Bihar free electricity subsidy: बिहार में घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अहम और विचारणीय अपील की है। उन्होंने राज्य के आर्थिक रूप से सक्षम, संपन्न परिवारों और इनकम टैक्स भरने वाले नागरिकों से आग्रह किया है कि वे स्वेच्छा से आगे आएं और इस मुफ्त बिजली की सरकारी सब्सिडी का त्याग करें। मुख्यमंत्री का कहना है कि जो लोग अपने बिजली बिल का खर्च खुद आसानी से उठा सकते हैं, अगर वे सब्सिडी छोड़ते हैं तो इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला भारी आर्थिक बोझ कम होगा। इस बचत से जो पैसा बचेगा, उसे सीधे तौर पर बिहार की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संवारने में लगाया जा सकेगा।
1.92 करोड़ परिवारों तक पहुंच, हर साल 23 हजार करोड़ का भारी खर्च| Bihar free electricity subsidy
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि मौजूदा समय में बिहार के करीब 1 करोड़ 92 लाख बिजली उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का सीधा लाभ मिल रहा है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को अपने बजट से हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये की भारी रकम सिर्फ बिजली सब्सिडी के तौर पर खर्च करनी पड़ रही है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस योजना का असली मकसद गरीब और जरूरतमंद तबके को आर्थिक राहत पहुंचाना था। ऐसे में जिन परिवारों की माली हालत अच्छी है और जो आर्थिक रूप से पूरी तरह मजबूत हैं, उन्हें सरकारी मदद की वास्तविक जरूरत नहीं है। अगर वे खुद से सब्सिडी छोड़ते हैं, तो यह एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी होगी और राज्य के विकास में उनका सीधा योगदान साबित होगा।
उत्तर प्रदेश के बजट से की तुलना, समझाया अंतर
अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूपी की कुल आबादी बिहार के मुकाबले करीब दोगुनी है, लेकिन वहां बिजली सब्सिडी के मद में सालाना लगभग 6 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आती है। इसके उलट, बिहार जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य में इस मद में सालाना करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसी बड़े अंतर और वित्तीय संतुलन को रेखांकित करते हुए उन्होंने संपन्न नागरिकों से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए सब्सिडी छोड़ने की अपील की।
क्या बंद होने जा रही है 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना?
मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा था कि क्या सरकार इस मुफ्त बिजली योजना को खत्म करने की तैयारी में है? हालांकि, स्थिति पूरी तरह साफ है कि सरकार योजना को बंद नहीं कर रही है। यह किसी योजना की समाप्ति का एलान नहीं है, बल्कि सक्षम वर्ग से की गई महज एक नैतिक और स्वैच्छिक गुजारिश है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं पर इसे लेकर कोई कानूनी बाध्यता या जबरन दबाव नहीं बनाया जा रहा है। गरीब, मध्यमवर्गीय और आम जरूरतमंद परिवारों को पहले की तरह ही 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिलता रहेगा।
स्कूलों का कायाकल्प करने में खर्च होगी बची हुई रकम
मुख्यमंत्री का साफ मानना है कि जनता के पैसों और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसी जगहों पर होना चाहिए जहां से नई पीढ़ी की तकदीर बदली जा सके। बिहार में सरकारी स्कूलों का ढांचा सुधारने, पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर करने और बच्चों के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाने के लिए अतिरिक्त बजट की सख्त जरूरत है। ऐसे में अगर सक्षम लोग सब्सिडी का त्याग करते हैं, तो उससे बचने वाले हजारों करोड़ रुपये सीधे तौर पर स्कूलों की सूरत बदलने और शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प में काम आएंगे।













































