जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके, छावनी बनी दिल्ली | Jantar Mantar Protest 2.O

Rajni | Nedrick News Delhi Published: 10 अक्टूबर 2026, 05:16 PM Updated: 10 अक्टूबर 2026, 05:47 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Jantar Mantar Protest: आज देश की राजधानी छावनी में तब्दील है, और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात बने हुए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जो देशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है, उसको लेकर सरकार और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां कर रखी हैं। इस प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली आने वाली कई ट्रेनें रद्द हैं, वहीं सुरक्षा कारणों से दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए हैं।

और पढ़ें: आखिर Elon Musk किसके समर्थक? BJP vs Congress की जंग, बॉस बनाम रियल बॉस का पूरा खेल!

धारा 163 लागू

आपको बता दें कि दिल्ली में पिछले कई दिनों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है, जिसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक है। इस समय सोशल मीडिया भी दो गुटों में बंट गया है, जिसमें एक पक्ष इस प्रोटेस्ट को गलत ठहरा रहा है तो दूसरा इसका पुरजोर समर्थन कर रहा है।

राजनीतिक घमासान और जनता की आवाज़

इस पूरे मुद्दे पर जहां सत्ता पक्ष ने फिलहाल मौन धारण कर रखा है, तो वहीं विपक्ष सड़कों पर उतरकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदान, जो हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार होता है, आज उसी की निष्पक्षता के लिए जनता को आवाज़ उठानी पड़ रही है। सत्ता से अपना हक मांगने के लिए जब-जब जनता सड़कों पर उतरती है, तब-तब यह सवाल उठना लाजमी हो जाता है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पर विराजमान लोग खुद को राजा और जनता को सिर्फ रंक समझते हैं?

दूसरी तरफ, प्रशासन और सरकार समर्थकों का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति के बड़े प्रदर्शनों से राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है, इसलिए ये कड़े कदम और पाबंदियां लगानी ज़रूरी थीं।

Jantar Mantar Protest से पहले हिरासत शुरु

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, सुबह 8 बजे के करीब ध्रुव राठी को उनके गुरुग्राम वाले घर से पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया था। बता दें कि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और नियमों का हवाला देकर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है, इसलिए माहौल बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले ही हिरासत में ले लिया।


बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दिल्ली से 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों और संदिग्धों को एहतियातन हिरासत (Detain) में लिया है। केवल जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास के इलाकों से अब तक 150 से 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर डिटेन किया गया है।


दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी जिले (विशेषकर शाहीन बाग और ओखला क्षेत्र) से करीब 250 लोगों को आधी रात को ही उठा लिया गया था। माहौल खराब होने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही चिन्हित 50-100 ऐसे लोगों को भी राउंड-अप किया है । हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने शहर के सभी प्रमुख स्टेडियमों को अस्थायी तौर पर डिटेंशन सेंटर (Temporary Detention Centres) में तब्दील कर दिया है।

हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने शहर के सभी प्रमुख स्टेडियमों को अस्थायी तौर पर डिटेंशन सेंटर (Temporary Detention Centres) में तब्दील कर दिया है।

अभिजीत दीपके आशुतोष रांका और सौरभ दास को फलाइट से ही डिटेन कर लिया गया है। इससे अब यह सवाल उठता है कि जिसने प्रदर्शन का आवाह्न दिया उनको ही डिटेन कर लिया गया तो प्रदर्शन कैसे होगा।


आंदोलन का चेहरा ध्रुव राठी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरभ दास को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से पहले ही एयरपोर्ट और घरों से उठा लिया गया है, ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है।

खबरों के मुताबिक, नेतृत्व न होने और दिल्ली की सीमाओं (जैसे चिल्ला बॉर्डर) व मेट्रो स्टेशनों पर भारी नाकेबंदी के कारण जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का जमा होना बेहद मुश्किल हो गया है। पुलिस की इस “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” (पहले ही रोक देने की रणनीति) ने प्रदर्शन की योजनाओं को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

प्रदर्शन से पहले ही डिटेन करना कहाँ तक सही?

ऐसे में जनता के मन में कई सवालों ने घर कर लिया है। जहाँ प्रदर्शन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब उसकी भी इजाजत न मिले तो क्या किया जाए? वैसे तो जनता की सुरक्षा प्रशासन का पहला दायित्व है, लेकिन क्या उसके लिए अपने हक के लिए आवाज उठाने वालों को उनके घरों में नजरबंद करना और प्रोटेस्ट साइट के आस-पास से लोगों को प्रदर्शन से पहले ही डिटेन करना कहाँ तक सही है?

हरियाणा के कबूलपुर में पुलिस को बनाया बंधक

इस आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती का असर अब पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी हिंसक विरोध के रूप में दिखने लगा है। आज सुबह-सुबह हरियाणा के रोहतक जिले के कबूलपुर गांव में उस समय भारी हंगामा हो गया, जब चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन को रोकने के लिए रोहतक पुलिस का एक दल वहां पहुंचा।


ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस सुबह-सुबह उन्हें प्रिवेंटिव नोटिस देकर डराने-धमकाने और दिल्ली जाने से रोकने आई थी। पुलिस की इस कार्रवाई से गुस्साए ग्रामीणों ने न सिर्फ तीखा विरोध दर्ज कराया, बल्कि पुलिस टीम को ही गांव के भीतर बंधक बना लिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds