Raj Kapoor: 1948-49 के बीच बना यह गीत जिसने भी सुना, उसकी रूह में उतर गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज कपूर की एक सुपरहिट फिल्म का यह कालजयी गाना जेल की सलाखों के पीछे से शुरू हुआ था? जी हां, लगभग 60 साल पहले मुकेश की आवाज में रिकॉर्ड हुआ फिल्म ‘तीसरी कसम’ का आइकॉनिक गाना ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई’ एक ऐसी दास्तान समेटे हुए है, जो सीधे जेल के एक कैदी और बॉलीवुड के शोमैन से जुड़ी है। आइए जानते हैं कि कैसे जेल की सलाखों के पिछे कैद एक लेखक की लिखी पंक्तियों को मुकेश की आवाज ने हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया।
जेल में लिखा गाने का मुखड़ा
लेकिन इस कहानी की शुरुआत राज कपूर से नहीं, बल्कि साल 1949 के एक बड़े विवाद से होती है। उस दौर के मशहूर कम्युनिस्ट शायर मजरूह सुल्तानपुरी ने एक मजदूर सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ एक तीखी कविता पढ़ दी थी। सरकार को यह बात रास नहीं आई और मजरूह साहब को सीधे आर्थर रोड जेल में डाल दिया गया। जेल की उसी तन्हाई और सलाखों के पीछे उनके दिल से कुछ दर्द भरे अल्फ़ाज़ निकले, जो आगे चलकर भारतीय सिनेमा का इतिहास बदलने वाले थे।
अब एंट्री होती है बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर की। राज कपूर उस समय अपनी फिल्म ‘तीसरी कसम’ की तैयारी कर रहे थे।वह फिल्म के लिए एक ऐसा गाना चाहते थे जो सीधे इंसान के दिल को छू जाए और जिंदगी के सबसे बड़े फलसफे को बयां करे। जब राज कपूर को जेल में बंद मजरूह सुल्तानपुरी के उन दर्द भरे अल्फ़ाज़ों के बारे में पता चला, तो उनकी पारखी नज़र भांप गई कि यही वो मास्टरपीस है जिसकी उन्हें तलाश थी।
दो लाइनें और तीन दिग्गजों का मिलन
मजरूह साहब ने जेल में गाने का सिर्फ मुखड़ा (शुरुआती दो लाइनें) लिखा था। राज कपूर ने इन लाइनों को अपनी फिल्म के प्रोड्यूसर और महान गीतकार शैलेंद्र के सामने रखा। शैलेंद्र उन दिनों बेहद व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने मजरूह साहब के उन अल्फ़ाज़ों को आगे पूरा करने की ज़िम्मेदारी हसरत जयपुरी को सौंप दी। हसरत जयपुरी ने इसके बाद एक से बढ़कर एक अंतरे लिखे और संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन ने इसे एक ऐसी धुन दी जिसे सुनकर आज भी लोगों की आँखें नम हो जाती हैं।
मजरूह सुल्तानपुरी का बड़प्पन
जब यह गाना पूरी तरह तैयार हो गया, तो मजरूह सुल्तानपुरी ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबका दिल जीत लिया। उन्होंने अपनी दरियादिली दिखाते हुए इस सुपरहिट गाने का पूरा क्रेडिट हसरत जयपुरी को दे दिया। यही वजह है कि आज भी कागज़ों पर इस गाने के आगे हसरत जयपुरी का नाम दर्ज है, लेकिन इसकी रूह में मजरूह सुल्तानपुरी के वो आंसू और दर्द शामिल हैं जो उन्होंने जेल में बहाए थे।
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई… मुकेश की जादुई आवाज़ में रिकॉर्ड हुआ यह गाना आज 60 साल बाद भी जब कानों में पड़ता है, तो सीधे रूह में उतर जाता है। एक कैदी शायर की कलम से निकला यह दर्द आज भारतीय सिनेमा की सबसे अनमोल धरोहर बन चुका है।
तो, कैसी लगी आपको राज कपूर और मजरूह सुल्तानपुरी के इस ऐतिहासिक गाने की यह अनसुनी दास्तान? कमेंट में ज़रूर बताएं।












































