क्या गृहस्थ जीवन में रहकर भी मिल सकती है मुक्ति? जानिए सिख धर्म की अनोखी सीख – Sikhism teachings

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 05 सितम्बर 2026, 11:01 PM Updated: 05 सितम्बर 2026, 11:01 PM
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Sikhism teachings: सिख धर्म मनुष्यों को न केवल मानवता, करुणा सिखाता है, साथ ही वो आपके मार्ग की तरफ प्रशस्त करता है जो आपको सभी विकारों से मुक्त कर गुरु घर का सच्चा  सेवक बनाता है। जो बताता है कि सच्चा अध्यात्म, सच्ची शांति तो गुरु चरणों में ही मिलती है। संसार से मुक्ति सभी को चाहिए , लेकिन सवाल ये है कि मुक्त कौन होना चाहता है। हमारा मोह हमें मुक्त ही नहीं होने देता, जहां हर धर्म में मुक्ति के लिए वैरागी होना ही एकमात्र उपाय बताया गया तो वहीं इकलौता सिख धर्म है, जिसने संसार को ये रास्ता बताया कि मुक्ति के लिए आपको अपनी जिम्मेदारियों से भागने की जरूरत नहीं। आपको वैरागी होने की जरूरत नहीं, आप गृहस्थ रहकर भी अपने सच्चे गुरु को पा सकते है। सिख गुरु साहिबानों ने अपने हर एक संगत को वो रास्ता दिखाया है जिसपर चल कर, जिसका सुमिरन करके आप आध्यात्मिकता के रास्ते पर चल सकते है। जी हां, पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में मौजूद मूल मंत्र और जपजी साहिब। परमपिता परमेश्वर से मिलाने वाला मार्ग। जानते है क्या है इन दोनों का अर्थ, जो हर सिख के लिए बेहद अहम है।

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मूल मंत्र और जपजी साहिब का पूरा अर्थ क्या है?

सिख धर्म के पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब में न केवल सिख गुरुओ की बाणी मौजूद है, बल्कि 15 हिंदू मुसलमान पीरों औऱ संतो की बाणियों, 11 भट्टों, और 4 गुरु घर के परम सेवकों की बाणियों को भी इसमें शामिल किया गया है, लेकिन बहुत कम लोग ये जानते है कि गुरु ग्रंथ साहिब जी का एक एक श्लोक, एक एक बाणी खुद ईश्वर की कही गई बाणी है.. जिसे खुद पांचवे गुरु गुरु अर्जन देव जी ने संग्रहित करना शुरु किया था। दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने उसे अंतिम स्वरूप देकर अपने सचखंड जाने से पहले सिखो के 11वें गुरु घोषित किया था। इकलौते श्री गुरु ग्रंथ साहिब ही है जिन्हें एक जीवित गुरु के रूप में देखा जाता है, जिनके 1430 पन्नों को अंग की उपाधि दी जाती है। जिस तरह से सिख गुरुओ ने संसार को मानवता का ज्ञान दिया.. संगत सेवा को सर्वोपरि कहा. जातपात के भेदभाव से निकल कर एक सम्मान औऱ समानता पूर्ण समाज का निर्माण करने का संदेश दिया और एक ही ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया है,. वहीं सारी बातें गुरु ग्रंथ साहिब में कही गई है.. लेकिन उसे संगतो के लिए सरल भाव से बना दिया गया है।

