मोमबत्ती की रोशनी में रोते-रोते बना था ये गाना, 32 साल बाद भी टूटे दिलों की आवाज है ‘जीते थे जिसके लिए’| 90s Bollywood Songs

Nandani | Nedrick News Mumbai Published: 14 अगस्त 2026, 03:45 AM Updated: 14 अगस्त 2026, 03:45 AM
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90s Bollywood Songs: हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जिन्हें सुनने के लिए किसी खास दौर का होना जरूरी नहीं होता। समय बदल जाता है, संगीत का अंदाज बदल जाता है और सुनने वालों की पसंद भी बदलती रहती है, लेकिन कुछ धुनें ऐसी होती हैं जो हर पीढ़ी को अपने साथ जोड़ लेती हैं। 1994 में आई फिल्म ‘दिलवाले’ का गाना ‘जीते थे जिसके लिए, उसके लिए मरता था’ भी कुछ ऐसा ही है। करीब तीन दशक बाद भी यह गीत प्यार, जुदाई और अधूरे रिश्तों के दर्द को उसी शिद्दत से महसूस कराता है।

इस गाने की खासियत सिर्फ इसके बोल या धुन नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपी कहानी भी बेहद भावुक है। कहा जाता है कि गाने को तैयार करते समय माहौल इतना भावनात्मक हो गया था कि गीतकार समीर और संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण की आंखें तक भर आई थीं। गाना जिस तरह तैयार हुआ, वह किसी आम रिकॉर्डिंग से बिल्कुल अलग अनुभव था।

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अचानक चली गई बिजली और कमरे में छा गया अंधेरा| 90s Bollywood Songs

‘जीते थे जिसके लिए’ पर काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई और पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया। ऐसे में गीतकार समीर ने सुझाव दिया कि काम को बाद में जारी किया जाए। लेकिन संगीतकार नदीम और श्रवण इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका मानना था कि उस वक्त कमरे में जो माहौल बना था, वह इस गीत के लिए बेहद खास था। मन में मौजूद भावनाएं और दर्द शायद दोबारा उसी तरह महसूस न हों। लिहाजा काम रोकने के बजाय उन्होंने मोमबत्तियां जलाईं और उसी हल्की रोशनी में गीत को आगे बढ़ाया।

कहा जाता है कि मोमबत्ती की रोशनी, आसपास का सन्नाटा और गीत से जुड़ी निजी भावनाओं ने माहौल को इतना गहरा बना दिया कि समीर, नदीम और श्रवण भावुक हो गए। इस दौरान उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। यही भाव बाद में गीत की आत्मा बन गए।

निजी दर्द से निकले थे गाने के बोल

समीर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह गीत उनके जीवन के बेहद निजी और दर्द भरे दौर से निकला था। वह एक ऐसी लड़की को याद कर रहे थे, जिससे उन्हें बेइंतहा प्यार था। उसी दर्द को उन्होंने शब्दों का रूप दिया। समीर की कोशिश थी कि गीत सुनने वाले को सिर्फ कहानी समझ में न आए, बल्कि वह उस दर्द को महसूस भी करे। शायद यही वजह रही कि गाना रिलीज होने के बाद लोगों ने इसे सिर्फ एक फिल्मी गीत की तरह नहीं सुना, बल्कि अपनी जिंदगी से जोड़ लिया।

गीत के बोलों में प्रेम के साथ खोने का एहसास है। इसमें उस इंसान की कमी महसूस होती है, जिसके साथ कभी जिंदगी की कल्पना की गई थी। यही भाव आज भी इस गाने को ब्रेकअप, अधूरे प्यार और पुरानी यादों के साथ जोड़ देता है।

थिएटर में दर्शकों की आंखों में भी दिखा वही दर्द

गाना तैयार होने के बाद समीर और नदीम-श्रवण यह देखने के लिए फिल्म देखने पहुंचे कि जिस भावना के साथ उन्होंने इसे बनाया है, क्या वह दर्शकों तक भी पहुंच रही है। जब फिल्म में ‘जीते थे जिसके लिए’ बजा, तो उन्होंने दर्शकों की प्रतिक्रिया देखी। कई लोगों की आंखों में आंसू थे। उस पल उन्हें यकीन हो गया कि गाने में महसूस किया गया दर्द पर्दे से निकलकर सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंच गया है।

यही इस गीत की सबसे बड़ी कामयाबी थी। न कोई भारी-भरकम प्रयोग, न शोरगुल और न ही शब्दों की जटिलता। बस सीधी भाषा, दर्द से भरे बोल और नदीम-श्रवण की भावुक धुन ने इसे यादगार बना दिया।

कुमार सानू की आवाज ने दी अलग पहचान

इस गीत को अपनी आवाज दी थी कुमार सानू ने। 90 के दशक में उनकी आवाज रोमांटिक और दर्दभरे गानों की पहचान बन चुकी थी। ‘जीते थे जिसके लिए’ में उनकी आवाज का ठहराव और दर्द गीत के भाव को और गहरा कर देता है। फिल्म ‘दिलवाले’ का निर्देशन करण राजदान ने किया था। फिल्म में सुनील शेट्टी, परेश रावल और अन्य कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और लगभग 12 करोड़ रुपये की कमाई के साथ सफल रही।

आज भी Gen Z की प्लेलिस्ट में शामिल

इस गाने की असली कामयाबी शायद बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से समझी जा सकती है कि इतने साल बाद भी यह नई पीढ़ी के बीच सुना जाता है। सोशल मीडिया के दौर में जब लोग ब्रेकअप, अधूरे प्यार और पुरानी यादों को जाहिर करने के लिए गानों का सहारा लेते हैं, तब ‘जीते थे जिसके लिए’ आज भी उनकी पसंद में शामिल रहता है।

मिलेनियल्स के लिए यह गाना उनके पुराने दौर की याद है, तो Gen Z के लिए यह एक ऐसा क्लासिक है जो बिना किसी नए म्यूजिक ट्रेंड के भी भावनाओं को सही तरीके से बयान कर देता है।

शायद यही वजह है कि कुछ गाने कभी पुराने नहीं होते। वे सिर्फ संगीत नहीं रहते, बल्कि किसी की याद, किसी का बिछड़ना और किसी अधूरी कहानी की आवाज बन जाते हैं। ‘जीते थे जिसके लिए’ भी ऐसा ही गीत है, जिसे सुनते ही कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उनके अपने दिल की बात है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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