Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण जल्द ही लगने जा रहा है, जिसके दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक देगा। इस खगोलीय घटना के बाद आसमान में कुछ पलों के लिए पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा। बता दें कि 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) लगने वाला है। ऐसा नजारा तब बनता है, जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है और दिन में भी रात जैसा नजारा दिखाई देने लगता है।
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बता दें कि यह सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय देश में रात होगी और सूर्य क्षितिज से नीचे रहेगा। हालांकि, भारतीय समयानुसार (IST) इस अद्भुत सूर्य ग्रहण से जुड़ी मुख्य जानकारियां और सटीक समय इस प्रकार हैं:
ग्रहण का समय और अवधि
- आंशिक ग्रहण की शुरुआत: 12 अगस्त, रात 09:04 बजे
- पूर्ण ग्रहण (टोटैलिटी) की शुरुआत: 12 अगस्त, रात 10:23 बजे
- ग्रहण का पीक (चरम समय): 12 अगस्त, रात 11:16 बजे
- पूर्ण ग्रहण की समाप्ति: 13 अगस्त, रात 12:08 बजे
- ग्रहण का कुल समापन: 13 अगस्त, सुबह 04:25 बजे
जिन देशों में यह पूर्ण रूप से दिखाई देगा, वहां अधिकतम 2 मिनट 18 सेकंड तक सूरज पूरी तरह गायब रहेगा और दिन में रात जैसा नजारा दिखेगा।
सूतक काल के नियम
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल केवल उसी स्थान पर प्रभावी होता है जहाँ ग्रहण(Surya Grahan) दिखाई देता है। क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। इस दौरान देश के सभी मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे, पूजा-पाठ हमेशा की तरह सामान्य रूप से होगी और शुभ कार्यों या खान-पान पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
दुनिया में कहाँ-कहाँ दिखेगा ‘दिन में रात’ का नजारा?
यह दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में दिखाई देगा:
- पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse): ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस के कुछ हिस्सों में दिन के समय पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा।
- आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse): यूरोप के अधिकांश देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी हिस्सों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में यह आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।
क्यों खास है यह Surya Grahan ?
माना जा रहा है कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) बेहद खास है, क्योंकि यह सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना गया है। इसलिए अपनी ही राशि में सूर्य का पीड़ित होना एक बड़ी खगोलीय और आध्यात्मिक घटना है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, पिता और सरकारी क्षेत्र का कारक माना जाता है। सिंह राशि सूर्य की स्वयं की राशि (स्वराशि) है। अपनी ही राशि में राहु-केतु के प्रभाव के कारण सूर्य का ग्रसित होना देश-दुनिया की राजनीति और बड़े लीडर्स (नेताओं) के लिए बड़े बदलावों का संकेत देता है।
यह ग्रहण मघा नक्षत्र में लग रहा है, जिसके स्वामी केतु हैं और इसके देवता पितर (पूर्वज) माने जाते हैं। मघा नक्षत्र में ग्रहण लगने के कारण इस दौरान पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले कार्य और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में किया गया जप और ध्यान सामान्य दिनों की तुलना में लाखों गुना अधिक फलदायी होता है। इस दौरान भले ही भौतिक रूप से पूजा-पाठ वर्जित हो, लेकिन मानसिक रूप से गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करने से मानसिक शक्ति और मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है।
सनातन धर्म में ग्रहण के ठीक बाद गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। ग्रहण समाप्त होने के बाद अनाज, काले तिल, ऊनी कपड़े और तांबे के बर्तनों का दान करने से कुंडली के सूर्य दोष, राहु दोष और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
क्योकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ ‘दृश्यम न कुरुते, फलम न ददाति’ का नियम लागू होगा। इसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए दैनिक पूजा-पाठ या भोजन आदि पर कोई धार्मिक पाबंदी (सूतक नियम) नहीं रहेगी, लेकिन राशि चक्र पर इसका सूक्ष्म ज्योतिषीय प्रभाव जरूर पड़ेगा।













