मूल मंत्र क्या है? – Sikhism teachings

ईश्वर तक पहुंचने के लिए, गुरु कृपा पाने के लिए आसान मार्ग खुद हमारे पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने बताया। उन्होंने सबसे पहले मूल मंत्र दिया.. इक ओंकार सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरत अजूनी सैभं गुर प्रसाद॥ सबसे पहला मूलमंत्र है.. ये मूल मंत्र प्रथम गुरु दिया गया पहला संदेश था, जिसमें उन्होंने संसार को संदेश दिया था कि ईश्वर एक ही है वो ही सच्चा और शाश्वत है, जिसने इस ब्राहण्ड को बनाया है और वो खुद एक शून्य है, निराकार है, जिसका न जन्म हुआ और न ही उसकी मृत्यु होगी.. उस शास्वत शक्ति को प्राप्त करने का एक ही मार्ग है, गुरु की सच्ची भक्ति। ये मूल मंत्र सही मायने में जिसने भी अपने जीवन में आत्मसात कर लिया वो इस संसार के सभी मोह और संसारिक आंडबर से मुक्त हो जायेगा.. वो आध्यात्मिकता के उस चरम पर पहुंच जायेगा जिसके बाद उसे कोई भटका नहीं सकता है। सिख धर्म में इसिलए वैरागी होने के बजाय आध्यात्मिकता के चरम को पाने का संदेश दिया है.. कहते है कि जैसे फूलो के बागान में फूल उगाने और तोड़ने वाले माली के हाथों में फूलो की खूश्बू रहती है, वैसे ही जो ईश्वर के करीब है, उसके करीब रहने वाले खुद ही उस चमक से, उस खूश्बू से प्रभावित हो ही जाते है।

किसी मंत्र को बार बार दोहराना – Sikhism teachings

वहीं बात करें जपजी साहिब की तो जपजी साहिब की शुरुआत  इसी मूल मंत्र से होती है।  जप शब्द का मतलब होता है किसी का पाठ करना, किसी मंत्र को बार बार दोहराना.. मूल मंत्र का बार बार जप करना आपको ईश्वर के रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित करता है। जपजी साहिब की रचना खुद गुरु नानक देवजी ने की थी, उसके मूल मंत्र में एक श्लोक है, 38 पौड़ियां यानि की छंद है और अंत में फिर से एक श्लोक..पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु …. है जिसका मतलब है हवा गुरु है, पानी पिता है और धरती माता है। जपजी साहिब गुरु ग्रंथ साहिब का संपूर्ण सार माना जाता है। जिसके निरंतर जाप करने से ही व्यक्ति अपने सभी विकारो से मुक्त होने लगता है। वो शांति को पाता है। सदा सच के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित होता है और संसार को भी गुरु के रास्ते पर चलने का संदेश देता है। ये सिखो की दैनिक प्रार्थना का सबसे अहम हिस्सा है..जिसे गुरुद्लारो से लेकर घरों में अमृत बेला में सुमिरन किया जाता है।

ये आपको सच्चा इंसान बनाना है.. ये ज्ञान देता है कि जो आपकी चालाकी आपकी सारी धूर्तता यहीं रह जायेगी, क्योंकि ईश्वर की इच्छा के बिना कोई पत्ता नहीं हिलता.. आपको ईश्वर को पाना है तो चतुराई और चालाकी नहीं बल्कि सच्चे मन से राजी होना जरूरी है,, जब आप ईश्वर के सही अस्तित्व को स्वीकार कर लेते है तो आप अपने अंहकार से मुक्त हो जाते है। जपजी साहिब में पांच अलग अलग खंड बताये गए है.. जिसमें धर्म खंड पहला है.. जिसमें मनुष्य के दायित्व बताये गए है, फिर है ज्ञानखंड.. जो आपको सच से रूबरू कराता है, फिर है श्रम खंड..जो हमारी सच्ची मेहनत और उसकी सुंदरता को बताता है, चौथा है करम खंड,.जिसमें बताया गया है कि आपके करम ही तय करेंगे कि आप पर गुरु कृपा होगी या नहीं। और आखिरी है सत खंड.,यानि की एकमात्र परम सच.. ईश्वर का सच्चा निवास.. जीवन को सही दिशा देने के लिए जपजी साहिब से बेहतरीन कुछ नही है। जो आपको अध्यात्मिकता के करीब ले जाती है जो आपको गुरु कृपा के करीब ले जाती है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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