NEET protest Parliament: NEET परीक्षा और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर संसद में जारी हंगामे के बीच विपक्षी INDIA गठबंधन में भी मतभेद खुलकर सामने आते दिखे। लोकसभा के अंदर और बाहर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस पूरे घटनाक्रम ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित होने के बाद सदन के बाहर दोनों नेताओं के बीच बहस हुई। इससे पहले सदन के अंदर भी अखिलेश यादव ने कांग्रेस और भाजपा के बीच “समझौते” का तंज कसते हुए बयान दिया था।
लोकसभा में क्या हुआ? NEET protest Parliament
दोपहर करीब 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो NEET मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहा था। समाजवादी पार्टी के सांसदों के साथ अखिलेश यादव भी अपनी बात रखना चाहते थे। इसी दौरान स्पीकर ने पहले कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल को बोलने का मौका दिया। उनके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू अपनी बात रखने लगे। इसे लेकर अखिलेश यादव नाराज हो गए। उन्होंने अपना हेडफोन उतारा और अपने सांसदों के साथ सदन से बाहर जाने के लिए मुड़ गए।
स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि आपने भी बोलने के लिए कहा था, आप अपनी बात रखिए। इस पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “क्या बोलें? आपने दोनों को बोलने का मौका दे दिया। क्या समझौता हो गया है?”
उन्होंने कहा कि सबसे पहले छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर जवाब मिलना चाहिए। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और छात्राओं के साथ गलत व्यवहार हुआ और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस्तीफे की मांग पर भी दिखा मतभेद
जब कांग्रेस की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई गई, तब अखिलेश यादव ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “इस्तीफे बाद में भी दिए जा सकते हैं। सबसे पहले छात्रों पर हुई बर्बरता का जवाब मिलना चाहिए।” सदन के दौरान जब के.सी. वेणुगोपाल ने उन्हें टोका, तो अखिलेश ने कहा कि इस्तीफा तो जब चाहेंगे तब ले लेंगे, लेकिन फिलहाल छात्रों के मुद्दे पर जवाब ज्यादा जरूरी है।
सदन के बाहर भी जारी रही बहस
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी के.सी. वेणुगोपाल और अखिलेश यादव के बीच बातचीत जारी रही। वेणुगोपाल ने उनसे पूछा कि उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जोर क्यों नहीं दिया, जबकि यही छात्रों की प्रमुख मांग है जिसे कांग्रेस लगातार संसद में उठा रही है। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव के बयान से कांग्रेस नेता खासे नाराज नजर आए।
PM आवास पर प्रदर्शन को लेकर भी जताई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेतृत्व से यह शिकायत भी की कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अन्य विपक्षी दलों को भरोसे में लिए बिना प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला क्यों लिया। उनका कहना था कि इतने बड़े राजनीतिक कदम से पहले INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों से चर्चा की जानी चाहिए थी। यह नाराजगी भी दोनों दलों के बीच मतभेद की एक वजह मानी जा रही है।
AAP भी उठा चुकी है सवाल
इससे पहले मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। AAP सांसद संजय सिंह ने पूछा था कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने की अनुमति कैसे मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा ने राहुल गांधी को पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन की इजाजत दी। इसके बाद अब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भी इस मुद्दे पर खुलकर मतभेद सामने आ गए हैं।
संसद में जारी रहा गतिरोध
दोपहर दो बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी संसद में हंगामा जारी रहा। कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी रही कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले इस्तीफा दें, उसके बाद ही NEET मुद्दे पर चर्चा हो। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी नियम 267 के तहत चर्चा की मांग करते हुए कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक चर्चा का कोई मतलब नहीं है।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सदन के तय नियमों के तहत ही बहस होगी। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।





























