Bangladesh China Relations: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान इन दिनों पांच दिवसीय चीन दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच व्यापार, बुनियादी ढांचे, रक्षा और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस दौरान कुल 17 समझौते और समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। हालांकि, इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा किसी समझौते की नहीं, बल्कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री “भीख का कटोरा लेकर चीन नहीं गए हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों नाराज हुए विदेश मंत्री? Bangladesh China Relations
ढाका में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से सवाल किया कि प्रधानमंत्री की चीन यात्रा से बांग्लादेश को आखिर क्या ठोस आर्थिक लाभ मिला है और क्या किसी बड़े वित्तीय पैकेज पर सहमति बनी है। इस सवाल पर विदेश मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल पूछते समय आत्मसम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी देश का प्रधानमंत्री दूसरे देश में आर्थिक मदद मांगने या “भीख का कटोरा” लेकर नहीं जाता, बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों की दिशा तय करने जाता है।
‘Please maintain a little self-respect… please do not ask such questions; we feel very embarrassed. He didn’t go there carrying a begging bowl. He went there 2 establish the direction of the relationship between 2 countries, its content, and its height, scope, and depth.’ pic.twitter.com/XZwWhbsSkQ
— Raheed Ejaz (@RaheedEjaz) June 28, 2026
‘रिश्तों की दिशा तय करने गए थे’
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मकसद केवल आर्थिक सहायता हासिल करना नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीनी नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय संबंधों की दिशा, दायरा और भविष्य के सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश के शीर्ष नेता आपस में बैठकर सिर्फ धनराशि पर बातचीत नहीं करते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग, निवेश और विकास परियोजनाओं पर विचार करते हैं।
किन-किन क्षेत्रों में हुए समझौते?
तारिक रहमान की इस यात्रा के दौरान चीन और बांग्लादेश के बीच कुल 13 समझौता ज्ञापनों (MoU) और 4 अतिरिक्त समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें व्यापार, बुनियादी ढांचे का विकास, रक्षा सहयोग, परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने तीस्ता परियोजना के अध्ययन में चीन के सहयोग पर भी चर्चा की। इसके अलावा संभावित बांग्लादेश-म्यांमार-चीन आर्थिक गलियारे को लेकर भी बातचीत हुई, जिसे क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मोंगला बंदरगाह के विकास पर भी सहमति
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू मोंगला बंदरगाह का विकास भी रहा। चीन ने बांग्लादेश के इस रणनीतिक बंदरगाह के विकास में सहयोग देने का भरोसा जताया है। यह बंदरगाह कोलकाता से लगभग 188 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां से जूट, चमड़ा तथा फ्रोजन फूड जैसे उत्पादों का निर्यात किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से बांग्लादेश की निर्यात क्षमता बढ़ सकती है और क्षेत्रीय व्यापार को भी नया बल मिल सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा खास फोकस
बैठक के दौरान चीन ने बांग्लादेश में सड़क, पुल और रेलवे नेटवर्क के विस्तार में सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया। इसके अलावा अनवारा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और मोंगला इकोनॉमिक ज़ोन के विकास में भी सहयोग का वादा किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, औद्योगिक विकास को गति देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
यात्रा पर बनी हुई है नजर
प्रधानमंत्री तारिक रहमान का चीन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ता सहयोग कई देशों की नजर में है।
हालांकि बांग्लादेश सरकार का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी तरह की आर्थिक सहायता मांगना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और विकास संबंधी साझेदारी को नई दिशा देना है। विदेश मंत्री के बयान ने इस पूरे दौरे को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।






























