Ram Teri Ganga Maili actress Mandakini: साल 1985 में आई सुपरहिट फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से रातोंरात स्टार बनने वाली एक्ट्रेस मंदाकिनी ने 80 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री के तौर-तरीकों और काम के माहौल पर बड़ा बयान दिया है। मीडिया को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि स्टारडम मिलने के बाद भी उन्हें अपनी 16-17 फिल्मों की फीस नहीं मिली थी। आइए जानते हैं आखिर उस दौर में काम तो मिला लेकिन पैसा क्यों नहीं मिला?
क्यों नहीं मिला पैसा?
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि उस जमाने में आज की तरह कोई लिखित एग्रीमेंट या कॉर्पोरेट सिस्टम नहीं होता था। मेकर्स बस आकर जुबानी ही फिल्म साइन करने को कह देते थे और काम शुरू हो जाता था। कई फिल्में बजट की कमी या अन्य कारणों से बीच में ही बंद हो जाती थीं या कभी रिलीज ही नहीं हो पाती थीं, जिससे लास्ट पेमेंट रुक जाता था।
अक्सर तीन फिल्मों का एक साथ सौदा होता था। एक फिल्म तो बन जाती थी, लेकिन बाकी दो अटक जाती थीं, जिसकी वजह से पूरा पैसा कभी क्लियर नहीं होता था। मंदाकिनी ने यह भी कहा कि उस दौर में दोस्ती-यारी में 15-20 दिनों के काम के लिए वे पैसे भी नहीं मांगती थीं।
हालांकि, मंदाकिनी ने यह भी साफ किया कि इन पैसों के नुकसान के बावजूद उस दौर के सेट्स पर एक ‘पारिवारिक माहौल’ होता था, जो उन्हें आज की प्रोफेशनल और कॉर्पोरेट फिल्म इंडस्ट्री में देखने को नहीं मिलता।
लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी
आपको बता दें कि मंदाकिनी ने ‘तेजाब’, ‘लोहा’ और ‘डांस डांस’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया था। हालांकि, 1996 में आई फिल्म ‘जोरदार’ के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थी। अब लंबे समय बाद वह एक बार फिर बॉलीवुड में कमबैक करने की तैयारी में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेटे रब्बील ठाकुर के साथ एक म्यूजिक वीडियो ‘मां ओ मां’ से वापसी की है, और वह जल्द ही कुछ दिलचस्प प्रोजेक्ट्स में नजर आ सकती हैं।
Ram Teri Ganga Maili की कहानी
फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ (Ram Teri Ganga Maili) की बात करें तो, फिल्म की कहानी पहाड़ों में रहने वाली एक बेहद मासूम लड़की गंगा के इर्द-गिर्द घूमती है। नरेंद्र नाम का एक शहरी युवक जब वहां आता है, तो दोनों में प्यार हो जाता है और वे शादी कर लेते हैं। नरेंद्र शहर वापस लौटता है लेकिन कुछ मजबूरियों के कारण वापस नहीं आ पाता।
गर्भवती गंगा अपने पति की तलाश में कोलकाता के लिए निकलती है। इस सफर में समाज के ठेकेदार, भ्रष्ट लोग और शहरों की गंदगी उसका शोषण करने की कोशिश करते हैं। राज कपूर ने नदी गंगा के मैला होने को उदाहरण के तौर पर इंसानी समाज और उसकी नैतिकता के पतन से जोड़ा था।
आज के दौर में जहाँ हर चीज़ पेपरवर्क और कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिकी है, वहीं मंदाकिनी का यह खुलासा 80 के दशक के बॉलीवुड के एक अलग ही पहलू को दिखाता है। भले ही उस दौर में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन फैंस आज भी उन्हें पर्दे पर देखने के लिए बेताब हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड में अपने इस नए सफर और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स से वह दर्शकों का दिल जीतने में कितनी कामयाब होती हैं।












































