Yash Chopra made SRK king of romance: हवा में लहराती शिफॉन की साड़ी, स्विट्जरलैंड की बर्फीली वादियां और पर्दे पर बाहें फैलाए खड़ा एक आशिक… जब भी हम बॉलीवुड में रोमांस की बात करते हैं, तो यही तस्वीर हमारे दिमाग में आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर प्यार की इस खूबसूरत और जुनूनी परिभाषा को गढ़ने वाला कौन था? वो थे हिंदी सिनेमा के ‘किंग ऑफ रोमांस’— यश चोपड़ा।
यश चोपड़ा ने न सिर्फ दर्शकों को स्क्रीन पर प्यार करना सिखाया, बल्कि उन्होंने एक आम से दिखने वाले एक्टर शाहरुख खान को भारतीय सिनेमा का ‘अल्टीमेट जुनूनी आशिक’ बना दिया। एक ऐसा आशिक जो प्यार में सिर्फ मुस्कुराता नहीं था, बल्कि दीवानगी की सारी हदें पार कर जाता था। तो आइए जानते हैं कि कैसे यश चोपड़ा और शाहरुख खान की जोड़ी ने बॉलीवुड में रोमांस का पूरा इतिहास बदल कर रख दिया।
1993 की डर (Yash Chopra made SRK king of romance)
बात है साल 1993 की। यश चोपड़ा एक ऐसी फिल्म बनाने जा रहे थे जो उस दौर के पारंपरिक रोमांस से बिल्कुल अलग थी। फिल्म का नाम था— ‘डर’। इस फिल्म के लिए यश जी को एक ऐसे एक्टर की तलाश थी जो स्क्रीन पर सिर्फ एक विलेन न लगे, बल्कि उसकी आंखों में प्यार का वो पागलपन दिखे जिसे देखकर दर्शक सहम जाएं। बड़े-बड़े स्थापित सितारों ने इस नेगेटिव रोल को करने से मना कर दिया था। लेकिन तभी एंट्री हुई – शाहरुख खान की।
यश चोपड़ा का विज़न एकदम साफ़ था। वो राहुल मेहरा के किरदार को एक आम विलेन नहीं, बल्कि एक ऐसा ‘जुनूनी आशिक’ बनाना चाहते थे जो सही और गलत की सारी सीमाएं लांघ चुका हो। शाहरुख खान ने यश जी के इसी विज़न को पर्दे पर उतार दिया। जब शाहरुख स्क्रीन पर कहते थे— ‘क-क-क… किरण’, तो उसमें नफरत नहीं, बल्कि एक डरा देने वाली दीवानगी थी। यश चोपड़ा के कैमरे और शाहरुख के एक्टिंग का ही कमाल था कि दर्शकों को फिल्म के हीरो से ज़्यादा उस जुनूनी विलेन से हमदर्दी होने लगी थी। इसी फिल्म ने बॉलीवुड को उसका सबसे बड़ा और सबसे अनोखा आशिक दिया।
1995 में आई DDLJ (Yash Chopra made SRK king of romance)
साल 1993 में ‘डर’ की दीवानगी के बाद आया साल 1995। यश चोपड़ा ने शाहरुख खान के अंदर के उसी जुनून को एक बेहद खूबसूरत और नया मोड़ दिया। अब वक्त था उस विलेन को दुनिया का सबसे रोमांटिक हीरो बनाने का। यश चोपड़ा के बैनर तले एक ऐसी फिल्म बनी, जिसने भारतीय सिनेमा का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया— ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ यानी DDLJ।
भले ही इस फिल्म को यश जी के बेटे आदित्य चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था, लेकिन फिल्म की आत्मा में यश चोपड़ा का ही विज़न धड़क रहा था। इस फिल्म ने शाहरुख खान को ‘राज’ के रूप में पेश किया। एक ऐसा आशिक जो अपनी प्रेमिका को भगाकर नहीं ले जाता, बल्कि उसके पूरे परिवार का दिल जीतकर, बाबूजी की मर्जी से अपनी दुल्हनिया लाता है। शाहरुख की इसी एक्टिंग और संस्कारी आशिक वाले अंदाज ने उन्हें हर लड़की का ड्रीम बॉय बना दिया।
साल 1997 में आई ‘दिल तो पागल है’
