Gomukhi Shankh: क्या आपके घर में हर छोटी बात पर कलह होती है या बरकत रुक गई है? हो सकता है आपके घर की एनर्जी (ऊर्जा) ब्लॉक हो गई हो। सावन का महीना चल रहा है और क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा बदलाव आपके घर की पूरी एनर्जी को बदल सकता है? शास्त्रों के अनुसार, गोमुखी शंख को बेहद चमत्कारी माना गया है।
इस पावन महीने में महादेव और मां लक्ष्मी की असीम कृपा पाने के लिए अपने घर ले आएं ‘गोमुखी शंख’। यह कोई साधारण शंख नहीं है, बल्कि साक्षात मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद है, जो घर से हर तरह की नेगेटिव एनर्जी को सोख लेता है। पर ध्यान रहे, गलत शंख लाने से नुकसान भी हो सकता है! तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं असली गोमुखी शंख की पहचान और इसे रखने के सही नियम।
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Gomukhi Shankh की पहचान कैसे करें?
बाजार में नकली शंखों से बचने के लिए इन 4 बातों का खास ध्यान रखें:
- गाय के मुख जैसा आकार: इस शंख का मुख्य सिरा या बनावट दिखने में हूबहू गाय के मुख (चेहरे) जैसी होती है, इसीलिए इसे ‘गोमुखी शंख’ कहा जाता है।
- प्राकृतिक रंग: असली गोमुखी शंख प्राकृतिक रूप से सफेद या हल्के मटमैले रंग का होता है। इस पर कोई कृत्रिम रंग या पेंट नहीं होना चाहिए।
- चमत्कारी ध्वनि: इसे बजाने पर निकलने वाली ध्वनि बहुत गहरी, तीक्ष्ण और ‘ॐ’ के उच्चारण जैसी गूंज पैदा करती है।
- अखंडित स्वरूप: असली शंख प्राकृतिक होता है, इसलिए ध्यान से देखें कि वह कहीं से भी टूटा, चटका या खंडित (Damage) न हो।
घर की एनर्जी कैसे बदलता है यह शंख?
शास्त्रों और वास्तु के अनुसार, घर में गोमुखी शंख (Gomukhi Shankh) रखने के 3 बड़े चमत्कारी फायदे होते हैं। माना जाता है कि सावन में इसे घर के मंदिर में स्थापित करने से घर का हर प्रकार का वास्तु दोष दूर होता है और परिवार में शांति आती है। गोमुखी शंख को नियमित बजाने से जो तरंगें (Vibrations) निकलती हैं, वे वातावरण से हानिकारक बैक्टीरिया और नकारात्मक शक्तियों को पूरी तरह खत्म कर देती हैं। इस शंख की पवित्र उपस्थिति से घर में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की असीम कृपा बनी रहती है, जिससे घर में कभी पैसों की कमी नहीं होती।
रखने और पूजा करने के जरूरी नियम (Vastu Rules)
गोमुखी शंख (Gomukhi Shankh) का पूरा लाभ उठाने के लिए पूजा के समय इन नियमों का पालन जरूर करें:
- जमीन पर न रखें: शंख को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें। इसे हमेशा साफ लाल या सफेद कपड़े के ऊपर, पीतल या तांबे की थाली में आसन देकर स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्धिकरण: बाजार से घर लाने के बाद सबसे पहले शंख को गंगाजल से स्नान कराएं और उस पर चंदन का पवित्र तिलक लगाएं।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाना वर्जित: ध्यान रखें कि भगवान शिव की पूजा में शंख बजाना शुभ है, लेकिन शंख से शिवलिंग पर जल या दूध भूलकर भी न चढ़ाएं।
- बजाने और पूजा का शंख अलग रखें: यदि आप शंख बजाते हैं, तो बजाने के बाद उसे मंदिर से थोड़ा अलग रखें। बजाने से शंख उच्छिष्ट (जूठा) माना जाता है, इसलिए पूजा का शंख हमेशा अलग और शांत होना चाहिए।













































