MBBS Admission: वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की एडमिशन लिस्ट पर विवाद, 50 में से 42 मुस्लिम छात्रों के चयन से उठे सवाल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 नवम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 09 नवम्बर 2025, 05:30 AM
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MBBS Admission: जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SVDIME) इन दिनों एक नई बहस के केंद्र में है। कारण है इस संस्थान की एमबीबीएस कोर्स की पहली एडमिशन लिस्ट, जिसने पूरे राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है। कॉलेज की जारी की गई लिस्ट में कुल 50 सीटों में से 42 सीटें मुस्लिम छात्रों को मिली हैं, जबकि हिंदू छात्रों को सिर्फ 8 सीटें दी गई हैं।

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हिंदू ट्रस्ट से चलने वाला कॉलेज, पर विवाद मेरिट बनाम धार्मिक प्रतिनिधित्व पर

यह कॉलेज पूरी तरह माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है  जो एक हिंदू धार्मिक संस्था है और माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान से वित्त पोषित होता है। ऐसे में जब एडमिशन लिस्ट सामने आई तो सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। कई लोगों ने सवाल उठाया  “जब कॉलेज हिंदू ट्रस्ट के फंड से चलता है, तो फिर हिंदू छात्रों को इतनी कम सीटें क्यों मिलीं?”

कई संगठनों ने इसे “असंतुलित और अनुचित चयन प्रक्रिया” करार दिया, वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मेडिकल एडमिशन पूरी तरह मेरिट पर आधारित होते हैं, इसलिए धर्म को इसमें लाने की जरूरत नहीं।

सोशल मीडिया पर मचा हंगामा, बजरंग दल ने जताया विरोध (MBBS Admission)

मामले ने तब जोर पकड़ा जब कॉलेज की एडमिशन लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 50 में से 42 मुस्लिम छात्रों का चयन हुआ, जबकि हिंदू छात्रों की संख्या सिर्फ 8 रही।
इस पर जम्मू राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह “स्पष्ट भेदभाव” है और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि जब कोई कॉलेज धार्मिक संस्था के फंड से चलता है, तो उसमें कम से कम समान प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी लोगों की राय बंटी हुई दिखी। कुछ ने इसे “वैष्णो देवी ट्रस्ट के उद्देश्य के विपरीत” बताया, तो कुछ ने कहा कि “नीट काउंसलिंग की प्रक्रिया में धर्म नहीं, मेरिट ही सब कुछ तय करती है।”

NEET प्रणाली में धर्म की कोई भूमिका नहीं

नीट यूजी (NEET UG) के नियमों के अनुसार, देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पूरी तरह मेरिट और रैंक के आधार पर होता है। इसमें धर्म का कोई स्थान नहीं है।
हर कॉलेज को केंद्रीय और राज्य स्तर पर तय काउंसलिंग प्रक्रिया के अनुसार सीटें भरनी होती हैं।
आमतौर पर निजी मेडिकल कॉलेजों की 50% सीटें ऑल इंडिया कोटा के तहत और बाकी 50% स्टेट कोटा से भरी जाती हैं। जम्मू-कश्मीर में भी यही प्रणाली लागू है, हालांकि स्थानीय नीति के तहत कुछ छोटे बदलाव संभव होते हैं।

आरक्षण केवल जातिगत श्रेणियों (SC, ST, OBC, EWS आदि) पर लागू होता है। धार्मिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। यानी जो भी छात्र NEET परीक्षा में बेहतर रैंक लाते हैं, उन्हें प्रवेश मिलता है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

प्रशासन ने क्या कहा

हालांकि श्राइन बोर्ड या प्रशासन की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का कहना है कि एडमिशन प्रक्रिया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के दिशानिर्देशों के तहत पूरी की गई है और इसमें धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ।

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