Delhi police protest: दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर सोमवार को हुए अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन के बाद गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए दानिप्स (DANIPS) अधिकारी और एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस निलंबन की अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन महकमे के भीतर इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा यह भी गर्म है कि निलंबन के बाद यह तेजतर्रार युवा अधिकारी अपनी नौकरी से इस्तीफा भी दे सकता है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले और आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग के बाद 2022 बैच में सिविल सेवा में आए मनस्वी वशिष्ठ को विभाग में एक बेहद दिलेर और मुखर अफसर माना जाता है।
आखिर क्यों गिरी मनस्वी वशिष्ठ पर गाज? Delhi police protest
इस पूरी कार्रवाई की जड़ में सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुआ जोरदार प्रदर्शन है। शाहदरा जिले में वकीलों के दबाव के चलते एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार का तबादला आनन-फानन में निष्क्रिय (लो-प्रोफाइल) यूनिटों में कर दिया गया था। अपने ही विभाग के आला अफसरों के इस फैसले से पुलिसकर्मियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। ठीक सात साल पहले हुए तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद यह दूसरा मौका था जब दिल्ली पुलिस के जवान अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ सड़क पर उतर आए।
इस प्रदर्शन की कमान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने खुद अपने हाथों में ली। उन्होंने न सिर्फ पुलिस मुख्यालय के अंदर आकर जवानों को लामबंद किया, बल्कि अपने जोशीले भाषणों और ‘पुलिस सम्मान’ के आह्वान से जवानों में ऐसा जोश भरा कि देखते ही देखते सैकड़ों पुलिसकर्मी मुख्यालय पहुंच गए। इनमें कई जवान वर्दी में, कई सादे कपड़ों में और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं।
वरिष्ठ अफसरों के सामने गूंजे नारे, बुलानी पड़ी पैरामिलिट्री
सुबह नौ बजे से शुरू हुआ यह ड्रामा देर शाम तक चलता रहा। सड़क पर बैठे जवान ‘पुलिस एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाते रहे। माहौल गरमाता देख कई स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी नूपुर प्रसाद और डीसीपी सचिन शर्मा जैसे आला अधिकारी मनस्वी को समझाने और बातचीत के लिए मनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन जवान घंटों तक अपनी मांग पर अड़े रहे। भीड़ और तनाव को काबू करने के लिए आखिरकार मुख्यालय पर अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री) को तैनात करना पड़ा। मनस्वी के तेवर और जवानों के बीच उनकी मजबूत पकड़ देख आईपीएस कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी असहज हो गए।
कमिश्नर के साथ 45 मिनट चली बैठक, रखीं तीन शर्तें
दोपहर करीब एक बजे आला अधिकारी जब मनस्वी को पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मिलाने भीतर ले गए, तो उनके साथ सैकड़ों जवान भी अंदर दाखिल हो गए। इसके बाद करीब 45 मिनट तक संपर्क सभा चली। इस दौरान मनस्वी ने विभाग के सामने 10 से ज्यादा मांगें रखीं, जिनमें तीन सबसे अहम थीं:
- वकीलों के खिलाफ दर्ज केस किसी भी हाल में खारिज न किए जाएं।
- एफआईआर से बार काउंसिल के सदस्य का नाम न हटाया जाए।
- प्रदर्शन में शामिल किसी भी जवान पर कोई अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई न हो।
मनस्वी ने अफसरों के सामने बेबाक अंदाज में कहा कि अगर महकमे को कार्रवाई करनी ही है, तो सिर्फ उन पर की जाए, किसी छोटे जवान को निशाना न बनाया जाए। कमिश्नर के आश्वासन के बावजूद शाम पांच बजे जवान फिर सड़क पर बैठ गए और देर शाम तक डटे रहे। अब मनस्वी के निलंबन की खबर ने महकमे के भीतर आईपीएस बनाम दानिप्स और जवानों के बीच तनाव को और हवा दे दी है।













































