इक ओंकार सतनाम का जाप कैसे बदल सकता है आपकी जिंदगी? जानिए पूरी महिमा – Ik Onkar Satnam Jaap

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 05 सितम्बर 2026, 09:36 PM Updated: 05 सितम्बर 2026, 09:36 PM
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Ik Onkar Satnam Jaap: जैसे ही गुरुद्वारे के अंदर आप प्रवेश करते है… अपने मन मस्तिष्क में खुद ही इक औंकार सतनाम औऱ वाहेगुरु का जप चलने लगता है.. यकीन ना हो तो ट्राई करके देखियेगा.. आप इसके अलावा कुछ और सोच ही नही पाते है। स्त्री हो या पुरुष,. बच्चे हो या बूढ़.. ये गुरुद्वारे की खूबसूरती और सिख धर्म की अनोखी और मजबूत विश्वास से भरी परंपरा ही है कि इक ओंकार का नाम सुनते ही आप अपने सिर को ढक कर ही गुरुद्वारे में प्रवेश करते है। इस एक जप में इतनी शक्ति है कि हजारों सालों के तप से भी वो आत्मिक शांति न मिले। जो केवल इन तीन शब्दों को बोलने मात्र से ही मिलती है। सिख धर्म में इक ओंकार सतनाम शब्द का क्या महत्म है। वो सच्चा सिख ही समझ सकते है। अपने इस वीडियो में हम आपको इस चमत्कारी ज्ञानी  शब्दों के उच्चारण से आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आ सकता है.. उसके बारे में बतायेंगे.. कैसे केवल ये तीन शब्दों संगतो को उनके दुखों के आंडबर से बाहर लाकर शांति के रास्ते पर ले जाता है। क्या है इक ओंकार सतनाम के जप की महिमा।

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 Ik Onkar Satnam Jaap का असली अर्थ क्या है?

इक ओंकार सतनाम तीन अलग अलग शब्द है.. जिन्हें एक साथ लेने से न केवल इनते अर्थों की महानता बढ़ती है बल्कि हर एक सिख के लिए परमात्मा के करीब जाने का ये मूल मंत्र भी है।

इक शब्द का मतलब है- एक.. जो परमात्ना की एकीकृत सत्ता के लिए इस्तेमाल होता है।

ओंकार का अर्थ है ब्राह्मांड की वो अनंत उर्जा, जो ओम के रूप में सुनाई देता है.. ये वो नाद है जिससे सष्टि की रचना हुई है। एक ऐसे निराकार शक्ति जो संसार के कण कण में समाया है.. जो प्रतीक है कि ये शक्ति एक ही है.. उसका बंटवारा नहीं हो सकता।

वहीं सतनाम का मतलब है.. वो अंनत उर्जा की शास्वत है,, सच्ची है.. सतनाम यानि का सच्चा नाम। संसार में केवल एक ही शास्वत सत्य है। दुनिया की हर चीज समय के साथ बदल जाती है, जिसकी उत्पत्ति होती है और वो फिर समाप्त हो जाती है लेकिन जो शास्वत सत्य है.. वो ब्राह्मांडिय उर्जा कभी न तो खत्म हो सकती है और न ही उसे कभी बदला जा सकता है।

सबसे पहले ‘Ik Onkar Satnam Jaap’ का जाप किसने किया?

इक ओंकार सतनाम का जाप पहली बार सिख धर्म की स्थापना करने से पहले प्रथम गुरु नानक देव जी ने 1499 के आसपास वेईं नदी के किनारे कहा था, जब उन्हें सुल्तानपुर लोधी में वेईं नदी के किनारे स्नान करने के दौरान नदी में आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। उस वक्त उनकी उम्र करीब 30 साल रही होगी.. जिसके बाद ही वो उदासियों के लिए निकले थे। गुरु साहिब ने स्नान करने के बाद सबसे पहले कहा था… न कोई हिंदू है, और न कोई मुसलमान..केवल इक ओंकार सतनाम है।

सिखों के पवित्र धर्म ग्रंथ श्री गुरु साहिब की शुरुआत ही इसी मूल मंत्र से हुई है। जो कि इस तरह से है- ੴ(इक ओंकार) सत नामु कर्ता पुरखु निरभौ निरवैरु अकाल मूर्ति अजूनी सैभम गुर प्रसादि

इन पक्तियों का मतलब है- ईश्वर एक है और वो ब्राह्मणंड के कण कण में समाया है..उसका नाम और अस्तित्तव ही संसार में शास्वत सत्य है.. वहीं पूरे शृष्टि के बनाने वाला है..और वो पूरी तरह से भय से रहित है, उनका किसी से कोई बैर नही.. वो समय के चक्र से परे एक अविनाशी शक्ति है.. जो कभी खत्म नही हो सकती.. वो एक जीवन मरण के चक्र से मुक्ति अजन्मी शक्ति है, जिसे किसी ने नहीं बनाया बल्कि वो खुद प्रकाशमान हुआ.. जो कि व्यक्ति को सच्चे गुरु पवित्र मन से ही हालिल होता है।

जाप से आसपास की नकारात्मकता दूर

इक ओंकार सतनाम के जाप मात्र से आपके अंदर और आसपास की नकारात्मकता दूर होने लगती है। आप सदैव पॉजीटिव महसूस करने लगेंगे। आपके जीवन के सभी बाधाओ  को दूर करता है.. और आपके मन में चल रहे द्वंद को दूर कर आपको शांति देता है। आपके तनाव को दूर करता है और आपके सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है। आपके मन में भरे हुए धमंड को दूर कर आपको ईश्वर का सच्चा रूप दिखाता है। आपके अंदर मानवता और करूणा की भावना को लाता है.. आपके अंदर के पांच विकारों को दूर करने आत्मसात करने में सहायक होता है। आपकी आत्मिक जागृति कर ये आपको संसार के भेदभाव, जातपात, अमीर गरीब की भावनाओं से निकालता है और सबको एक समान, एक नजरो से देखने के लिए प्रेरित करता है। ये जाप आपको समझाता है कि संसार में केवल एक ही ईश्वर है। जिसके हिसाब से ही संसार चल रहा है.. और कुछ भी उसकी मर्जी के बिना नहीं होता है। इक ओंकार सतनाम का नाम जब तक संसार में है.. ये संसार चलायमान रहेगा। इसलिए हमें कभी ये नही भूलना चाहिए कि गुरु है तभी संसार का अस्तित्व है। उसे कभी भी नकारा नही जा सकता है। भले ही कोई कितनी कोशिश कर लें.. लेकिन संसार में मुक्ति का रास्ता इक ओंकार सतनाम से ही है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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