‘मुँह में बेटे का कलेजा ठूँसा, एक एक कर हाथ पैर काटे’, बंदा बहादुर की कहानी आपको रुला देगी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 10 मई 2023, 05:30 AM Updated: 10 मई 2023, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

बंदा बैरागी की कहानी – सिख धर्म में एक से एक महान योद्धा हुए हैं. लेकिन मुगलों को कड़ी टक्कर देने वाले और अंतिम सांस तक मुगलों का डटकर मुकाबला करने वाले बहादुर, साहसी और निर्भीक सिख योद्धा बाबा बंदा सिंह बहादुर की वीरता का हर कोई कायल है. वो बंदा सिंह ही थे जिन्होंने मुग़लों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा. छोटी से उम्र में सन्यास की ओर जाना और फिर वापस सांसरिक जीवन में लौटने उनके जीवन की प्रमुख घटना में से एक थी. जिसने उन्हें एक महान योद्धा और काबिल नेता में तब्दील कर दिया था.

बंदा बैरागी की कहानी

बंदा सिंह बहादुर का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को जम्मू कश्मीर के राजौरी के राजपूत परिवार में हुआ था. वैसे उनके बचपन का नाम तो लक्ष्मण देव था लेकिन 15 साल की उम्र में ही वो वैरागी हो गए जिसके बाद से उन्हें बंदा वैरागी कहा जाने लगा. उसका बचपन का नाम लक्ष्मण देव था. उनके बैराग की कहानी भी उन्हीं की तरह काफी दिलचस्प है.

ALSO READ: जब जहांगीर को सपने में मिला था सिखों के इस ‘गुरु’ के रिहाई का आदेश.

तीर कमान और घुड़सवारी के शौक के चलते उन्होंने बचपन में ही शिकार में भी महारत हासिल थी बात उस वक़्त की है जब एक दिन लक्ष्मण देव जंगल में शिकार के लिए गए, वहां उन्होंने एक हिरनी का शिकार किया. शिकार के बाद जब वो उसके करीब गए तब उनको पता चला की वो हिरनी गर्भवती थी. पेट फाड़ कर देखा, तो वहां दो बच्चे थे. दोनों ने उनकी आंखो के सामने मर गए. इस घटना के बाद लछमन का मन दुनिया से उचट गया. और वे बैरागी हो गए.

गुरु गोविन्द सिंह का गहरा प्रभाव

इसके बाद वो घूमते घूमते महाराष्ट्र के नांदेड़ पहुंचे और गोदावरी नदी के किनारे आश्रम बनाकर रहने लगे. जब सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह के दो साहिबजादों को पंजाब में सरहिंद के नवाब ने दीवार में चुनवा दिया तो गुरु गोविंद सिंह को राजस्थान के पास नारायणा में रहने वाले जैतराम बैरागी से नांदेड़ में रह रहे बंदा बैरागी के बारे में पता चला था. सितम्बर 1708 में नांदेड़ के आश्रम में गुरु गोविंद सिंह पधारे. गुरु गोविंद से वो इतने प्रभावित हुए कि, उसी दिन से माधो दास ने चोग़ा छोड़कर खालसा धर्म अपना लिया. वो गुरु गोविंद सिंह का शिष्य बन गए. गुरु ने नया नाम गुरबक्श सिंह दिया. उन्होने यहीं से तपस्वी जीवन शैली त्याग दी.

‘मुँह में बेटे का कलेजा ठूँसा, एक एक कर हाथ पैर काटे’, बंदा बहादुर की कहानी आपको रुला देगी — NEDRICK NEWS
SOURCE-GOOGLE

इसके बाद गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें पंजाब के लोगों को मुगलों से छुटकारा दिलाने का काम सौंपा. गुरु गोबिंद सिंह जी ने बंदा सिंह बहादुर को 1 तलवार, 5 तीर और 3 साथियों के साथ पंजाब कूच करने का निर्देश दिया. गुरु की आज्ञा मानते हुए गुरबक्श ने पंजाब की ओर कूच किया, लेकिन उनके पीछे गुरु गोविंद सिंह की हत्या कर दी गई. इसके बाद सिख साम्राज्य की बागडोर गुरबक्श ने सम्भाल ली. अपनी बहादुरी के चलते वो बंदा सिंह बहादुर के नाम से मशहूर हुए. 1708 में औरंगज़ेब की मौत के बाद मुगल बागडोर आई बादशाह बहादुर शाह के पास. उसके भाई काम बक्श ने दक्कन में विद्रोह कर दिया था. जिस कारण बहादुर शाह को दक्कन के कैम्पेन पर निकलना पड़ा.

ALSO READ: इतिहास की 5 सिख महिलाओं के बारे में आपको जानना चाहिए?

