Wrestling Players from Punjab: कहते है कि खाना जितना सादा हो.. जीवन जीतना सादा हो, जिंदगी में सक्सेस पाने की चांसेस उतने ही ज्यादा बढ़ जाते है। बाहुबल हो, या दिमागी शक्ति.. साहस दिखाना हो या धर्म की रक्षा हो.. पंजाब के लोगों की टक्कर किसी से नहीं हो सकती। उनमें पंजाब के रेस्लर्स का नाम भी बड़े शान से लिया जाता है। अपने इस लेख में हम पंजाब के 5 बड़े रेस्लर्स के बारे में जानेंगे, जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।
द ग्रेट गामा(गामा पहलवान) – The Great Gamma
अपने 50 साल के करियर में कभी भी एक भी कुश्ती न हारने वाले द ग्रेट गामा..जिनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट था। 22 मई 1978 को अमृतसर के जब्बोवाल गांव में जन्मे गामा पहलवान ने अपने 52 सालो के करियर में 5 हजार से भी ज्यादा मुकाबले किये थे.. और एक भी मुकाबला कभी नहीं हारा था। गुलाम भारत में भी पंजाब का बाहुबल कितना मजबूत था, उसकी उदाहरण है गामा। गामा को रूस्तम ए जमाना यानि की विश्व विजेता की उपाधि मिली हुई है। उनकी हेवी डाइट के साथ साथ रोजाना की जाने वाली उनकी एक्सारसाइज का आज भी कोई मुकाबला नही कर सकता है। वो एक साथ 40 साथियो के साथ प्रेक्टिस करते थे। 1902 में बड़ौदा में गामा पहलवान ने महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के दरबार में 1200 किलो का एक पत्थर उठा कर कुछ कदम चला था, जो आज भी उनके सम्मान में सयाजीबाग म्यूजियम में रखा हुआ है। 1910 में उन्होंने लंदन में पौलेंड के फेमस पहलवान स्टेनिलिस झिबिस्को को हरा कर विश्व हैवीवेट चैम्पियनशिप जीती थी.. जिसनें उनकी उपलब्धि को कई गुना बढ़ा दिया था। भारत के विभाजन के समय वो लाहौर चले गए थे। जहां 23 मई 1960 को उनका निधन हो गया था। आज तक उनके बराबरी कोई नहीं कर सका है।
करतार सिंह – Kartar Singh
भारत के एक ऐसे पारंपरिक पहलवान, जिन्होंने एक बार नही बल्कि दो दो बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। 7 अक्टूबर 1953 को पंजाब के तरनतारण जिसे के सुरसिंह गांव में जन्में करतार सिंह हेवीवेट फ्रीस्टाईल पहलवान रहे है। 8 साल की उम्र में अखाड़े में कदम रखने वाले करतार सिंह ने 14 साल की उम्र में ही जिला चैम्पियन बन गए थे। जिसके बाद उनका ऐसा दबदबा छाया कि घरेलू कुश्ती में 1973 से 1986 के बीच 14 बार सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप के विजेता रहे। साल 1974 में करतार सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने 1978 में कनाडा में एडमॉन्टन खेंलो में कांस्य पदक जीता था। लेकिन इसी साल बैंकॉक एशियन गेम्स में उन्होंने सबको पछाड़ते हुए 90 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीता था।, वहीं 1986 में भी सियोल में गोल् मेडल जीता था। 1979 में उन्होंने विश्व कुश्ती चैम्पियन में 6ठा स्थान हासिल किया था। उन्होंने 1982 में अर्जुन पुरुस्कार और 1987 में पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। वो खिलाड़ी होने के साथ साथ पंजाब पुलिस के अधिकारी भी थे औऱ 2013 में आईजीपी के पद से रिटायल हुए।इस वक्त को पंजाब रेसलिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष है।
पलविंदर सिंह चीमा – Palwinder Singh Cheema
11 नवंबर 1982 को पटियाला में जन्में पलविंदर सिंह चीमा ने फ्रीस्टाइल पहलवान है, जिन्होंने सुपर हैवीवेट 120 किलो कैटेगरी में बेहतरीन परफोर्मेंस से देश का नाम रोशन किया था। 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए राष्टमंडल खेलों में चीमा ने तकनीकी श्रैष्ठता के आधार पर गोल्ड मैडल जीता था। जिसके बाद एशियाई खेलों में दो बार कास्य जीता था। फिर अलग अलग प्रतिस्पार्धाओं में रजत पदक जीत कर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 1999 में मात्र 17 साल की उम्र में उन्हें रूस्तम एक हिंद का खिताब मिला था। 2003 में उन्हें अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। खेल के साथ साथ वो पंजाब पुलिस में एसपी और डीएसपी के पद पर रह कर सेवा देते रहे है। वो इस वक्त भी संगरूर के एसपी इंवेस्टिगेशन है।
गुरविंदर सिंह संघा – Gurwinder Singh Sangha
पंजाब के एक ग्रीको रोमन पहलवान, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलो में 3 बार गोल्ड जीत कर हैट्रिक लगाई। 6 जून 1977 को पंजाब में जन्मे संघा ने पारंपरिक दंगल स्टाइल को छोड़ कर ग्रीको रोमन शैली को अपनाया, जिसमं कमर के नीचे हमला करने की या कमर से नीचे पकड़ने की अनुमति नहीं होती। संघा का नाम 2000 में तब काफी प्रचलिक हुआ जब उन्होंने सिडनी ओलंपिक में क्लावीफाई किया और भारत को रिप्रेजेंट किया था। उन्होंने अपने कुश्ती करियर में 15 बार नेशनल चैम्पियन का खिताब जीता है। इस वक्त संघा पंजाब पुलिस में डीएसपी के पद पर सेवायें संभाल रहे है। वहीं विश्व पुलिस खेल में भी उन्होंने दो बार गोल्ड मैडल जीता है। इसी के साथ 2005, 2007 और 2009 में राष्ट्रमंडल कुश्ती चैम्पियनशिप में 3 गोल्ड जीत कर भारत का नाम रोशन किया है।
नवजोत कौर – Navjot Kaur
पंजाब की एक और पहलवान, जिसने फ्रीस्टाइल पहलवानबाजी में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। 10 फरवरी 1990 को पंजाब के तरनतारण जिले के बगरिया गांव में जन्मी नवजोत कौर ने 2018 में सीनियर एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में गोल्ड जीत कर भारत की पहली महिला बन गई थी जिन्होंने इस चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता था। इसके अलावा 2013 और 2014 में अलग अलग प्रतियोगिताओं में उन्होंने 4 कांस्य़ पदक जीता था। नवजोत इस वक्त भारतीय रेलवे में सीनियर क्लर्क के तौर पर काम कर रही है, जहां उन्होंने डीएसपी का पद ठुकरा दिया था। नवजोत ने अपनी बहन का अधूरा सपना पूरा करने के लिए कुश्ती शुरु की थी.. जो उनके लिए सबसे खास बन गया। ये है पंजाब के 5 महान रेसलर्स.. जिनकी उपलब्धियों पर पूरे भारत को गर्व है।












































