Houthi Attack Saudi: पश्चिम एशिया इस समय बारूद के धधकते ज्वालामुखी में तब्दील हो चुका है। लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक, दुनिया की दो सबसे अहम समुद्री जीवन रेखाएं पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं। वैश्विक कच्चे तेल का 30 फीसदी से अधिक व्यापार जिन दो रास्तों से होकर गुजरता है, वे दोनों आज भीषण जंग की चपेट में हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट पर पहले से ही रुकावट खड़ी थी, और अब यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब को अपने शिकंजे में ले लिया है। इस दोहरी मार से सऊदी अरब का बैकअप प्लान पूरी तरह ध्वस्त हो गया है और दुनिया पर 1973 के बाद का सबसे खौफनाक तेल संकट मंडराने लगा है।
मोखा बंदरगाह पर कब्जा और अरामको के ठिकानों पर कोहराम| Houthi Attack Saudi
दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूतियों ने रणनीतिक मोखा बंदरगाह और मईयून द्वीप पर कब्जा जमाकर बाब अल-मंदेब की नाकेबंदी कर दी है। इसके तुरंत बाद सऊदी अरब की जीवनरेखा मानी जाने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर भीषण हमला बोला गया। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि सरकारी तेल कंपनी अरामको के 6 फ्यूल स्टोरेज टैंक पूरी तरह जलकर खाक हो चुके हैं और मुख्य पंपिंग स्टेशन गंभीर रूप से झुलस गया है।
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए होर्मुज को बाईपास करने का एकमात्र जरिया थी, जिससे प्रतिदिन 40 से 50 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। इसके ठप होने से दुनिया की 4 से 5 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति सीधे खतरे में आ गई है, जिसके असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम उछलकर $108 से $110 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं।
सऊदी के हवाई हमले बनाम हूतियों की मिसाइल बौछार
इस नाकेबंदी के जवाब में सऊदी अरब और यमनी सेना ने जोरदार जवाबी अभियान छेड़ दिया है:
- मारिब और ताइज: तेल-गैस उत्पादक केंद्र मारिब में हूती बख्तरबंद वाहनों (BMP), तोपखानों और संचार केंद्रों पर ड्रोन स्ट्राइक की गई। वहीं ताइज-मोखा मार्ग पर हथियार ले जा रहे हूती काफिलों और मिसाइल लॉन्चरों को मलबे में बदल दिया गया।
- सादा प्रांत: सऊदी सीमा से सटे हूतियों के गढ़ सादा में बंकरों और लॉन्चिंग पैड को तबाह करने के लिए भीषण बमबारी की गई।
इसके पलटवार में हूतियों ने सऊदी अरब के सीमावर्ती इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और एफपीवी ड्रोनों की बरसात कर दी। दक्षिणी प्रांत जाजान में अरामको ऑयल फैसिलिटी को निशाना बनाया गया, जिससे तेल डिपो में भीषण आग लग गई। खमीस मुशैत और आभा शहरों में हुए हमलों में इमारतों, मस्जिद और वाहनों को भारी नुकसान हुआ और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। नजरान स्थित शरूराह बेस के कमांड सेंटर और हथियार डिपो को भी ड्रोन हमलों से निशाना बनाया गया।
रूस से ड्रोन मंगा रहा ईरान, सऊदी-इजराइल के बीच हलचल
यह जंग अब सिर्फ स्थानीय नहीं रह गई है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी जहाज पर हमले के बाद ईरान ने इराक के कुर्दिस्तान में सुलेमानिया, अलेप्पो, शाहजोर और जारगोज में अलगाववादी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, अमेरिका और इजराइल से मुकाबले की तैयारी के लिए ईरान रूस से अपग्रेडेड गेरान (Geran) ड्रोनों की नई खेप हासिल करने की जुगत में है।
इतिहास में पहली बार रियाद खुद को दोतरफा भौगोलिक चक्रव्यूह में फंसा पा रहा है पूर्व में ईरान और दक्षिण में हूती। अमेरिका के सीधे जमीनी हस्तक्षेप से हाथ खींचने के बाद सऊदी अरब ने इजराइल से सामरिक मदद मांगी है, जबकि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जेद्दा में अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) प्रमुख से आपात मुलाकात की है। यदि बाब अल-मंदेब की यह नाकेबंदी नहीं टूटी, तो न केवल खाड़ी देशों का तेल निर्यात शून्य हो जाएगा, बल्कि यूरोप और एशिया के बीच की समूची सप्लाई चेन हमेशा के लिए चरमरा जाएगी।












































