Haryana Power Cut: हरियाणा के कई हिस्सों में इस समय बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। साइबर सिटी गुरुग्राम में गुरुवार की रात हजारों लोगों को भीषण ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा। आधी रात के आसपास गुल हुई बत्ती सुबह तक नदारद रही। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के टोल-फ्री नंबर पर रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच ही लगभग 5,500 शिकायतें दर्ज हो गईं।
बिजली न रहने से घरों में इन्वर्टर जवाब दे गए, ऊंची इमारतों में लिफ्ट रुक गईं और पानी की सप्लाई ठप होने से हाहाकार मच गया। केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले प्रोफेशनल्स और औद्योगिक इकाइयां भी बुरी तरह प्रभावित हुईं।
क्यों भड़का यह विवाद और क्या है कटौती की वजह? Haryana Power Cut
इस बड़े गतिरोध की मुख्य जड़ एक निजी कंपनी को दिया गया बिजली वितरण का लाइसेंस है। दरअसल, हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को बिजली अधिनियम 2003 की धारा 14 के तहत ‘इलेवन पावर’ को गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस जारी किया। इसका मतलब है कि यह निजी कंपनी सरकारी निगम DHBVN के साथ उसी इलाके में अपना नेटवर्क खड़ा करके उपभोक्ताओं को बिजली दे सकती है।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह कदम परोक्ष रूप से निजीकरण की शुरुआत है, जिससे सरकारी डिस्कॉम कमजोर होगी और कर्मचारियों की नौकरियों पर तलवार लटक जाएगी। इसी के विरोध में 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से 24 अक्टूबर तक के लिए 72 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया गया। सीधे तौर पर लाइसेंस देने से बिजली नहीं कटी, बल्कि हड़ताल के चलते फाल्ट ठीक करने और सप्लाई बहाल करने वाला स्टाफ न होने से यह संकट खड़ा हुआ।
DHBVN को भारी नुकसान का डर बनाम नई प्रतिस्पर्धा
इस पूरे विवाद के पीछे गहरा आर्थिक गणित है। DHBVN का कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक, उसके कुल बिजली कारोबार में गुरुग्राम और नूंह की हिस्सेदारी 35.23% और कुल राजस्व में 42.98% है। सरकारी निगम को डर है कि अगर उसके मुनाफे वाले बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहक निजी कंपनी के पास चले गए, तो वह भारी घाटे में आ जाएगा। इसका सीधा असर आम घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायती बिजली पर पड़ेगा।
वहीं, निजी कंपनी इलेवन पावर का दावा है कि वह मुख्य रूप से नए कनेक्शनों पर फोकस करेगी और मौजूदा ग्राहकों में बहुत मामूली बदलाव आएगा। प्राइवेट कंपनियों के समर्थकों का तर्क है कि प्रतिस्पर्धा से सेवा सुधरेगी, लेकिन सरकारी ढांचे के भविष्य को लेकर सवाल जस के तस हैं।
सड़कों पर उतरा जनआक्रोश, हाईवे जाम
गुरुग्राम के सेक्टर-2, अशोक विहार, सेक्टर-4, 5, दयानंद कॉलोनी, पालम विहार, सेक्टर-23, 105, दौलताबाद और कादीपुर जैसे इलाकों में हाहाकार मचा रहा। संकट केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं रहा; सोनीपत के गन्नौर और गोहाना में भी बत्ती गुल रही, जहां कच्चा क्वार्टर बाजार के व्यापारियों ने बाजार बंद की चेतावनी दी। रेवाड़ी के पल्हावास में नाराज ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-352 पर जाम लगा दिया, जिसे पुलिस-प्रशासन ने समझाकर खुलवाया।
सरकार का रुख: फैसले को APTEL में चुनौती
विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है। सरकार ने साफ किया है कि वह HERC के फैसले के खिलाफ बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) जाएगी और लाइसेंस पर रोक लगाने की मांग करेगी। हालांकि, तात्कालिक चुनौती बाधित बिजली और पानी की सप्लाई को तुरंत बहाल करने की है।














































