Trump energy ceasefire Russia: रूस और यूक्रेन के बीच सालों से खिंच रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच तुरंत प्रभाव से ‘एनर्जी सीजफायर’ लागू हो गया है। यानी अब दोनों देश एक-दूसरे के तेल, डीजल, रिफाइनरी या बिजली-ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर बमबारी नहीं करेंगे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ कह दिया कि इस सीजफायर की खबर उनके लिए भी बिल्कुल नई है और उन्हें इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “तुरंत प्रभाव से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में एनर्जी सीजफायर है। दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं। इसे तोड़ना मत! इस पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।
पूरा युद्ध नहीं रुका, सिर्फ ऊर्जा ठिकानों पर हमले थमेंगे| Trump energy ceasefire Russia
यहाँ यह समझना बेहद जरूरी है कि यह कोई संपूर्ण युद्धविराम नहीं है, बल्कि सिर्फ ऊर्जा बुनियादी ढांचे (पावर ग्रिड और तेल रिफाइनरियों) तक सीमित एक खास समझौता बताया जा रहा है। ट्रंप के इस एकतरफा ऐलान में सीजफायर की मियाद, इसकी शर्तें या मॉनिटरिंग को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है।
उधर, एक इजरायली पत्रकार से बातचीत के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने खुलकर अपनी हैरानी जताई। जेलेंस्की ने कहा कि यह घोषणा उनके लिए भी एक ब्रेकिंग न्यूज की तरह थी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा, “अगर रूस हमारे ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के लिए वाकई राजी है, तो यूक्रेन भी तैयार है। अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने पुतिन से इस पर सहमति बना ली है, तो हमें बताएं कि यह कब से लागू हो रहा है, हम इसका स्वागत करेंगे।”
क्या अमेरिका की अपनी डीजल खरीद की मजबूरी बनी वजह?
इस अचानक हुए ऐलान के पीछे की कूटनीति को ट्रंप के हालिया बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका रूस से डीजल खरीदेगा। जानकारों का मानना है कि ट्रंप के सामने सबसे बड़ी अड़चन यही थी कि अगर यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले जारी रखता, तो रूस से डीजल सप्लाई बाधित हो सकती थी। इसी वजह से माना जा रहा है कि अमेरिका ने बैकचैनल बातचीत के जरिए रूस को मनाया और फिर बिना कीव को पूरी तरह लूप में लिए इसका सार्वजनिक ऐलान कर दिया।
इससे पहले ट्रंप ने अमेरिका में डीजल के ऊंचे दामों के लिए जेलेंस्की को जिम्मेदार ठहराया था और यूक्रेन में नए नेतृत्व की जरूरत तक कह डाली थी। इसके जवाब में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने दो टूक कहा था कि जेलेंस्की देश की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं और जनता पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। जेलेंस्की ने यह भी प्रस्ताव रखा था कि यदि पुतिन 60 दिनों के पूर्ण सीजफायर पर राजी होते हैं, तो यूक्रेन में चुनाव कराए जा सकते हैं।
सीजफायर से ठीक पहले रूस के डेटा सेंटर पर हुआ था बड़ा हमला
इस सीजफायर के ऐलान से ठीक पहले यूक्रेन रूसी ठिकानों पर आक्रामक हमले कर रहा था। रविवार को यूक्रेनी ड्रोन स्ट्राइक के चलते मॉस्को के पूर्व में व्लादिमीर शहर स्थित रूस की दिग्गज टेक कंपनी ‘यांडेक्स’ का प्रमुख डेटा सेंटर ठप हो गया था। चार दिनों में यह तीसरा हमला था, जिसके कारण रूस के कई शहरों के साथ-साथ कजाखस्तान, बेलारूस और आर्मेनिया तक यांडेक्स की टैक्सी और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं घंटों तक बाधित रहीं। अब देखना यह होगा कि जमीन पर ट्रंप का यह ‘एनर्जी सीजफायर’ कितनी देर टिक पाता है।











































