Pakistan defends Saudi Arabia: मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों के आक्रामक हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त संदेश दिया है। पाकिस्तानी सेना के एक शीर्ष जनरल ने साफ किया है कि उनका मुल्क सऊदी अरब की रक्षा के लिए ‘किसी भी हद तक’ जाने को तैयार है और खाड़ी देश की हिफाजत को लेकर इस्लामाबाद का यह संकल्प पूरी तरह ‘बिना किसी शर्त’ के है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान कूटनीतिक स्तर पर तो साथ है ही, लेकिन वे खासतौर पर ‘प्रत्यक्ष’ (फिजिकल) मौजूदगी पर जोर देना चाहते हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तानी सेना उतनी हद तक जाएगी, जितना सऊदी भाई कहेंगे और जिसकी जरूरत पड़ेगी।
लाल सागर में तनाव और ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’| Pakistan defends Saudi Arabia
यह बयान ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। हूती लड़ाकों ने हाल के दिनों में सऊदी ठिकानों पर हमले तेज किए हैं और लाल सागर के सामरिक लिहाज से बेहद अहम बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
इस बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा था कि क्या पाकिस्तान हालिया रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सीधी सैन्य मदद करेगा। दरअसल, पिछले महीने ही पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने ऐतिहासिक ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर दस्तखत किए थे। नाटो की तर्ज पर बने इस पैक्ट की मुख्य शर्त यह है कि तीनों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला बाकी सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
‘हम पहले से ही सऊदी जमीन पर मौजूद हैं’
सैन्य प्रवक्ता ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और अटूट रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम के दो सबसे मुकद्दस शहरों मक्का और मदीना के साथ सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही वहां तैनात हैं।
यह तल्खी तब और बढ़ गई जब सऊदी अधिकारियों ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही दक्षिण में एक हूती ड्रोन को मार गिराया। इस घटना ने पूरे मुस्लिम जगत को झकझोर दिया, हालांकि हूती विद्रोहियों ने मक्का या किसी भी पवित्र धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की बात से साफ इनकार किया है।
मक्का पैक्ट के नियम और कूटनीतिक संतुलन
इससे पहले जब सऊदी अरब की ओर से मक्का समझौते को सक्रिय करने की बात कही गई थी, तब पाकिस्तान ने यह स्पष्ट किया था कि यह समझौता केवल रक्षात्मक व सामूहिक प्रतिरोध के लिए है और पुरानी या पहले से चल रही लड़ाइयों पर लागू नहीं होता। इसके कोई आक्रामक या क्षेत्रीय विस्तारवादी इरादे नहीं हैं।
वहीं, पाकिस्तान इस तनाव में कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी कर रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हाल ही में फोन पर अहम बातचीत हुई है। सैन्य नेतृत्व का कहना है कि वे सऊदी हुकूमत के लगातार संपर्क में हैं और साथ ही क्षेत्रीय ताकतों से भी राय-मशविरा कर रहे हैं, ताकि बातचीत के जरिए इस बड़े संकट का कोई शांतिपूर्ण और कूटनीतिक हल निकाला जा सके।












































