दलेर सिंह से Daler mehndi तक, जानिए भांगड़ा किंग के नाम बदलने और सुपरस्टार बनने का सफर

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 19 अगस्त 2026, 08:50 PM Updated: 19 अगस्त 2026, 08:50 PM
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Daler mehndi: इस वक्त संगीत की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चे पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के ही है… हो भी क्यों न हो.. पंजाब ने भारत का पहला रैपर हनी सिंह दिया है। जिन्होंने इंडियन ऑडियंस को हिंदुस्तानी अंदाज में रैप से रूबरू कराया… लेकिन अगर आपसे ये पूछे कि पंजाबी संगीत और गानों का जिक्र आते ही आपको जेहन में किसका नाम आता है। तो शायद 90 परशेंट लोगो का जवाब होगा…. हो जायेगी तेरी बल्ले बल्ले फेम दलेर मेंहदी। एक डाकू से प्रेरित होकर मिला दलेर नाम.. जब उनके करियर में रोड़ा बना तो उन्होंने उस नाम को अपनाया जिसने उनके करियर को चार चांद लगाया.. हालांकि करीब 7 पुश्तों से संगीत से जुड़े परिवार से होने के बाद भी उन्होंने मात्र 11 साल की उम्र में संगीत सीखने के लिए घर छोड़ दिया था। ऐसा क्यों.. अपने इस लेख में हम बात करेंगे दलेर मेहंदी के इस नाम की.. जिसका एक डाकू से गहरा संबंध है.. औऱ खुद परमेश्वर ने माता पिता की इच्छा पूरी की.. वहीं क्यों संगीत विदों के परिवार से होकर भी घर छोड़ना पड़ा था उन्हें।

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डाकू से ‘दलेर’ बनने की कहानी

11 अगस्त 1967 को बिहार के पटना में एक पंजाबी सिख परिवार में जन्मे दलेर मेंहदी को उनके माता पिता ने नाम दिया था दलेर सिंह। मां बलबीर कौर राज्य स्तरीय पहलवान थी तो वहीं पिता अजनेर सिंह एक शास्त्रीय गायक हुआ करते थे.. इस कारण घर में सेहत हो या संगीत दोनो से प्यार करने और उनका सम्मान करने का माहौल था। वो भी बचपन से संगीत सीखने के साथ साथ सेहत पर भी ध्यान देते थे। कहते है कि जब दलेर पैदा होने वाले थे, तब उन दिनों पूरे क्षेत्र में डाकू दलेर सिंह का बहुत नाम था। डाकू दलेर सिंह से अमीर पूंजीपति डरते थे और गरीब लाचार प्यार करते थे। क्योंकि वो उनकी मदद किया करता था। दलेर सिंह के कारनामों से प्रेरित होकर पिता ने सोचा कि अगर उनका बेटा होगा तो वो दलेर सिंह ही नाम रखेंगे… भगवान ने प्रार्थना सुनी और घर में पहले बेटे का जन्म हुआ.. हैरानी की बात है कि जब गुरूद्वारे में भी बच्चे के नाम को लेकर पूछा गया, तो पहला अक्षर था द… बस पिता ने नाम रख दिया दलेर सिंह। लेकिन एक शास्त्रीय संगीत की दुनिया से भांगड़ा किंग बनने का सफर इतना आसान नहीं था।

दलेर मेंहदी का पहला स्टेज शो

बचपन से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की वाणियों औऱ कीर्तन को गा कर बड़े होने वाले दलेर मेंहदी शास्त्रीय संगीत के साथ साथ पटियाला घराना शैली की संगीत से काफी प्रभावित थे, और वो उसमें पारंगत होना चाहते थे, लेकिन घर से उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली.. नतीजा ये हुआ कि मात्र 11 साल की उम्र में ही उन्होंने घर छोड़ दिया औऱ सीधा गोरखपुर उस्ताद राहत अली खान साहब के पास पहुंचे.. जहां उनकी असली परिक्षा शुरु हुई। वो 2 सालो तक कड़ा अभ्यास करते रहे, इस दौरान वो लुधियाना के एक तबला वादक के साथ रहते थे, ताकि उनसे संगीत के ताल की समझ सीख सकें..जब वो 13 साल के हुए तब उन्हें पहली बार स्टेज पर परफोर्म करने का मौका मिला.. और जौनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 20 हजार लोगो की प्रेजेंस में दलेर मेंहदी ने अपना पहला स्टेज शो किया.. उनकी गायकी इतनी जबरदस्त और एनजेटिक थी कि लोगो ने खुशी से फूल और पैसे बरसाने लगे थे। इसी शो के दौरान करीब 2 साल के बाद उनके माता पिता की मुलाकात अपने बेटे से हुई थी। माता पिता ने बेटे का जूनून देखा और उनके सपनो में साथ देने का वादा किया।

