Sajid Rashidi population statement: देश में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को लेकर समय-समय पर सियासी और सामाजिक बहस देखने को मिलती रही है। इसी कड़ी में अब ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बच्चे पैदा करने को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कुछ अन्य संगठनों द्वारा हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना ने तीखे और तंजिया लहजे में अपनी राय रखी।
मौलाना साजिद रशीदी ने सीधे तौर पर कहा, “कम से कम 10 बच्चे पैदा करो, कम से कम हमारी बराबरी पर तो आओ।” उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।
‘हमारे यहां 5-6 तो आम बात है’| Sajid Rashidi population statement
अपने बयान में मौलाना ने दोनों समुदायों में बच्चों की संख्या की तुलना करते हुए कहा कि उनके समुदाय में बच्चों की संख्या आम तौर पर ज्यादा होती है। उन्होंने कहा, “हमारे यहां तो 5 या उससे ऊपर ही होते हैं, 6 तो बिल्कुल आखिरी सीमा मानी जाती है। कई परिवारों में तो 10, 11 और 12 बच्चे भी होते हैं, इसलिए अगर बात करनी है तो कम से कम 10 के आंकड़े तक तो पहुंचिए।” उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ संगठन हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की वकालत करते हैं, तो फिर सीमित संख्या क्यों रखनी, बराबरी के लिए आगे आना चाहिए।
सोच और विश्वास का अंतर बताया
मौलाना रशीदी ने दोनों समुदायों की सोच और मान्यताओं में फर्क बताते हुए तर्क दिया कि बच्चों के पालन-पोषण को लेकर नजरिया अलग है। उन्होंने कहा, “हमारा अकीदा (विश्वास) यह है कि बच्चों को ऊपरवाला (ईश्वर) रिज़्क देता है और खिलाता है, मां-बाप तो सिर्फ एक जरिया भर हैं। वहीं दूसरी तरफ यह अकीदा रहता है कि बच्चों को हम पालते हैं, तो फिर कहां से खिलाएंगे। यही बुनियादी फर्क है, जिसके चलते लोग ज्यादा बच्चे पैदा करने से बचते हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके समुदाय में सभी बच्चों की देखभाल और तालीम का पूरा ख्याल रखा जाता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एकल परिवार और कम बच्चों वाले माहौल में कई बार बच्चे बड़े होकर मां-बाप को वृद्धाश्रम भेज देते हैं, जबकि बड़े परिवारों में पारिवारिक जुड़ाव मजबूत रहता है और मां-बाप का सहारा बना रहता है।
पहले भी बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां
महिलाओं को लेकर उठने वाले सवालों पर मौलाना ने कहा कि इस्लाम में बच्चे पैदा करने पर किसी तरह की रोक लगाने की इजाजत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग अब ज्यादा बच्चों की बात कर रहे हैं, क्या वे अब महिलाओं की भूमिका पर सवाल नहीं उठाएंगे।
गौरतलब है कि मौलाना साजिद रशीदी इससे पहले भी अपने कई बयानों को लेकर विवादों और चर्चा में रहे हैं। टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक मंचों पर उनके विचार अक्सर तीखी प्रतिक्रियाओं का कारण बनते रहे हैं। ताजा बयान सामने आने के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और इस मुद्दे पर एक नई बहस छिड़ गई है।
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