फिल्म ‘डर’ और DDLJ की इस शानदार कामयाबी के बाद, यश चोपड़ा ने शाहरुख के साथ मिलकर रोमांस के इस सफर को और आगे बढ़ाया। साल 1997 में आई ‘दिल तो पागल है’, इस फिल्म में यश चोपड़ा (Yash Chopra) ने शाहरुख को ‘राहुल’ के रूप में पेश किया। एक ऐसा जुनूनी प्रेमी, जो मानता है कि दुनिया में कोई न कोई उसके लिए बना है। यश जी के विज़न ने शाहरुख के उस पुराने पागलपन को संगीत, डांस और खूबसूरत ख्वाबों में बदल दिया। शाहरुख की वो दिल जीतने वाली मुस्कान और आंखों का रोमांस, दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।
साल 2004 में आई वीर-ज़ारा
लेकिन यश चोपड़ा और शाहरुख खान के इस सफर का सबसे बड़ा मास्टरपीस आना अभी बाकी था। साल 2004 में आई ‘वीर-ज़ारा’। यहाँ यश चोपड़ा ने शाहरुख के जुनून को एक ऐसी ऊंचाई पर पहुँचाया, जिसे छू पाना किसी के बस की बात नहीं थी। ‘वीर प्रताप सिंह’ का किरदार एक ऐसा आशिक था, जो अपने प्यार की गरिमा और उसकी खुशी के लिए चुपचाप 22 साल एक गुमनाम जेल में काट देता है। बिना किसी शिकायत के, बिना अपनी मोहब्बत को कम होने दिए।
Yash Chopra की आखिरी फिल्म जब तक है जान
इस सफर का आखिरी और सबसे इमोशनल मोड़ आया साल 2012 में। यश चोपड़ा 8 साल के लंबे ब्रेक के बाद एक बार फिर डायरेक्शन की कुर्सी पर लौटे। फिल्म थी— ‘जब तक है जान’।
किस्मत का खेल देखिए, यह यश जी के जीवन की आखिरी फिल्म साबित हुई। लेकिन जाने से पहले, वो दुनिया को शाहरुख खान का एक ऐसा रूप दे गए जो आज तक किसी ने नहीं देखा था। इस फिल्म में शाहरुख ने मेजर समर आनंद का किरदार निभाया— एक ऐसा आशिक जो मौत की आंखों में आंखें डालकर बम डिफ्यूज करता है, क्योंकि उसका मानना था कि जब तक सांसें हैं, उसका प्यार जिंदा रहेगा। यश चोपड़ा ने अपने आखिरी सिनेमाई शॉट तक शाहरुख खान के उस ‘जुनूनी आशिक’ वाले अंदाज को पर्दे पर जिंदा रखा।
किंग ऑफ रोमांस
यश चोपड़ा (Yash Chopra) ने दुनिया को दिखाया कि शाहरुख खान का जुनून सिर्फ किसी को पाने की ज़िद नहीं है, बल्कि उनका जुनून तो अपने प्यार के लिए खुद को पूरी तरह मिटा देने का नाम है। इसी ट्रांसफॉर्मेशन ने शाहरुख खान को सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि दुनिया का ‘किंग ऑफ रोमांस’ बना दिया।
साल 2012 में यश चोपड़ा इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन वो बॉलीवुड को एक ऐसी विरासत सौंप गए जो कभी खत्म नहीं हो सकती। आज यश जी भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी बड़े पर्दे पर प्यार, शिद्दत और दीवानगी की बात होगी, यश चोपड़ा का विज़न और शाहरुख खान की एक्टिंग हमेशा अमर रहेगी। उन्होंने मिलकर रोमांस को सिनेमा का एक नया मजहब बना दिया।
लेकिन, यहाँ एक बहुत बड़ा सवाल उठता है— अगर यश चोपड़ा ने शाहरुख खान को फिल्म ‘डर’ में वो जुनूनी विलेन वाला ब्रेक न दिया होता, तो क्या शाहरुख आज बॉलीवुड के ‘किंग ऑफ रोमांस’ बन पाते? या फिर उनका करियर किसी बिल्कुल अलग मोड़ पर होता? आपको क्या लगता है? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताए!














































