Election Commission SIR deadline: देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान और उठते सवालों के बीच दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में शनिवार को चुनाव आयोग की एक बेहद अहम और हाई-लेवल बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग ने कई अहम फैसले लेते हुए दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया है। इसके साथ ही आम वोटरों को बड़ी राहत देते हुए यह साफ किया गया है कि जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके घर दस्तावेज लेने खुद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पहुंचेंगे।
दिल्ली और महाराष्ट्र का क्यों बदला गया कार्यक्रम? Election Commission SIR deadline
चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 की योग्यता तिथि (Qualifying Date) के आधार पर चल रही इस पूरी प्रक्रिया के टाइम-टेबल में बदलाव किया है। दरअसल, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 23 सितंबर और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 24 सितंबर को आयोग से शेड्यूल बदलने की औपचारिक गुहार लगाई थी। दोनों राज्यों से आए अनुरोध पर विचार करने के बाद आयोग ने नई समयसीमा तय कर दी। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि नए कार्यक्रम का जमकर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि किसी भी वोटर को जानकारी के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े।
दिल्ली में 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक मौका
संशोधित कार्यक्रम के हिसाब से दिल्ली और महाराष्ट्र के वोटरों को जरूरी दस्तावेज दुरुस्त कराने के लिए अच्छा-खासा अतिरिक्त समय मिल गया है:
- दिल्ली की नई तारीखें: दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने का काम 31 अगस्त 2026 से चल रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। आपत्तियों और नोटिसों के निपटारे की प्रक्रिया 30 नवंबर 2026 तक पूरी होगी और इसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी।
- महाराष्ट्र का नया शेड्यूल: महाराष्ट्र में भी 31 अगस्त 2026 से शुरू हुई इस प्रक्रिया की आखिरी तारीख अब 12 अक्टूबर 2026 तय की गई है। यहां नोटिसों और दावों का निपटारा 10 नवंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद 16 नवंबर 2026 को अपडेटेड फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी।
नोटिस मिलने पर दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं
मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने नियमों को काफी लचीला बनाया है। जिन लोगों के रिकॉर्ड पुराने डेटा से मेल नहीं खा रहे हैं (Unmapped) या जिनकी जानकारियों में कोई तकनीकी गड़बड़ी (Logical Discrepancy) पाई गई है और उन्हें नोटिस थमाया गया है, उन्हें अब चुनाव दफ्तरों की कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी। बीएलओ सीधे संबंधित मतदाताओं के घर-घर जाकर जरूरी कागजात एकत्र करेंगे।
इसके अलावा, अगर हालात विशेष हों तो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की अनुमति से ऑनलाइन सुनवाई भी की जा सकेगी। यदि कोई वोटर किसी मजबूरी के चलते खुद सुनवाई में पेश नहीं हो पा रहा है, तो वह अपने परिवार के किसी बालिग सदस्य को अपनी जगह अधिकृत कर सकता है।
गरीब, मजदूर और बेघर लोगों के लिए लगेंगे खास कैंप
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को निर्देशित किया है कि शहरों में रैन बसेरों, नाइट शेल्टरों में रहने वाले बेघर लोगों, दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए विशेष सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) और कैंप लगाए जाएं, ताकि समाज का कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न छूटे।
यदि किसी वजह से एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र नागरिक का नाम छूट जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोग ‘कंटीन्यूअस अपडेशन’ प्रक्रिया के जरिए बाद में भी अपना नाम जुड़वा सकेंगे। यह सुविधा उन युवाओं और नए मतदाताओं के लिए भी लगातार खुली रहेगी जो पहली बार वोट डालने के योग्य बने हैं।
अंदरूनी विवादों पर आयोग की दो टूक: ‘सारे फैसले सर्वसम्मति से हुए’
चुनाव आयोग की कार्यशैली और अंदरूनी फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि देशभर में एसआईआर लागू करने और उसकी समयसीमा तय करने के सभी फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए थे।
आयोग ने बताया कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का मूल आदेश आम सहमति से ही जारी हुआ था। इसके बाद 12 राज्यों के लिए 27 अक्टूबर 2025 और 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किए गए शेड्यूल को भी पूरी आयोग की एक राय के साथ ही मंजूरी दी गई थी।














































