Arshdeep Singh Dang: सिख दुनिया के किसी भी कोने में है.. जब भी कोई सिख किसी उपलब्धि को पाता है तो वो सेलीब्रेशन दुनिया के हर एक सिख का होता है। हार हो या जीत..सबमें केवल खुशियां मनाने वाले कोई है तो वो है सिख.. सिखों के इस नाम को और उंचा बढाया है चंडीगड़ के 28 साल के फ्लाइट लेप्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग ने। जो 1945 में खत्म हुए दूसरे विश्व युद्ध के करीब 80 सालों के बाद ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स में पहले फाइटर पायलट बने है.. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल सिखों का बल्कि भारत का नाम भी रोशन किया है, लेकिन अर्शदीप की भी दिली इच्छा है कि वो अकेले इस सम्मान को न पायें बल्कि उनके जैसे और भी भारतीय इसका हिस्सा बने.. अपने इस लेख में हम अर्शदीप सिंह डांग की उपलब्धि की कहानी को जानेंगे।
और पढ़े: क्या गृहस्थ जीवन में रहकर भी मिल सकती है मुक्ति? जानिए सिख धर्म की अनोखी सीख – Sikhism teachings
कौन है अर्शदीप सिंह डांग – Arshdeep Singh Dang
14 अगस्त 2026 को ब्रिटेन के उत्तरी वेल्स में मौजूद रॉयल एयर फोर्स वैली (RAF Valley) में अपनी 4 सालों की बेहद कठिन फास्ट-जेट पायलट बनने का प्रशिक्षण पूरा किया और अपनी ‘विंग्स हासिल कर सैल्यूट किया.. इस दौरान अर्शदीप ने अपनी दिल की बात करते हुए कहा कि ‘मैं आखिरी नहीं बनना चाहता!.. ये बोल उन्होंने उन भारतीय युवाओ को प्रेरित करने के लिए कहे, जो ब्रिटेन में फाइटर पायलट बनने का सपना देख रहे है। अर्शदीप मूल रूप से पंजाब के चंडीगढ़ के रहने वाले है. उनका जन्म साल 1998 में चंडीगड़ में हुआ था तो वहीं उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना के रहने वाले है तो वहीं मां गगनदीप कौर अमृतसर की रहने वाली है। ब्रिटेन शिफ्ट होने से पहले उनका परिवार चंडीगढ़ में ही काम करता था, लेकिन जब अर्शदीप 6 साल के थे तो उनका परिवार ब्रिटेन के साउथॉल में बस गया था।
अर्शदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन में रचा इतिहास – Arshdeep Singh Dang
अर्शदीप ने फाइटर पायलट बन कर न केवल अपने पिता का बल्कि अपने दिवंगत दादाजी सरदार संतोख सिंह डांग का सपना पूरा किया जो चाहते थे कि अर्शदीप के पिता पायलट बने लेकिन जब अर्शदीप के पिता 6 साल के थे तो उनकी मृत्यु हो गई थी.. आर्थिक संकटो के कारण वो अपने पिता का सपना पूरा न कर सकें लेकिन उनके बेटे ने वो कर दिखाया, जिसने न केवल उनकी सीना गर्व से चौड़ा कर दिया बल्कि भारत का नाम भी रोशन कर दिया। अर्शदीप अपनी सफलता के लिए अपनी मां को और सिख धर्म की परंपरा चढ़दी कला को सबसे बड़ा संबल माना। वो कहते है कि कठिन ट्रेनिंग में उनकी मां की सीख और हमेशा उच्च मनोबल और सकारात्मक रहने की प्रेरणा ने उन्हें सफल होने के लिए प्रेरित किया था। अर्शदीप कहते है कि वो भले ही बचपन से इंग्लैड में रहते है लेकिन उनके घर के अंदर का माहौल आज भी पूरी तरह से पंजाब का है। हर में सभी पंजाबी में बात करते है..
हम सभी गुरुद्वारे जाते है, लंगर में संगतो की सेवा करते है,, सिख धर्म से जुड़े सभी मूल दायित्वो को निभाने में, उन्हें सहेजने में कभी कोई कमी नहीं छोड़ते.. पंजाब औप सिक्खिज्म हमारे दिल में बसा हुआ है। उन्होंने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से Mathematics and Philosophy की पढ़ाई पूरी की और 2021 में ब्रिटिश वायुसेना जॉइन की थी, जहां उन्होंने officer training पूरी की, जिसके बाद 2023 में Primary flight training ली और 2024 में Fighter aircraft training ली थी, हालांकि उन्हें विंग मिल गई है लेकिन advanced fighter aircraft उड़ाने के लिए अभी उन्हें 1 साल की rigorous training भी लेनी होगी। अर्शदीप ने अपनी इस उपलब्धि पर खुशी के साथ साथ उम्मीद जताई है कि अगला भारतीय पायलट आने में हमें 80 सालो का लंबा इंतजार न करना पड़े और वो ही आखिर सिख न बने। अर्शदीप की ये बातें उनके पॉजीटिव अप्रोच्च को दर्शाती है.. जो उन्हें इतने कठिन प्रशिक्षण के बाद भी सफल होने और सदा अच्छा सोचने के लिए प्रेरित करती है।













































