोर दिया गया।
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