दलेर मेंहदी के छोटे भाई मीका सिंह

जिसके बाद वो घर लौट गए और अब उन्होंने गजल गायकी की शुरुआत की थी जिसमें उनके प्रेरणा थे कवि फिराक गोरखपुरी साहब की शायरियां। इस दौरान दलेर मेंहदी मशहूर गजल गायक परवेज मेंहदी के बड़े फैन थे.. और उनसे प्रेरित होकर उन्हें सम्मान देने के लिए दलेर सिंह ने भी अपना नाम दलेर मेंहदी रखा.. लेकिन 90 के दशक की शुरुआत में शुरु हुआ उनका भांगड़ा किंग बनने का सफर। साल 1991 में दलेर मेहंदी ने अपने भाईयो के साथ मिलकर एक ऑफिशियल बैंड बनाया। इसी बैंड में गिटार बजाने वाले दलेर मेंहदी के छोटे भाई अमरीक सिंह भी थे.. अमरीक सिंह को आज पूरा बॉलीवुड मीका सिंह के नाम से जानता है, जिन्हें बैड बॉय भी कहा जाता है। दलेर मेंहदी ने ही मीका को उनका पहला बड़ा ब्रेक लेने में मदद की थी। दलेर मेंहदी शाय़द ऐसे सितारे थे जिन्हें भारत के बाहर पहले पहचान मिली थी और बाद में भारत में..जी हां. दरअसल साल 1994 में कजाकिस्तान में आयोजित होने वाले म्यूजिक प्रतियोगिता ‘वॉयस ऑफ एशिया इंटरनेशनल एथनिक एंड पॉप म्यूजिक’ में दलेर मेंहदी को भी हिस्सा लेने का मौका मिला.. जिसमें उन्होंने जीत हासिल की थी.. ये उनके करियर को ग्रूम करने का बड़ा मौका था.. और 1995 में उन्हें पहली बार इंडियल एलबम  बोलो ता रा रा’ रिलिज हुआ। इस गाने ने ऐसा तहलका मचाया कि भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया झूम उठी दलेर मेंहदी ने अपना पहला स्टेज शो किया।

भांगड़ा का बेताज बादशाह दलेर मेहंदी

इसके बाद ‘हो जाएगी बल्ले बल्ले’ जैसे गानों ने उन्हें भांगड़ा का बेताज बादशाह बना दिया। वो इंडिया के सबसे बड़े पॉप स्टार बन गए। लेकिन अब वो पंजाबी संगीत तक ही सिमित नहीं थे.. 1997 में उन्हें पहली बार अमिताभ बच्चन की फिल्म मृत्युदाता में ना ना ना ना रे गाना गाने को मिला.. अमिताभ के साथ डेब्यू अपने में ही बेहद खास था, ऊपर से दलेर की आवाज में गाया ये गाना रातों रात दर्शकों की पहली पसंद बन गया। लेकिन असली ट्विस्ट तो तब आया जब 90 के दशक के अंत में आलोचकों ने कहा कि दलेर मेहंदी के गाने सिर्फ इसलिए चलते हैं क्योंकि उनके वीडियो में खूबसूरत लड़कियां होती हैं। इस बात को गलत साबित करने के लिए दलेर मेहंदी ने ‘तुनक तुनक तुन’ गाना बनाया। इस वीडियो में कोई लड़की नहीं थी, बल्कि कंप्यूटर ग्राफ़िक्स (CGI) की मदद से दलेर मेहंदी ने खुद के ही 4 रोल किए। यह गाना भारत का पहला ऐसा वीडियो था जिसे ‘ब्लू स्क्रीन’ (क्रोमा) पर शूट किया गया था, और यह आज भी पूरी दुनिया में सबसे बड़ा मीम (Meme) और सुपरहिट गाना है! दलेर मेंहदी की आवाज का जादू आज भी बरकरार है। तमाम संघर्ष भी उन्हें सफलता की सीढ़ी चढ़ने से नहीं रोक सकी.. क्योंकि उनका संघर्ष सच्चा था। उनका सच्चा सच्चा था।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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