अरबों का खजाना छोड़ बलूचिस्तान से क्यों उल्टे पांव भाग रहा है चीन… जानिए वो सच जो पाकिस्तान छिपा रहा था! China-Pakistan Relation Problems

[nedrick_meta]
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google
[modern_share]

China-Pakistan Relation Problems: पाकिस्तान में आंतरिक संकट और आर्थिक बदहाली इस कदर बढ़ चुकी है कि अब उसके सबसे भरोसेमंद और ‘सदाबहार’ दोस्त चीन के भी सब्र का बांध टूटने लगा है। देश में सेना के बढ़ते दखल और सिर्फ हथियारों पर केंद्रित नीतियों के बीच हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसी बीच जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने एक बड़ा दावा करके पाकिस्तान की सियासत में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा है कि चीन पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था और सुरक्षा हालातों से बेहद नाखुश है और वह बलूचिस्तान में चल रहे अहम माइनिंग (खनन) प्रोजेक्ट्स से धीरे-धीरे अपने हाथ पीछे खींच रहा है।

और पढ़ें: ईरान युद्ध की सीक्रेट रिपोर्ट लीक होने से पेंटागन में हड़कंप: 50 सैन्य अफसरों का कराया गया पॉलीग्राफ टेस्ट| Pentagon Probes Leak

खनिज संपदा का असली फायदा किसे? रेको दिक और सैंदक पर दागे सवाल| China-Pakistan Relation Problems

मौलाना फजलुर रहमान ने एक वीडियो बयान जारी कर पाकिस्तान की खनिज संपदा, संप्रभुता और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि बलूचिस्तान की जमीन में दबे बेशकीमती खजानों का असली फायदा आखिर किसे मिल रहा है? उन्होंने अरबों डॉलर के तांबे और सोने के भंडार वाले ‘रेको दिक’ प्रोजेक्ट का खास तौर पर जिक्र करते हुए पूछा कि वहां असल में खनन कौन कर रहा है और वहां से निकाले जा रहे खनिज आखिर किस देश या किन हाथों में जा रहे हैं? फजलुर रहमान ने बलूचिस्तान की दशकों पुरानी ‘सैंदक’ कॉपर-गोल्ड माइनिंग परियोजना के कामकाज की भी जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट सालों से चल रहा है, लेकिन आज तक पाकिस्तान और स्थानीय बलूच अवाम को इसका कोई ठोस फायदा नहीं दिखा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि फिलहाल रेको दिक और सैंदक में काम चल रहा है, लेकिन इनका प्रबंधन पूरी तरह सवालों के घेरे में है।

चीन की नाराजगी और ग्वादर में देरी

JUI-F प्रमुख ने दावा किया कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता इतनी खराब हो चुकी है कि चीनी कंपनियां अब बलूचिस्तान के माइनिंग प्रोजेक्ट्स से किनारा करने लगी हैं। चीन पहले भी अपने नागरिकों की सुरक्षा और प्रोजेक्ट्स में अड़ंगों को लेकर इस्लामाबाद को कई बार सख्त चेतावनी दे चुका है। इसके अलावा, रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माने जाने वाले ग्वादर प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी ने भी बीजिंग की बेचैनी और नाराजगी को बढ़ा दिया है। दशकों से लटके प्रोजेक्ट्स के कारण दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट साफ नजर आने लगी है।

‘कर्जदाताओं के गुलाम बने हम, प्रांत बांटना कोई हल नहीं’

देश की बदहाली पर गहरी चिंता जताते हुए मौलाना ने कहा कि पाकिस्तान आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विदेशी कर्जदाताओं के आगे हाथ फैलाने को मजबूर है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि मुल्क से राजनीतिक गुलामी कभी खत्म ही नहीं हुई, बस उसका चेहरा बदल गया है। आज जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पाकिस्तान को कर्ज दे रही हैं, वही उसकी नीतियां और फैसले तय कर रही हैं।

इसके साथ ही पाकिस्तान में प्रशासनिक सुधार के नाम पर नए प्रांत बनाने की उठ रही मांगों पर भी उन्होंने दो टूक राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि सूबों का बंटवारा कर देना पाकिस्तान की बुनियादी समस्याओं और आर्थिक संकट का कोई सीधा समाधान नहीं है।

और पढ़ें: क्या थमने वाला है रूस-यूक्रेन युद्ध? पुतिन ने कीव पर 72 घंटे के लिए रोके हमले, शांति वार्ता के लिए मॉस्को पहुंचे अमेरिकी दूत| Russia Ukraine Peace Talks

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds