India Per Capita Income: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन देश के अंदर राज्यों की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड बैंक समूह की 1 जुलाई 2026 को जारी Country Income Classifications रिपोर्ट ने भारत की आर्थिक तस्वीर को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय अभी भी 2,760 डॉलर है, जिसके कारण देश लोअर-मिडिल इनकम कैटेगरी में बना हुआ है। हालांकि, राज्यों के स्तर पर देखें तो तस्वीर काफी अलग है।
रिपोर्ट बताती है कि भारत के पांच राज्य ऐसे हैं, जो अब वर्ल्ड बैंक की अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी की सीमा को पार कर चुके हैं। यह संकेत देता है कि भारत में आर्थिक विकास सभी राज्यों में एक जैसी रफ्तार से नहीं हुआ है। कुछ राज्यों ने तेजी से तरक्की की है, जबकि कुछ राज्य अभी भी कम आय के स्तर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
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कौन से 5 राज्य पहुंचे अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में? India Per Capita Income
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति आय कम से कम 4,636 डॉलर होनी चाहिए। भारत के पांच राज्यों ने इस सीमा को पार कर लिया है।
इन राज्यों में शामिल हैं:
- कर्नाटक
- तेलंगाना
- तमिलनाडु
- गुजरात
- गोवा
इन राज्यों की प्रति व्यक्ति आय अब उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां इन्हें वैश्विक स्तर पर मध्यम से ऊपर की आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ रखा जा सकता है।
महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल भी दहलीज पर
कुछ राज्य ऐसे हैं जो अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में शामिल होने से बस थोड़ा पीछे हैं। इनमें महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक:
- महाराष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय: 4,628 डॉलर
- हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय: 4,627 डॉलर
- केरल की प्रति व्यक्ति आय: 4,610 डॉलर
इन तीनों राज्यों और वर्ल्ड बैंक की तय सीमा के बीच अंतर बेहद कम है। ऐसे में आने वाले समय में इनके भी इस श्रेणी में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड सबसे पीछे
जहां कुछ राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ राज्यों की आर्थिक स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
रिपोर्ट में सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों में शामिल हैं:
- बिहार: 984 डॉलर
- उत्तर प्रदेश: 1,403 डॉलर
- झारखंड: 1,470 डॉलर
खास तौर पर बिहार की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की प्रति व्यक्ति आय भारत के औसत से काफी कम है और यह नेपाल तथा कई उप-सहारा अफ्रीकी देशों के स्तर से भी नीचे बताई गई है।
30 साल में भारत के राज्यों ने लगाई बड़ी छलांग
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पिछले तीन दशकों में हुए बदलाव को लेकर है। साल 1994 में भारत का कोई भी बड़ा राज्य मध्यम आय स्तर तक नहीं पहुंचा था। लेकिन 2025-26 तक कई राज्यों ने बड़ी आर्थिक छलांग लगाई है। आज कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों की प्रति व्यक्ति आय इंडोनेशिया (5,120 डॉलर) और वियतनाम (4,970 डॉलर) जैसे देशों से भी अधिक हो गई है।
वहीं, कई भारतीय राज्य दक्षिण अफ्रीका (6,270 डॉलर), फिजी (6,230 डॉलर) और मंगोलिया (6,210 डॉलर) जैसे देशों के बराबर या उनसे आगे पहुंच चुके हैं।
राज्यों के बीच बढ़ी आर्थिक असमानता
हालांकि, आर्थिक विकास के साथ राज्यों के बीच आय का अंतर भी बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्षेत्रीय असमानता कम होने के बजाय बढ़ी है।
- आय असमानता को मापने वाला गिनी गुणांक 230 से बढ़कर 0.261 हो गया है।
- सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्यों के बीच आय का अंतर 38 गुना से बढ़कर 3.73 गुना हो गया है।
रिपोर्ट बताती है कि मध्यम आय वाले राज्यों ने सबसे तेज विकास किया है। इनकी आय में करीब 36.7 गुना बढ़ोतरी हुई, जबकि सबसे गरीब राज्यों की आय में लगभग 26.6 गुना वृद्धि हुई। इससे साफ है कि विकास हुआ जरूर है, लेकिन उसका फायदा हर राज्य तक बराबर नहीं पहुंचा।
ओडिशा और असम जैसे राज्यों ने बदली तस्वीर
रिपोर्ट में राज्यों की आपसी तुलना भी काफी दिलचस्प है। ओडिशा ने आर्थिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है। अब ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश से करीब 75 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह असम ने झारखंड को पीछे छोड़ दिया है। असम की आय अब झारखंड से लगभग 48 फीसदी अधिक है।
वहीं, पंजाब की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। साल 1994-95 में पंजाब देश के सबसे आगे रहने वाले राज्यों में शामिल था, लेकिन अब वह राजस्थान के बराबर पहुंच गया है और सात अन्य राज्यों से पीछे हो गया है।
भारत की विकास यात्रा का बड़ा संदेश
वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत की आर्थिक कहानी अब एक जैसी नहीं रही। देश का औसत आय स्तर भले ही अभी लोअर-मिडिल इनकम कैटेगरी में है, लेकिन कई राज्य वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
दूसरी तरफ, कुछ राज्यों को शिक्षा, रोजगार, उद्योग और निवेश जैसे क्षेत्रों में अभी लंबा सफर तय करना है। रिपोर्ट यह दिखाती है कि भारत की विकास यात्रा में राज्यों की भूमिका बेहद अहम है और आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय असमानता को कम करना बड़ी चुनौती होगी।
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