मुगलों से जीतकर सरहिंद पर कब्जा

इस बीच बंदा सिंह बहादुर पंजाब में सतलज नदी के पूर्व में जा पहुंचे और सिख किसानों को अपनी तरफ करने के अभियान में जुट गए. इस दौरान सबसे पहले उन्होंने सोनीपत और कैथल में मुगलों का खजाना लूटा. कुछ ही महीनों के भीतर बंदा सिंह की सेना में करीब 5000 घोड़े और 8000 सैनिक शामिल हो गए. कुछ दिनों में सैनिकों की संख्या बढ़ कर 19000 हो गई.

ये फौज मुगलों से लड़ी और सतलज और यमुना के बीच का इलाका जीत लिया. इसके बाद जब बंदा सिंह को खबर मिली कि यमुना नदी के पूर्व में हिंदुओं को तंग किया जा रहा है तो उन्होंने यमुना नदी पार की और सहारनपुर शहर को भी नष्ट कर दिया. इस दौरान बंदा सिंह के हमलों से उत्साहित होकर स्थानीय सिख लोगों ने जालंधर दोआब में राहोन, बटाला और पठानकोट पर कब्जा कर लिया.

‘मुँह में बेटे का कलेजा ठूँसा, एक एक कर हाथ पैर काटे’, बंदा बहादुर की कहानी आपको रुला देगी — NEDRICK NEWS
SOURCE-GOOGLE

ALSO READ: सिखों के 5वें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी के अनमोल वचन…

बंदा सिंह बहादुर ने अपने नए कमान के केंद्र को ‘लौहगढ़’ नाम दिया. इस दौरान सरहिंद की जीत को याद करते हुए उन्होंने नए सिक्के ढलवाए और अपनी नई मोहर भी जारी की. पंजाब में बंदा बहादुर की बढ़ती ताकत देख मुग़ल बादशाह बहादुर शाह बौखला उठा और वो स्वयं 1710 में बंदा सिंह बहादुर के खिलाफ जंग के मैदान में उतर गए.

बंदा बैरागी की कहानी – मगुलों की बड़ी सेना के आगे बंदा सिंह नहीं टिक पाए और वहां से भाग निकले. मुग़ल बादशाह ने बंदा को पकड़ने के लिए लाहौर से अपने सैन्य कमांडर भेजे, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए. न 1712 में मुग़ल बादशाह बहादुर शाह का निधन हो गया तो उनके भतीजे ‘फ़र्रुख़सियर’ को मुगल ताज मिला

बेटे का कलेजा निकलकर उनके मुंह में ठूंसा

इस दौरान 3 महीने तक बंदा सिंह बहादुर को प्रताड़ित किया जाता रहा. बंदा सिंह बहादुर और उनके साथियों को हत्या वाले दिन किले से बाहर लाया गया. इसके बाद सिख बंदियों को बहादुर शाह I की कब्र के साथ परेड कराया गया. बंदा सिंह बहादुर को अन्य कैदियों की तरह इस्लाम और मौत में से कोई एक चुनने को कहा गया, लेकिन गुरु गोविंद सिंह के चुने हुए सिपाही ने मृत्यु को चुना. इसके बाद जो हुआ, वो शरीर और आत्मा को कंपाने वाला है.

‘मुँह में बेटे का कलेजा ठूँसा, एक एक कर हाथ पैर काटे’, बंदा बहादुर की कहानी आपको रुला देगी — NEDRICK NEWS
SOURCE-GOOGLE

बंदा बैरागी की कहानी – उनके 4 साल के बेटे अजय सिंह को उनकी गोद में डाल दिया गया और उसकी हत्या करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद उनके सामने ही उनके 4 साल के बेटे को चाकू से टुकड़े टुकड़े में काटा गया और उसका दिल निकाल कर पिता बंदा सिंह बहादुर के मुँह में ठूँस दिया गया. वो स्थिर रहे, एक मूर्ति की तरह – इसे ईश्वर की इच्छा मान कर. फिर कसाई वाले चाकू से बंदा सिंह बहादुर की दाईं आँख को निकाल लिया गया, उसके बाद बाईं आँख काट कर बाहर कर दी गई.

ALSO READ: गुरु नानक देव जी से एक मुलाकात ने बदल दिया था गुरु अंगद देव जी का जीवन.

फिर उनके दाएँ पैर को काट कर अलग कर दिया गया. उसके बाद उनके दोनों हाथों को काट कर उनके शरीर से अलग कर दिया गया. फिर उनके शरीर से मांस निकाले जाने लगे. उसके बाद उन्हें टुकड़ों में काटा जाने लगा. लेकिन, वो टस से मस नहीं हुए और अपना बलिदान दे दिया, पर इस्लाम नहीं अपनाया. उनके बाकी साथियों का भी यही हाल किया गया. औरंगजेब की क्रूरता सबने सुनी है, लेकिन बाकी मुगलो के अत्याचार उससे कम नहीं थे, उलटा हर एक इस्लामी शासक ने क्रूरता की पिछली सारी हदें पार की.

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds